शान्ति पर्व
अध्याय
७७
भीष्म उवाच
जन्मकर्मविहीना ये कदर्या व्रह्मवन्धवः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
जन्मकोटिसहस्रेषु नानासंसारय़ोनिषु ||
१५७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
जन्मक्षय़निमित्तं च शक्यं प्राप्तुमिति श्रुतिः ||
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३१
व्राह्मण उवाच
जन्मक्षय़े भिन्नविकीर्णदेहः; पुनर्मृत्युं गच्छति जन्मनि स्वे ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
जन्मतस्तु प्रमाणेन ज्येष्ठो राजा युधिष्ठिरः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०६
गुरुरु उवाच
जन्मतो गर्भवासं तु शुक्रशोणितसम्भवम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
जन्मदोषपरिक्षीणाः स्वभावे पर्यवस्थिताः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
जन्मना तपसा वृद्धस्तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
युधिष्ठिर उवाच
जन्मना यदि वाचारात्तन्मे व्रूहि पितामह ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
जन्मनीहाभवत्सत्त्वं पौर्विकं मे धनञ्जय़ ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
जन्मनैव महाभागो व्राह्मणो नाम जाय़ते |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
जन्मप्रभृति कृष्णश्च चक्रे तस्य क्रिय़ाः शुभाः |
६४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
जन्मप्रभृति कौन्तेय़ा नित्यं विनिकृतास्त्वय़ा |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
जन्मप्रभृति कौरव्य कृतपूर्वमथात्मनः ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६९
गन्धर्व उवाच
जन्मप्रभृति तस्मिंश्च पितरीव व्यवर्तत ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैश्रवण उवाच
जन्मप्रभृति ताः सर्वाः स्थितास्तात धनञ्जय़े ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
वासुदेव उवाच
जन्मप्रभृति ते कश्चिद्वृजिनं न ददर्श ह |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
जन्मप्रभृति पापानि कृतानि नुदते नरः ||
८९ ग
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
जन्मप्रभृति पार्थानां तत्राचारविधिक्रमः ||
६८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०२
वैशम्पाय़न उवाच
जन्मप्रभृति भीष्मेण पुत्रवत्परिपालिताः ||
१५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
४
विदुर उवाच
जन्मप्रभृति भूतानां क्रिय़ाः सर्वाः शृणु प्रभो |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१११
भीष्म उवाच
जन्मप्रभृति मद्यं च दुर्गाण्यतितरन्ति ते ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
जन्मप्रभृति मद्यं च सर्वे ते मुनय़ः स्मृताः |
७३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६०
गन्धर्व उवाच
जन्मप्रभृति यत्किञ्चिद्दृष्टवान्स महीपतिः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
जन्मप्रभृति यत्पापं स्त्रिय़ो वा पुरुषस्य वा |
५४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
४
विदुर उवाच
जन्मप्रभृति वर्तेत प्राप्नुय़ात्परमां गतिम् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
जन्मप्रभृति सत्यं च यो व्रूय़ान्निय़तेन्द्रिय़ः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
जन्मभूम्यनुरोधाच्च नान्यद्वासमरोचय़त् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०८
गुरुरु उवाच
जन्ममृत्युजरादुःखैर्व्याधिभिर्मनसः क्लमैः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
जन्ममृत्युजराव्याधिभय़ं वाप्युपजाय़ते ||
१३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
जन्ममृत्युजराव्याधिवेदनाभिरुपद्रुतम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
जन्ममृत्युभय़ाद्भीता योगाः साङ्ख्याश्च काश्यप |
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
जन्ममृत्युभय़ाद्योगाः साङ्ख्याश्च परमैषिणः ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९८
युधिष्ठिर उवाच
जन्ममृत्युविमुक्तं च विमुक्तं पुण्यपापय़ोः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
जन्ममृत्युविवादे च तथा विशसनेऽपि च |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
जन्ममृत्युविय़ुक्तं च विय़ुक्तं सदसच्च यत् ||
१०४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
जन्ममृत्यू च राजेन्द्र प्राकृतं तदचिन्तय़त् |
९७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
जन्मवन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामय़म् ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४८
भीष्म उवाच
जन्मवृत्तसमं लोके सुश्लिष्टं न विरज्यते ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९६
मनुरु उवाच
जन्मवृद्धिक्षय़श्चास्य प्रत्यक्षेणोपलभ्यते |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
५०
दुर्योधन उवाच
जन्मवृद्धिमिवार्थानां यो वृद्धिमभिकाङ्क्षते |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
जन्मशय़्यागतं देवं कार्त्तिकेय़मिव प्रभुम् ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
जन्मादिमूर्तिभेदानां कर्म भूतेषु वर्तते ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
जन्मान्तरमुपागम्य हय़ग्रीवस्तथा हतः ||
४९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८६
दूत उवाच
जन्यार्थमन्नं द्रुपदेन राज्ञा; विवाहहेतोरुपसंस्कृतं च |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
जनय़त्पावकं घोरं पितॄणां स प्रजाः सृजन् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
जनय़त्यङ्कुरं कर्म नृणां तद्वत्पुनर्भवम् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
जनय़त्यतुलां नित्यं कोशवृद्धिं युधिष्ठिर ||
१८ ख