कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
जघान वहुसाहस्रान्योधान्युद्धविशारदः ||
४९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
जघान वाहान्समरे समस्ता; नारट्टजान्सिन्धुराजस्य सङ्ख्ये ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
जघान विपुलाग्रेण नाराचेन परन्तपः ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
जघान षड्भिः षडृतूत्तमत्विषः; स पाण्ड्यराजानुचरान्महारथान् ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
जघान षड्भिरासाद्य सारथिं चाभ्यपातय़त् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
जघान स पृषध्रं च चन्द्रदेवं च मानिनम् |
१२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
जघान समरे योधानसङ्ख्येय़पराक्रमः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
जघान समरे राजन्सहदेवश्च पञ्चभिः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
जघान समरे वीरः कार्त्तिकेय़ो महावलः ||
७० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
जघान समरे शूरः शरैः संनतपर्वभिः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
जघान समरे शूरः शरैः संनतपर्वभिः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
जघान समरे शूरान्राज्ञस्तान्भीष्मरक्षिणः ||
७५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
जघान समरे शूरो धार्तराष्ट्रानचिन्तय़न् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
जघान सुरथं नाम द्रुपदस्य सुतं विभुः |
१२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
जघान सुवहूंस्तेषां संरव्धः कुरुसत्तमः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
जघान सूतं शल्यस्य रथाच्चैनमपातय़त् ||
७६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
जघान सूतमश्वांश्च ध्वजं च कृतवर्मणः ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
जघान सोमकान्सर्वान्भीमसेनस्य पश्यतः |
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
जघान हय़राजं यो यमुनावनवासिनम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
जघानाज्ञानतः पार्थ होमधेनुं यदृच्छय़ा ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
जघानाञ्जनपर्वाणं महेश्वर इवान्धकम् ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
जघानातिरथः सङ्ख्ये वाणगोचरमागतान् ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
जघानात्र पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं तथा |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
जघानात्र पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं तथा |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
जघानात्र पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं तथा |
५७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
जघानानुचरैः सार्धं विविधाय़ुधपाणिभिः ||
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
जघानामोघय़ा शक्त्या दानवं तारकं गुहः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
जघानार्धेषु चाश्वानां तत्सैन्यान्यभ्यपूजय़न् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
जघानाश्वान्सपदातांस्तथोभौ पार्ष्णिसारथी ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
जघानास्त्रं महाराज घटोत्कचसमीरितम् ||
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
जघानास्त्रवलेनाशु प्रहसन्नर्जुनस्तदा ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
जघानास्त्रैर्महावाहुः कुम्भय़ोनेरवित्रसन् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
जघानास्य पदा सूतमसिनापातय़द्ध्वजम् |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
जघानेकरथेनैव देवराजप्रचोदितः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७२
मार्कण्डेय़ उवाच
जघानेन्द्रजितः पार्थ रथं साश्वं ससारथिम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
जघानैकेषुणा वीरः सौभद्रः परवीरहा ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
जघानोरसि सङ्क्रुद्धः कालज्वलनसंनिभैः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
जघानोरसि सङ्क्रुद्धो विषाग्निप्रतिमैर्दृढैः ||
९१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
जघ्नतुः पृष्ठतो राजन्किरन्तौ साय़कान्वहून् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
जघ्नतुर्विशिखैस्तीक्ष्णैः परानीकविशातनैः ||
१९ ग
वन पर्व
अध्याय
११७
अकृतव्रण उवाच
जघ्निवान्कार्तवीर्यस्य सुतानेकोऽन्तकोपमः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
जघ्निवान्सह सूर्येण सर्वेषां ज्योतिषां प्रभाः ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
जघ्नुः परस्परं तत्र क्षत्रिय़ाः कालचोदिताः ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
जघ्नुः परान्स्वकांश्चैव प्राप्तान्प्राप्ताननन्तरान् ||
७३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
जघ्नुः शूरा रणे राजंस्तस्मिंस्तमसि दारुणे ||
२० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
जघ्नुः स्वानेव तत्राथ कालेनाभिप्रचोदिताः ||
९४ ख
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
जघ्नुरन्योन्यमाक्रन्दे मुसलैः कालचोदिताः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
जघ्नुर्दैत्यांस्तदा देवास्त्रिदिवं चैव लेभिरे ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
जघ्नुर्वृहस्पतेर्द्वेषाद्विद्यारक्षार्थमेव च |
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०४
चण्डाल उवाच
जघ्नुस्ताः पय़सा पुत्रांस्तथा पौत्रान्विधुन्वतीः |
८ क