द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
जामाता तव तेजस्वी विष्टम्भय़िषुराद्रवत् ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
अर्जुन उवाच
जामाता तव युक्तो वै भर्ता च दुहितुस्तव ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
जामाता दुहिता भ्राता नप्ता ते ते च वान्धवाः ||
७५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
कण्व उवाच
जामातृभावेन वृतः सुमुखस्तव पुत्रजः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
जामीशप्तानि गेहानि निकृत्तानीव कृत्यया |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
जाम्ववानृक्षराजश्च सुग्रीवसचिवाः स्थिताः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
जाम्वूनदमय़ं दिव्यं विमानं हंसलक्षणम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदमय़ः केतुः केसरी नरसत्तम |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदमय़ी वेदिः कमण्डलुविभूषिता |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदमय़ैः पट्टैर्वद्धाश्च विपुला गदाः |
३२ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
जाम्वूनदमय़ैः पुङ्खैश्चित्रचापवरातिगैः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदमय़ैः सर्वैर्वर्मभिः सुविभूषिताः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
२९
सूत उवाच
जाम्वूनदमय़ो भूत्वा मरीचिविकचोज्ज्वलः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदविचित्रं च धूय़मानं महद्धनुः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदविचित्रं च वर्म निर्भिद्य भानुमत् |
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
जाम्वूनदविचित्राणि कवचानि महारथाः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदविचित्रेण कर्णिकारेण केतुना |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदशिरस्त्राणः शूरस्तीव्रपराक्रमः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
जाम्वूनदेन दाम्ना च सर्वतः समलङ्कृतम् ||
१०७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
जाम्वूनदेष्वाभरणेषु चैव; निष्केषु शुद्धेषु शरावरेषु |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
धृतराष्ट्र उवाच
जामय़ः पूजिताः कच्चित्तव गेहे नरर्षभ ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३५
व्यास उवाच
जामय़ोऽप्सरसां लोके वैश्वदेवे तु ज्ञातय़ः ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
जारासन्धिं सान्त्वय़ित्वा करे च विनिवेश्य ह |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
जारासन्धिं हय़श्रेष्ठाः सहदेवमुदावहन् ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
जारासन्धिः सहदेवो जय़त्सेनश्च तावुभौ |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
जारासन्धिमथो जघ्ने मिषतां सर्वधन्विनाम् ||
४३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
जारासन्धिर्भगदत्तो जलसन्धश्च पार्थिवः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
जारासन्धिर्मागधश्च धृष्टकेतुश्च चेदिराट् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
जारूथ्यामाहुतिः क्राथः शिशुपालो जनैः सह |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
जालं च योजय़ामासुर्विशेषेण जनाधिप |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
जालं सुविततं तेषां नवसूत्रकृतं तथा |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
वैशम्पाय़न उवाच
जालपादभुजौ तौ तु पादय़ोश्चक्रलक्षणौ |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
जास्यन्ति सर्ववीजानि उप्यमानानि चैव ह |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
जाहस्यमाने सुप्रीते सुखं तत्र निषीदतुः ||
१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
जाह्नवी पश्यतां भीष्म गृध्रकङ्कवडाशनम् ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
जाह्नवीतीरसम्भूतां मृदं मूर्ध्ना विभर्ति यः |
५४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
जाह्नवीपुलिनोत्थाभिः सिकताभिः समुक्षितः |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
जाह्नवीवालुकाकीर्णे पूर्णं संवत्सरं नरः ||
६३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
जाह्नवीय़मुने नद्यौ प्रावृषीवोल्वणोदके ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
जाय़तां व्रह्मवर्चस्वी राष्ट्रे वै व्राह्मणः शुचिः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०८
सुपर्ण उवाच
जाय़ते जीवलोकस्य हर्तुमर्धमिवाय़ुषः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०६
गुरुरु उवाच
जाय़ते तदहङ्काराद्रागय़ुक्तेन चेतसा ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०८
सुपर्ण उवाच
जाय़ते तरुणः सोमः शुक्लस्यादौ तमिस्रहा ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
जाय़ते नामरूपत्वं स्त्री पुमान्वेति लिङ्गतः ||
११८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
जाय़ते लवकश्चापि मासं तस्मात्तु मानुषः ||
७६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
जाय़ते सुमहाघोरः सङ्ग्रामः क्षत्रिय़ान्प्रति ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
जाय़न्ते क्षत्रिय़ाः शूरास्त्रेताय़ां चक्रवर्तिनः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
जाय़न्ते च म्रिय़न्ते च यस्मिन्नेते यतश्च्युताः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
२२३
द्रोण उवाच
जाय़न्ते पुष्करिण्यश्च समुद्रश्च महोदधिः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
जाय़न्ते मानवास्तत्र निष्टप्तकनकप्रभाः ||
३१ ख