आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
जग्राह पाणिं धर्मात्मा विधिमन्त्रपुरस्कृतम् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
जग्राह पाणिं विधिना तस्य व्रह्मर्षिसत्तमः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राह पादौ धौम्यस्य भ्रातॄंश्चास्वजताच्युतः ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
जग्राह पीनोत्तमलम्ववाहुं; वाह्वोर्हरिं व्याय़तपीनवाहुः ||
९६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९६
इन्द्र उवाच
जग्राह पुष्करं धीमान्प्रसन्नश्चाभवन्मुनिः ||
५० ख
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
जग्राह मनुजव्याघ्र मांसशोणितभोजना ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राह रश्मीन्कौन्तेय़ो भीमो भीमपराक्रमः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राह वलमास्थाय़ ज्यया च युय़ुजे धनुः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राह विधिवत्पाणावुवास च तय़ा सह ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६३
गन्धर्व उवाच
जग्राह विधिवत्पाणिं तपत्याः स नरर्षभः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
जग्राह विधिवत्सोममश्विभ्यामुत्तमं ग्रहम् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
जग्राह विपुलं शूलं गिरीणामपि दारणम् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
जग्राह वेदानखिलान्रसातलगतान्हरिः |
५३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
जग्राह वै भृगुं पूर्वमपत्यं सूर्यवर्चसम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राह व्राह्मणः पाणौ गच्छाव इति चाव्रवीत् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
जग्राह शिरसा पादौ यज्ञे विष्णोर्महात्मनः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
जग्राहाङ्गिरसं देवः शिखी तस्माद्धुताशनः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राहाजगरो ग्राहो भुजय़ोरुभय़ोर्वलात् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
जग्राहाजगरो ग्राहो महाकाय़ः क्षुधान्वितः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
जग्राहाथ मुनिश्रेष्ठः कृपाविष्टः पुपोष च |
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राहाश्रूणि सुश्रोणी करेण पृथुलोचना |
१२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
जग्राहोपेत्य सहसा चक्रं सव्येन पाणिना |
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
जघनं पालय़ामास पाण्डुसैन्यस्य भारत ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
जघनं पालय़ामास विराटः सह केकय़ैः |
५४ क
वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
जघनं पालय़ामास सौमित्रिरकुतोभय़ः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
जघनं पालय़ामासुस्तव सैन्यस्य भारत ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
जघनार्धे विराटश्च यज्ञसेनश्च सोमकिः |
६० क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
जघने युध्यमानं हि कौन्तेय़ो मां धनञ्जय़ः |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
जघने सर्वसैन्यानां ममाश्वान्प्रतिपादय़ ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
जघन्य एष विजय़ो यद्युद्धं नाम भारत |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
जघन्य एष विजय़ो यो युद्धेन विशां पते |
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
जघन्यकालमप्येतद्भवेद्यत्सर्वपार्थिवान् |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
जघन्यगुणवृत्तस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३९
व्रह्मो उवाच
जघन्यगुणसंय़ुक्ता यान्त्यधस्तामसा जनाः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
जघन्यजः स सर्वेषामादित्यानां गुणाधिकः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
जघन्यजस्तक्षकस्य श्रुतसेनेति यः श्रुतः |
१४६ क
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
जघन्यतो वय़ं तत्र यास्यामो दिवसान्तरम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९५
वामदेव उवाच
जघन्यमाहुर्विजय़ं यो युद्धेन नराधिप ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
जघन्यरात्रे निद्रान्धः सावशेषे तमस्यपि |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३४
भीष्म उवाच
जघन्यशाय़ी पूर्वं स्यादुत्थाय़ी गुरुवेश्मनि |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
जघन्याश्च जघन्येषु भृत्याः कर्मसु योजिताः ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
जघान कशय़ा मोहात्तदा राक्षसवन्मुनिम् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
जघान काश्यपं चैव न्यवर्तय़त पापकृत् ||
१८९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
जघान कुञ्जरानीकं पुनः सप्तशतं युधि ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
जघान गदय़ा भीमः सैन्धवध्वजिनीमुखे ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
जघान गदय़ा भीमस्तस्य राज्ञः परिच्छदम् |
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
जघान गदय़ा राजन्नश्वत्थामानमित्युत ||
७१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
जघान गुह्यकान्क्रुद्धो मन्दारार्थे महावलः |
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
जघान गौतमो राजन्यथा दस्युगणस्तथा ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
जघान च महेष्वासः प्रधानांस्तत्र राक्षसान् |
१९ क