शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
ज्ञानं महद्यद्धि महत्सु राज; न्वेदेषु साङ्ख्येषु तथैव योगे |
१०३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९४
भीष्म उवाच
ज्ञानं यतः प्रार्थय़ते नरो वै; ततस्तदर्था भवति प्रवृत्तिः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
ज्ञानं लव्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
ज्ञानं लोकोत्तरं यच्च सर्वत्यागश्च कर्मणाम् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
ज्ञानं विज्ञानमारोग्यं रूपं सम्पत्तथैव च |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं व्रह्मकर्म स्वभावजम् ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
ज्ञानं विशिष्टं न तथा हि यज्ञा; ज्ञानेन दुर्गं तरते न यज्ञैः ||
१०५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
सनत्सुजात उवाच
ज्ञानं वै नाम प्रत्यक्षं परोक्षं जाय़ते तपः ||
२८ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
ऋषय़ ऊचुः
ज्ञानं संन्यासमित्येके स्वभावं भूतचिन्तकाः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
ज्ञानचेष्टेन्द्रिय़गुणाः सर्वे संशव्दिता मय़ा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
ज्ञानज्ञेय़ान्तरे तस्मिन्मनो नामापरो गुणः |
१०२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
ज्ञानज्ञेय़ेन साङ्ख्येन व्यापिना महता नृप ||
५९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
ज्ञानतत्त्वपरो नित्यं शुभाशुभनिदर्शकः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०८
गुरुरु उवाच
ज्ञानदग्धपरिक्लेशः प्रय़ोगरतिरात्मवान् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०४
गुरुरु उवाच
ज्ञानदग्धैस्तथा क्लेशैर्नात्मा सम्वध्यते पुनः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
ज्ञानदीपेन दीप्तेन पश्यत्यात्मानमात्मना |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
ज्ञाननिष्ठां वदन्त्येके मोक्षशास्त्रविदो जनाः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
ज्ञाननिष्ठास्त्रिशुक्लाश्च सर्वभूतहिते रताः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
ज्ञानपूर्वं कृतं कर्म च्छादय़न्ते ह्यसाधवः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ज्ञानपूर्वं कृतं पापं छादय़न्त्यवहुश्रुताः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ज्ञानपूर्वं विनश्यन्ति गूहमाना महाजने ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
ज्ञानपूर्वं विनश्यन्ति गूहमाना महाजने ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
ज्ञानपूर्वमथो लोभात्तस्याधर्मो गवानृतम् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
ज्ञानपूर्वोद्भवा लिप्सा लिप्सापूर्वाभिसन्धिता |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
ज्ञानमव्यक्तमित्युक्तं ज्ञेय़ं वै पञ्चविंशकम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
ज्ञानमव्यक्तमित्युक्तं ज्ञेय़ो वै पञ्चविंशकः ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
ज्ञानमव्यपदेश्यं हि यथा नास्ति तथैव तत् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
ज्ञानमस्ति विशेषेण ततो हृष्टश्च सोऽभवत् ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
ज्ञानमस्य हि धर्मज्ञाः प्राप्तं वुद्धिमतामिह ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
ज्ञानमागमय़त्प्रीत्या पुनः स परमद्युतिः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६६
भीष्म उवाच
ज्ञानमात्मा महान्यच्छेत्तं यच्छेच्छान्तिरात्मनः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जय़त्युत ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९७
मनुरु उवाच
ज्ञानमिन्द्रिय़संय़ुक्तं तद्वत्प्रेत्य भवाभवौ ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९७
मनुरु उवाच
ज्ञानमुत्पद्यते पुंसां क्षय़ात्पापस्य कर्मणः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्याध उवाच
ज्ञानमूलात्मकं क्लेशमतिवृत्तस्य मोहजम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
ज्ञानमूष्मा च वाय़ुश्च त्रिविधः कर्मसङ्ग्रहः ||
८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
ज्ञानमेकस्थमाचार्ये ज्ञानं योगश्च पाण्डवे |
४० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४०
व्रह्मो उवाच
ज्ञानवन्तश्च ये केचिदलुव्धा जितमन्यवः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
ज्ञानवानपि मेधावी जडवल्लोकमाचरेत् ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३०
व्यास उवाच
ज्ञानवानेव कर्माणि कुर्वन्सर्वत्र सिध्यति ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
भीष्म उवाच
ज्ञानवान्निय़ताहारो ददर्श कपिलस्तदा ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२८
श्रीभगवानु उवाच
ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रिय़ः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
ज्ञानविज्ञाननिष्ठानां निरुपाख्या निरञ्जना |
६४ क
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
ज्ञानविज्ञानवन्तश्च तत्र किं प्रतिभाति ते ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नः प्रकृतिज्ञः परात्मनोः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
महेश्वर उवाच
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नः संस्कृतो वेदपारगः |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नाः कारणैर्भाविताः शुभैः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
उमो उवाच
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नाः प्रज्ञावन्तोऽर्थकोविदाः |
४३ ख