वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
जरां व्रजेथा इति मे निहतोऽसौ निशाचरः ||
११ ख
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
जराथ तं देशमुपाजगाम; लुव्धस्तदानीं मृगलिप्सुरुग्रः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
७९
यय़ातिरु उवाच
जरादोषस्त्वय़ोक्तोऽय़ं तस्मात्त्वं प्रतिपत्स्यसे ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
जरापरिगतो वृद्धः क्षुधार्तो दुर्वलो भृशम् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
जराभिभूतः पुत्रान्स राजा वचनमव्रवीत् |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२९
श्रीभगवानु उवाच
जरामरणमोक्षाय़ मामाश्रित्य यतन्ति ये |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
जरामरणरोगेभ्यः प्रिय़मात्मानमुद्धरेत् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
जरामार्छन्महाघोरां नाहुषो रूपनाशिनीम् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
जरामृत्युं तथा जन्म दृष्ट्वा दुःखानि चैव ह ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०७
भीष्म उवाच
जरामृत्युमहाग्राहे न कश्चिदभिपद्यते ||
८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२८
अश्मो उवाच
जरामृत्युमहाग्राहे न कश्चिदववुध्यते ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८
अश्मो उवाच
जरामृत्यू ह भूतानि खादितारौ वृकाविव |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०७
भीष्म उवाच
जरामृत्यू हि भूतानां खादितारौ वृकाविव |
११ क
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
जराविध्यत्पादतले त्वरावां; स्तं चाभितस्तज्जिघृक्षुर्जगाम |
२० ख
सभा पर्व
अध्याय
७
नारद उवाच
जराशोकक्लमापेता निरातङ्का शिवा शुभा |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
जराशोकसमाविष्टं रोगाय़तनमातुरम् |
४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४५
व्रह्मो उवाच
जराशोकसमाविष्टं व्याधिव्यसनसञ्चरम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्ध इति ख्यातः स आसीन्मनुजर्षभः ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
जरासन्धं गतस्त्वेवं पुरा यो न मय़ा हतः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
जरासन्धं महावाहुमुपाय़ेन जनार्दनः |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
जरासन्धं महावीर्यं तौ हंसडिभकावुभौ ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
जरासन्धः स्ववीर्येण पार्थिवानकरोद्वशे ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
अर्जुन उवाच
जरासन्धप्रभृतय़ो घातिताः पृथिवीष्वराः ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
जरासन्धभय़ादेव प्रतीचीं दिशमाश्रिताः ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धरथं कृष्णो योजय़ित्वा पताकिनम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
जरासन्धवधः पर्व पर्व दिग्विजय़स्तथा |
४० क
सभा पर्व
अध्याय
१५
युधिष्ठिर उवाच
जरासन्धवलं प्राप्य दुष्पारं भीमविक्रमम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धविनाशं च राज्ञां च परिमोक्षणम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धश्च वक्रश्च शिशुपालश्च वीर्यवान् |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
जरासन्धश्च वलवान्सर्वराजविरोधकः |
८९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
जरासन्धश्चेदिराजो नैषादिश्च महावलः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
वासुदेव उवाच
जरासन्धश्चेदिराजो महात्मा; महावलश्चैकलव्यो निषादः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
जरासन्धसुतो वीरः स्वय़ं द्रोणमुपाद्रवत् ||
४० ख
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धस्ततो राजन्भीमसेनेन मागधः ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धस्य तद्रन्ध्रं ज्ञात्वा चक्रे मतिं वधे ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
जरासन्धस्य निधने कालोऽय़ं समुपागतः ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धह्रदे घोरे दुःखपङ्के निमज्जताम् |
३२ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धात्मजश्चैव सहदेवो महारथः |
३९ क
सभा पर्व
अध्याय
३९
शिशुपाल उवाच
जरासन्धेन कौरव्य कृष्णेन विकृतं कृतम् ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
१४
कृष्ण उवाच
जरासन्धेन राजानस्ततः क्रूरं प्रपत्स्यते ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
जरासन्धो महेष्वासो नागाय़ुतवलो युधि ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
जरासन्धो हि रुषितो रौहिणेय़प्रधर्षितः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
जराय़ुजानां प्रवरा मानवाः पशवश्च ये ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
जराय़ुजानि भूतानि वित्त तान्यपि सत्तमाः ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
जराय़ुजान्यण्डजानि स्वेदजान्युद्भिदानि च |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
जराय़्वण्डमथोद्भेदं स्वेदं चाप्युपलक्षय़ेत् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३००
याज्ञवल्क्य उवाच
जराय़्वण्डस्वेदजातमुद्भिज्जं च नराधिप ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२१
वैशम्पाय़न उवाच
जरिता दुःखसन्तप्ता विललाप नरेश्वर ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
जरितारिः कथं पुत्रः सारिसृक्वः कथं च मे |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
जरितारिस्ततो वाचं श्रावय़ामास पावकम् ||
१८ ख