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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम सह धर्मेण सर्वैश्च त्रिदशालय़ैः ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ११०
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम सह भार्याभ्यां ततो नागसभं गिरिम् ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम सह संसर्गमृषिणाद्भुतकर्मणा ||
६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम सहसा रामं महेन्द्रं पर्वतं प्रति ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
जगाम सुवहून्देशानन्धस्तेनोडुपेन ह ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
जगाम सौभद्रमतीत्य भीष्मो; महारथं पार्थमदीनसत्त्वः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
जगाम स्यन्दनं तूर्णं पाण्डवस्य यशस्विनः ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
जगाम स्रोतसैकेन गम्भीरसलिलाशय़म् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम स्वपुरं हृष्टो अनुज्ञातो महात्मना ||
३५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम हास्तिनपुरं कृपः शारद्वतस्तदा |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम हास्तिनपुरं त्वरितः केशवो विभुः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
जगाम हिमवत्पार्श्वं तपस्तप्तुं नरेश्वरः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
जगाम हैहय़ानां वै सकाशं प्रथितात्मनाम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
जगामाथ दुराधर्षो गङ्गां भागीरथीं प्रति ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
जगामाथ परां चिन्तां भीष्मस्य वधकाङ्क्षय़ा ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
जगामादर्शनं भानुर्लोकस्येवास्तमेय़िवान् ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
जगामादर्शनं राजन्विप्रास्ते च यय़ुर्गृहान् ||
९० ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
जगामानुमते मातुः पुरीं वाराणसीं प्रति ||
४ ख
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
जगामामन्त्र्य तान्वीरानुद्धवोऽर्थविशारदः ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
जगामावासमेवाथ तदा सा द्रुपदात्मजा ||
१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १८०
भीष्म उवाच
जगामास्तं सहस्रांशुस्ततो युद्धमुपारमत् ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
जगामास्तमिवादित्यः कृत्वा कर्म सुदुष्करम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
जगामास्तमिवादित्यः कृत्वा कर्म सुदुष्करम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
जगामास्तमिवादित्यः कौरव्यो यमसादनम् ||
५८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
गङ्गो उवाच
जगामेष्टं ततो देशं तदा भार्गवनन्दन ||
७३ ख
वन पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
जगामैकरथेनैव काम्यकं वनमृद्धिमत् ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
जगामैव महाप्राज्ञा वनाय़ कृतनिश्चय़ा ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ५९
वृहदश्व उवाच
जगामैव वने शून्ये भार्यामुत्सृज्य दुःखितः ||
२५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
जगामैवाश्रुपूर्णाक्षी भीमस्तामिदमव्रवीत् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
जगुश्च गाथा विविधा गन्धर्वाः सुरचोदिताः |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
जगुश्च तत्र गन्धर्वा ननृतुश्चाप्सरोगणाः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
जगुश्च देवगन्धर्वा ननृतुश्चाप्सरोगणाः ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
जगृहुः कुशचीराणि चित्राणि कवचानि च ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
जगृहुः सर्वमिष्वस्त्रमर्जुनाद्दिव्यमानुषम् ||
८१ ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
जगृहुः सर्वशस्त्राणि स्वानि स्वानि सुरास्तदा ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
जगृहुर्विभिदुश्चैव चित्राण्याभरणानि च ||
५६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
जगृहुस्ते तदा राजन्सर्व एव दिवौकसः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
जगृहे च धनुर्धाता मुसलं च जय़स्तथा ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय २७९
मार्कण्डेय़ उवाच
जगृहे वल्कलान्येव वस्त्रं काषाय़मेव च ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
जगौ च परमं व्रह्म यत्पुरा लोककृज्जगौ ||
६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
जगौ यद्भगवान्व्यासः पुत्राय़ परिपृच्छते ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
वैशम्पाय़न उवाच
जगौ यद्भगवान्व्यासो राज्ञो धर्मसुतस्य वै ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
जग्ध्वा मांसानि पीत्वा च मेदांसि रुधिराणि च |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
जग्मतुः पार्थगोविन्दौ सुहृज्जनवृतौ ततः ||
१७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
जग्मतुः प्रीतिजननौ संनद्धकवचध्वजौ ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
जग्मतुः सहितौ वीरावर्जुनस्य निवेशनम् ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
जग्मतुः सूर्यदत्तश्च मदिराश्वश्च पृष्ठतः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १८
सूत उवाच
जग्मतुः स्वगृहानेव श्वो द्रक्ष्याव इति स्म ह ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
जग्मतुर्दण्डकारण्यं दक्षिणेन परन्तपौ ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
जग्मतुर्यत्र गाङ्गेय़ः शरतल्पगतः प्रभुः ||
५ ख