सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
न्यपातय़न्त च परान्पातय़ित्वा तथापिषन् ||
९३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
न्यपातय़न्त संहृष्टाः परस्परकृतागसः ||
१३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
न्यपातय़न्नरान्क्रुद्धः पशून्पशुपतिर्यथा ||
१२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
न्यमज्जंस्ते महाराज तस्य काय़े महात्मनः |
४२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
न्यमज्जन्त महाराज कङ्कवर्हिणवाससः ||
४९ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
न्यमज्जन्त सरस्वत्यां कालेन जनमेजय़ |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
न्यमज्जय़दतः पित्रा निर्भर्त्स्य स विवासितः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६६
शकुन्तलो उवाच
न्यमन्त्रय़त चाप्येनां सा चाप्यैच्छदनिन्दिता |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
न्यमन्त्रय़त धर्मेण क्रिय़तां किमिति व्रुवन् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
न्यमन्त्रय़त वन्येन फलमूलादिना तदा ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
न्यमन्त्रय़त संहृष्टः स द्विजश्च वरैस्त्रिभिः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
न्यमन्त्रय़द्भोजनेन नाभ्यनन्दच्च केशवः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
न्यमन्त्रय़ेतां राजानं किं कार्यं क्रिय़तामिति ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
न्यमीलय़न्त नेत्राणि राजानस्त्रस्तचेतसः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
न्ययच्छत्तुरगान्हृष्टो यत्र यत्रैच्छदग्रणीः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१७२
गन्धर्व उवाच
न्ययच्छदात्मनः कोपं सर्वलोकपराभवात् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
न्यवधीत्तावकं सैन्यं शतशोऽथ सहस्रशः |
१२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवधीद्वलिनां श्रेष्ठो जहसुर्व्राह्मणास्ततः ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तत ततो धीमान्सहदेवः प्रतापवान् ||
५३ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तत ततो राजन्नेदमस्तीति चाव्रवीत् ||
६४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तत ततो वाजी येन नागाह्वय़ं पुरम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तत न चैव स्म क्रोधसंरक्तलोचना ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तत नरश्रेष्ठो नकुलश्चित्रमार्गवित् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तन्त ततः पश्चादनुज्ञाता नृपेण ह ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तन्त ततः सर्वे गन्धर्वा जितकाशिनः |
७ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तन्त ततः सर्वे नरा नगरवासिनः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
न्यवर्तन्त तदा सर्वे शवार्थं ते स्म मानुषाः ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
न्यवर्तन्त महाराज कृत्वा शपथमाहवे ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवर्तन्त महाराज शरवर्षार्दिता भृशम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
न्यवर्तन्त यथा शूरा मृत्युं कृत्वा निवर्तनम् ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
न्यवर्तय़त तत्सैन्यं द्रवमाणं समन्ततः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
न्यवसत्परमप्रीतो व्रह्मा च त्रिदशैर्वृतः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवसन्कृष्णय़ा सार्धं काम्यके पुरुषर्षभाः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवसन्त महाभागा द्रौपद्या सह पाण्डवाः ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
न्यवसन्नथ तां रात्रिं पाण्डवा हतशत्रवः ||
३७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवसन्नृपतिः पञ्च ततोऽगच्छद्वनं प्रति ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२९५
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवसन्पाण्डवास्तत्र कृष्णय़ा सह भारत ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
न्यवसन्पाण्डवास्तत्र पूजिता अकुतोभय़ाः ||
७९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़च्छरैर्द्रोणो वहुभिर्वहुरूपिभिः ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवारय़च्छितैर्वाणैरर्जुनो जय़तां वरः ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
न्यवारय़त तं देवी क्रुद्धं पशुपतिं पतिम् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़त तेजस्वी नकुलश्चित्रमार्गवित् ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़त यत्तूर्णं शल्यं समितिशोभनम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़त सैन्यं च पाण्डवानां महारथः ||
६४ ख
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवारय़त्तौ प्रहसन्कुन्तीपुत्रो वृकोदरः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़दमेय़ात्मा द्रोणपुत्रवधेप्सय़ा ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९३
मार्कण्डेय़ उवाच
न्यवारय़दमेय़ात्मा समासाद्य नरोत्तमम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़न्त संहृष्टास्तावकाः पुरुषर्षभाः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़न्त सङ्क्रुद्धाः पाण्डुसैन्ये वृहत्तमाः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़न्त सहिताः क्रिय़ा व्याधिमिवोत्थितम् ||
४३ ख