शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम भगवान्स्थानमनुरूपमिवात्मनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
सञ्जय़ उवाच
जगाम भरतश्रेष्ठ यथागतमरिन्दम ||
१०७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
जगाम भवनं त्यक्त्वा गहनं निर्जनं वनम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
जगाम भवनं विष्णुरक्षरं परमं पदम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम भार्गवी वेश्म तथ्यमित्येव जज्ञुषी ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
जगाम भार्यामादाय़ स्तूय़मानो महर्षिभिः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम भित्त्वा मूर्धानं दिवमभ्युत्पपात च ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
जगाम भूमिं ज्वलिता महोल्का; भ्रष्टाम्वराद्गामिव सम्पतन्ती ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११६
नारद उवाच
जगाम भोजनगरं द्रष्टुमौशीनरं नृपम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम भ्रातृनादाय़ सर्वान्मातरमेव च ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६०
गन्धर्व उवाच
जगाम मनसा चिन्तां काममार्गणपीडितः ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
जगाम मनसा चैव वसिष्ठमृषिसत्तमम् |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३१
व्राह्मण उवाच
जगाम महतीं सिद्धिं गाथां चेमां जगाद ह ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
जगाम माधवे मासि रैभ्याश्रमपदं प्रति ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
युधिष्ठिर उवाच
जगाम मोक्षं धर्मज्ञो भोगानुत्सृज्य मानुषान् ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम यज्ञाय़तनं वृतो विप्रैः सहस्रशः ||
४४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम यत्र राजेन्द्र रुषङ्गुस्तनुमत्यजत् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
६५
वृहदश्व उवाच
जगाम यत्र सा वाला व्राह्मणेन सहाभवत् ||
३३ ख
विराट पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम राजपुत्रस्य सकाशममितौजसः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
जगाम राजा दुःखार्तो गङ्गाद्वाराय़ भारत ||
२४ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम राजा धर्मात्मा मध्ये वहु विचिन्तय़न् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२०
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम रेतस्तत्तस्य शरस्तम्वे पपात ह ||
१२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम विमनास्तेषां सर्वेषां पश्यतां वनम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम विस्मय़ं धीमान्कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम वृष्णिप्रवरो रुषङ्गोराश्रमं तदा ||
२१ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम वृष्णय़ो यत्र विनष्टा भरतर्षभ ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
जगाम वेगेन भृशार्दय़ंश्च तं; ततोऽस्य गान्धारपतिः शिरोऽहरत् ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
जगाम व्रह्मसदनं पश्यतस्ते जनाधिप ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
जगाम व्रह्मसदनं व्रह्मणे च न्यवेदय़त् ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम शक्रभवनं पुरन्दरदिदृक्षय़ा ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम शक्रस्तच्छ्रुत्वा यत्र तौ तेपतुस्तपः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
जगाम शङ्करकरं नाराय़णसमाहतम् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
जगाम शरणं तत्र कश्यपं संशितव्रतम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम शरणं देवं सर्वभूतपितामहम् ||
३७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
जगाम शरणं द्रौणिरेकस्तेनावधीद्वहून् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
जगाम शरणं राजा कृताञ्जलिररिन्दम ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
जगाम शरणं शक्तिं प्रसादय़ितुमर्हय़न् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
व्यास उवाच
जगाम शाश्वतीं सिद्धिं परां निर्वाणलक्षणाम् ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
जगाम शासनं कर्तुं देवस्य परमेष्ठिनः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
जगाम शिविरं साय़ं पूज्यमानोऽथ पाण्डवैः ||
३८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम शौरिं दोषेण गान्धारी व्यथितेन्द्रिय़ा ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
जगाम स ततः खिन्नः पुनरेवाश्रमं प्रति ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
जगाम स तथेत्युक्त्वा दमय़न्त्या निवेशनम् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
जगाम स रथेनाजौ भीमं दृष्ट्वा महारथम् |
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४६
भीष्म उवाच
जगाम स वनं राजा दह्यमानो दिवानिशम् ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम संहृष्टमनास्त्रिदिवं त्रिदशेश्वरः ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
जगाम समितिं राज्ञां सैन्धवो विमृशन्वहु |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
जगाम सरितः सर्वास्ताश्चाप्यासन्विशोषिताः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम सर्वतीर्थानि पृथिव्यामिति नः श्रुतम् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम सवलः श्रीमान्दुर्योधनमरिन्दमः ||
२५ ख