chevron_left  जातपक्षाarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय १९४
कर्ण उवाच
जातपक्षा विदेशस्था विवृद्धाः सर्वशोऽद्य ते |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
जातपक्षांश्च सोऽपश्यदुड्डीनान्पुनरागतान् |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय १४६
व्राह्मण्यु उवाच
जातपुत्रा च वृद्धा च प्रिय़कामा च ते सदा |
३२ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
जातपुत्रो दशरथः प्रीतिमानभवन्नृपः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
जातमन्वेति मरणं नृणामिति विनिश्चय़ः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
जातमप्रतिकर्माणं क्षत्रिय़र्षभसत्तमम् ||
७५ ख
वन पर्व
अध्याय २९२
वैशम्पाय़न उवाच
जातमात्रं च तं गर्भं धात्र्या संमन्त्र्य भामिनी |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
जातमात्रं तु तद्रूपं दृष्ट्वा ताम्रनखाङ्गुलि |
११९ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
जातमात्रं पुरा दृष्टं तं पुत्रं शन्तनुस्तदा |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३११
भीष्म उवाच
जातमात्रं मुनेः पुत्रं विधिनोपानय़त्तदा ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११७
नारद उवाच
जातमात्रं सुतं तं च विश्वामित्रो महाद्युतिः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १५०
कुन्त्यु उवाच
जातमात्रः पुरा चैष ममाङ्कात्पतितो गिरौ |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ५४
सूत उवाच
जातमात्रश्च यः सद्य इष्ट्या देहमवीवृधत् |
३ क
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
जातमात्रां च तां दृष्ट्वा वैदर्भः पृथिवीपतिः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
जातमात्रे कुमारे तु वागुवाचाशरीरिणी |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
जातमात्रे सुते तस्मिन्धृतराष्ट्रोऽव्रवीदिदम् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
जातमात्रे सुते तस्मिन्वागुवाचाशरीरिणी ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
जातमात्रेण वीरेण येनोच्चैःश्रवसा इव |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
जातमात्रैव मे देय़ा वराय़ वरवर्णिनी |
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय ६६
शकुन्तलो उवाच
जातमुत्सृज्य तं गर्भं मेनका मालिनीमनु |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
जातमृध्यत धर्मेण सुदीर्घेणाय़ुषान्वितम् |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
जातमेवान्तकोऽन्ताय़ जरा चान्वेति देहिनम् |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
जातरूपं द्रोणमेय़महार्षुः पुञ्जशो नृपाः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
गङ्गो उवाच
जातरूपः स गर्भो वै तेजसा त्वमिवानल |
६८ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
जातरूपपरिच्छन्नां प्रगृह्य महतीं गदाम् |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
जातरूपपरिष्कारं नाद्य शोकमपानुदे ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
जातरूपपरिष्कारमास्थाय़ रथमुत्तमम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
जातरूपपरिष्कारैर्धनुर्भिः सुमहाधनैः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
जातरूपप्रय़ुक्तं च रत्नसञ्चय़भूषितम् ||
५६ ख
सभा पर्व
अध्याय ४७
दुर्योधन उवाच
जातरूपमनर्घ्यं च ददुस्तस्यैकपादकाः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
जातरूपमय़ं युक्तं सर्वरत्नविभूषितम् |
११७ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
जातरूपमय़च्छत्रः सर्वैः स्वैरभिरक्षितः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
जातरूपमय़ाश्चर्ष्टीः शक्त्यश्च कनकोज्ज्वलाः ||
५० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
जातरूपमय़ीभिश्च राजतीभिश्च मूर्धसु |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
जातरूपमय़ीश्चर्ष्टीः पट्टिशान्हेमभूषितान् ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
जातरूपमय़ैः पद्मैर्ग्रथिता रत्नभूषिता ||
१२० ख
वन पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
जातरूपमय़ैः पद्मैश्छन्नां परमगन्धिभिः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
जातरूपमय़ैः पुङ्खै राजतैश्च शिताः शराः |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
जातरूपमय़ैः पुङ्खैः शरांश्च नतपर्वणः |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
जातरूपमय़ैश्चान्यैर्हुताशनसमप्रभैः ||
२४ ख
विराट पर्व
अध्याय ५०
अर्जुन उवाच
जातरूपशिरस्त्राणस्त्रासय़न्निव मे मनः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
जातरूपसमाभासः सर्वे लोहितकध्वजाः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
जातरूपसमुत्पत्तिमनुभूतं च यन्मय़ा ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
जातवेदः पश्यतस्ते वद सत्यां गिरं मम ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय २२०
मन्दपाल उवाच
जातवेदस्तवैवेय़ं विश्वसृष्टिर्महाद्युते |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
जातवेदा यथा राजन्नादग्ध्वैवोपशाम्यति |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
जातवैरश्च पुरुषो दुःखं स्वपिति नित्यदा |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २८
गर्दभ्यु उवाच
जातस्त्वमसि चण्डालो व्राह्मण्यं तेन तेऽनशत् ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४३
कुन्त्यु उवाच
जातस्त्वमसि दुर्धर्ष मय़ा पुत्र पितुर्गृहे ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय ४३
कर्ण उवाच
जातस्नेहश्च युद्धस्य मय़ि सम्प्रहरिष्यति ||
६ ख