द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास च शरैस्तव पुत्रस्य पश्यतः ||
७५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास तत्सैन्यं समन्ताच्च शरैर्नृपान् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
छादय़ामास तद्वर्षमपकृष्य ततो वनात् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
छादय़ामास तां कन्यां पुमानिति च सोऽव्रवीत् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास वाणौघैः फल्गुनं कृतहस्तवत् ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास वाणौघैः समन्ताद्भरतर्षभ ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास वाणौघैः समन्ताल्लघुहस्तवत् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास शैनेय़ं जलदो भास्करं यथा ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास सङ्क्रुद्धस्तिष्ठ तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे क्रुद्धोऽन्तक इव प्रजाः ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे तदद्भुतमिवाभवत् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे पार्थं वाणैरय़ोमुखैः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे मेघः सूर्यमिवोदितम् ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे मेघः सूर्यमिवोदितम् ||
६१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे शरैः संनतपर्वभिः ||
४४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे शरैः संनतपर्वभिः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे शरैः संनतपर्वभिः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास समरे शरैः संनतपर्वभिः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामास सहसा मेघो वृष्ट्या यथाचलम् ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३९
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामासतुः सङ्ख्ये शरैः संनतपर्वभिः ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
छादय़ामासतुरुभौ क्षौमैर्माल्यैश्च कौरवम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामासतुरुभौ शरवर्षेण पार्षतम् ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ामासुरथ ते तव स्यालस्य तं रथम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
छादय़ामासुरसुरा वाणैर्मर्मविभेदिभिः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
छादय़ामि जगद्विश्वं भूत्वा सूर्य इवांशुभिः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
२२१
वैशम्पाय़न उवाच
छादय़ित्वा च वो गात्रैः करिष्ये मरणं सह ||
७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
छादय़ित्वा ततो वाणैः कर्णं प्रभ्राम्य चार्जुनः |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
छादय़ित्वा रणे द्रोणो रथस्थं रथिनां वरम् |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ित्वा रणेऽत्यर्थं हार्दिक्यं तु स सात्यकिः ||
४९ ख
विराट पर्व
अध्याय
२
अर्जुन उवाच
छादय़िष्यामि कौन्तेय़ माय़यात्मानमात्मना ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
छादय़ेतां महेष्वासौ कृतप्रतिकृतैषिणौ ||
४६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
छादय़ेतां शरव्रातैरन्योन्यमपराजितौ ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
छादय़ेतां शरव्रातैस्तदद्भुतमिवाभवत् ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
छाय़या चातिथींस्तात पूजय़न्ति महीरुहाः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३५
व्यास उवाच
छाय़ा स्वा दाशवर्गस्तु दुहिता कृपणं परम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
छाय़ां पश्यन्समावृत्तः स मुनिः परय़ा मुदा ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
छाय़ां स्वपुत्रसदृशीं सर्वतोऽनपगां सदा |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४५
व्रह्मो उवाच
छाय़ातपविलेखं च निमेषोन्मेषविह्वलम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
५४
वृहदश्व उवाच
छाय़ाद्वितीय़ो म्लानस्रग्रजःस्वेदसमन्वितः |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
वासुदेव उवाच
छाय़ाभूताय़ दान्ताय़ यतय़े व्रह्मचारिणे ||
१० ग
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
छाय़ाश्च विपुला दृष्ट्वा देवगन्धर्वरक्षसाम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७३
वाय़ुरु उवाच
छाय़ाय़ामप्सु वाय़ौ च सुखमुष्णेऽधिगच्छति |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
छाय़ाय़ामातपे चैव समदर्शी महाद्युतिः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
छाय़ेवानपगा राजन्सततं वशवर्तिनी |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
छित्त्वा च ताञ्शरान्राजा क्रोधसंरक्तलोचनः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
छित्त्वा तं खण्डशः पापं दस्युभ्यः प्रददुस्तदा ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
छित्त्वा तं च ननादोच्चैस्तव पुत्रस्य पश्यतः ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
छित्त्वा तु तानाशुगमान्कङ्कपत्राञ्शिलाशितान् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
छित्त्वा तु शक्तिं गाङ्गेय़ः सात्यकिं नवभिः शरैः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
छित्त्वा तु समरे वाणं शरैः संनतपर्वभिः |
१५ क