शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
श्रीरु उवाच
एष मे निहितः पादो योऽय़मप्सु प्रतिष्ठितः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
पितर ऊचुः
एष मे पार्श्वतो वह्निर्युष्मच्छ्रेय़ो विधास्यति ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
४१
अर्जुन उवाच
एष मे प्रथमः कामो भगवन्भगनेत्रहन् |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
कण्व उवाच
एष मे रुचितस्तात जामाता भुजगोत्तमः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२९
अर्जुन उवाच
एष मे संशय़ो जातस्तं छिन्धि मधुसूदन ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
एष मे सर्वधर्माणां धर्मोऽधिकतमो मतः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२९४
व्राह्मण उवाच
एष मे सर्वलाभानां लाभः परमको मतः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२८०
सावित्र्यु उवाच
एष मे हृदि सङ्कल्पः समय़श्च कृतो मय़ा ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
एष मे हृदि सङ्कल्पो यदर्थमिदमुद्यतम् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
अम्वो उवाच
एष मे ह्रिय़माणाय़ा भारतेन तदा विभो |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५४
कुशिक उवाच
एष मेऽनुग्रहो विप्र जीविते च प्रय़ोजनम् |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
एष मोक्षविदां धर्मो वेदोक्तः सत्पथः सताम् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
एष मोक्षय़ितव्येति प्राहुरव्यक्तगोचरात् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
एष याति शिवः पन्था याहि वार्ष्णेय़सारथिः ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
भगवानु उवाच
एष यास्यामि राजानं धृतराष्ट्रमभीप्सय़ा ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
एष युध्यति सङ्ग्रामे हैडिम्वेन दुरात्मना |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्याध उवाच
एष योगविधिः कृत्स्नो यावदिन्द्रिय़धारणम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
एष योगश्च साङ्ख्यं च व्रह्म चाग्र्यं हरिर्विभुः ||
७४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
एष योगोऽत्र विहितः प्रतिघातो महात्मना ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
एष योत्स्यति सङ्ग्रामे कृष्णं चक्रगदाधरम् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
एष योत्स्यति सङ्ग्रामे गजस्कन्धविशारदः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
एष योत्स्यति सङ्ग्रामे गजस्कन्धविशारदः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
एष योत्स्यति सङ्ग्रामे नाशय़न्पूर्वसंस्थितिम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
एष योत्स्यति सङ्ग्रामे सूदय़न्वै परान्रणे |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
एष योत्स्यति सङ्ग्रामे स्वां चमूं सम्प्रहर्षय़न् |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
एष योत्स्यामि वः सर्वान्निवार्य शरवागुराम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
एष राक्षससैन्यानां सर्वेषां रथसत्तमः |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
एष राजन्नीदृशो वै उतथ्यो व्राह्मणर्षभः |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
एष राजन्नीदृशो वै व्राह्मणः कश्यपोऽभवत् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एष राजसहस्राणां वक्त्रैः पङ्कजसंनिभैः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
एष राजा महावाहुरमर्षी क्रोधमूर्छितः |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
एष राज्ञां परो धर्मः समरे चापलाय़नम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
एष राज्ञां परो धर्मः सह्यौ जय़पराजय़ौ ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
एष रुद्रं महादेवं त्रिपुरान्तकरं हरम् |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
एष रेणुः समुद्भूतो दिवमावृत्य तिष्ठति ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
एष रैभ्याश्रमः श्रीमान्पाण्डवेय़ प्रकाशते |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१३६
भरद्वाज उवाच
एष रैभ्यो महावीर्यः पुत्रौ चास्य तथाविधौ |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
एष रौद्रश्च सङ्घातो महान्युक्तश्च तेजसा |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एष लोकगुरुर्व्रह्मा जगदादिकरः प्रभुः |
६९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
वसिष्ठ उवाच
एष लोकगुरुस्त्र्यक्षः सर्वलोकनमस्कृतः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एष लोकनिधिर्धीमानेष लोकविसर्गकृत् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
एष लोकहितार्थं वै पिवामि वरुणालय़म् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
एष लोकान्ससर्जादौ देवांश्चर्षिगणैः सह |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
एष वः कौरवो राजा धार्तराष्ट्रो भविष्यति ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
एष वः शाश्वतः पन्थाः पूर्वैः पूर्वतरैर्गतः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
एष वक्ष्यति वै पृष्टो यथा वृत्तं नरोत्तम ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
एष वाणीकृतो देवि धर्मः सेव्यः सदा नरैः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
एष वातिकषण्डो वै प्रख्यातः सत्यविक्रमः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
एष वासो हि मे मेध्यः स्वर्गीय़श्च मतो हि मे |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
एष विक्रान्तय़ोधी च चित्रय़ोधी च सङ्गरे |
२७ क