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द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण गजानां च शतैस्त्रिभिः |
४९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण द्विरदानां त्रिभिः शतैः |
९३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण द्विरदानां शतेन च |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण द्विरदानां शतैस्त्रिभिः |
१११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण पुत्रो दुर्योधनस्तव |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण महारथशतेन च |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथसहस्रेण हय़ानामय़ुतेन च |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेषु विद्रवत्सु ततस्ततः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
ततो रथस्थः परवीरहन्ता; भीष्मद्रोणावात्तवीर्यौ निरीक्ष्य |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
ततो रथस्य निनदः प्रादुरासीन्महारणे |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
ततो रथाग्रादपतत्प्रभग्नः; परश्वधैः शाल इवाभिकृत्तः ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
ततो रथाच्छकुनिं पातय़ित्वा; मुदान्विता भारत पाण्डवेय़ाः |
६२ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
ततो रथादवप्लुत्य राजानं वाहुकोऽव्रवीत् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
ततो रथादवप्लुत्य वेगमास्थाय़ पाण्डवः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथादवप्लुत्य सूतपुत्रोऽसिचर्मभृत् |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
ततो रथादवप्लुत्य सौवलो भरतर्षभ |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथादवारोहद्भ्रातृभिः सह धर्मराट् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
ततो रथानीकमुखादुपेत्य; सर्वास्त्रवित्काञ्चनचित्रवर्मा |
२३ क
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथाभ्यां प्रस्कन्द्य भ्रातरौ क्षत्रिय़र्षभौ |
५ क
विराट पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथाभ्यां रथिनौ व्यतिय़ाय़ समन्ततः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथाश्च वहुला नागाश्च समलङ्कृताः |
४२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथेन शुभ्रेण महता किङ्किणीकिना |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथेन शुभ्रेण महता किङ्किणीकिना |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
ततो रथेनाम्वुदवृन्दनादिना; शरन्नभोमध्यगभास्करत्विषा |
५३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
ततो रथेभ्यः प्रस्कन्द्य परिवव्रुस्तवात्मजम् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
ततो रथेषु भग्नेषु त्रिसाहस्रा महाद्विपाः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रथैः काञ्चनदन्तकूवरै; र्महीधराभैः समदैश्च दन्तिभिः |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
ततो रविं संहृतरश्मिजालं; दृष्ट्वा भृशं शस्त्रपरिक्षताङ्गाः |
१२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८३
भीष्म उवाच
ततो रविर्मन्दमरीचिमण्डलो; जगामास्तं पांसुपुञ्जावगाढः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
ततो रश्मीन्रथाश्वानां क्षुरप्रैश्चिच्छिदे जय़ः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
ततो रहः स विप्रर्षिः सा चैवोपविवेश ह |
५६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६५
भीष्म उवाच
ततो रागः प्रभवति द्वेषश्च तदनन्तरम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय २०१
व्याध उवाच
ततो रागः प्रभवति द्वेषश्च तदनन्तरम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
ततो राजंस्तव सुता भीमसेनमुपाद्रवन् |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजकुलद्वारि प्रसुप्तमिव तं नृपम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
ततो राजकुले नान्दी सञ्जज्ञे भूय़सी पुनः |
६५ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
ततो राजगृहं गच्छेत्तीर्थसेवी नराधिप |
८९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ततो राजञ्शिलाधौताञ्शराञ्शाखामृगध्वजः |
८१ क
वन पर्व
अध्याय ११३
लोमश उवाच
ततो राजन्काश्यपस्यैकपुत्रं; प्रवेश्य योगेन विमुच्य नावम् |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्नागरथाश्वय़ूनां; भीमाहतानां तव राजमध्ये |
५ क
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजन्नाशुकारी कुन्तीपुत्रो वृकोदरः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
ततो राजन्पार्थिवाः सर्व एव; वैश्या इवास्मानुपतिष्ठन्तु सद्यः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्प्रतिभय़ान्सिंहनादान्मुहुर्मुहुः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्प्रादुरासीन्महाघोरो महारणः ||
६ ख
मौसल पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजन्भगवानुग्रतेजा; नाराय़णः प्रभवश्चाव्ययश्च |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्महानासीत्सङ्ग्रामो भूरिवर्धनः |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्महावाहुर्भीमसेनः प्रतापवान् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
दुर्योधन उवाच
ततो राजन्महाय़ज्ञैर्विविधैर्भूरिदक्षिणैः |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्महेष्वासः कृतवर्मा महारथः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजन्व्राह्मणास्ते सर्व एव विशां पते |
३१ क