कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
सञ्जय़ उवाच
ततो राजन्हृषीकेशः सङ्ग्रामशिरसि स्थितम् |
२० क
मौसल पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजभय़ात्सर्वे निय़मं चक्रिरे तदा |
२० क
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
ततो राजर्षय़ः सर्वे विषण्णा गतचेतसः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
ततो राजसहस्राणि परिवव्रुर्धनञ्जय़म् |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
४५
सूत उवाच
ततो राजा क्षुच्छ्रमार्तस्तं मुनिं स्थाणुवत्स्थितम् |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
ततो राजा जातरूपस्य राशी; न्पदे पदे कारय़ामास हृष्टः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
ततो राजा तय़ोः पादावभिवाद्य महात्मनोः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
ततो राजा दशार्णानां प्राग्ज्योतिषमुपाद्रवत् |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
ततो राजा द्रुपदो राजसिंहः; सर्वान्राज्ञः कुलतः संनिशाम्य |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा धृतराष्ट्रो मनीषी; सम्पूज्य वाक्यं विदुरेरितं तत् |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा पाण्डवो हृष्टरूपः; श्रुत्वा वाक्यं सत्यवत्याः सुतस्य |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा पाण्डुसुतो नारदं प्रत्यभाषत |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा प्राञ्जलिर्वेपमानो; युधिष्ठिरः सस्वनं वाष्पकण्ठः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
५१
सूत उवाच
ततो राजा मन्त्रविदोऽव्रवीत्पुनः; क्रुद्धो वाक्यं तक्षकस्यान्तमिच्छन् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा महातेजा धर्मराजो युधिष्ठिरः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
ततो राजा महावीर्यो नहुषः पृथिवीपतिः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
ततो राजा मुचुकुन्दः सोऽन्वशासद्वसुन्धराम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा यज्ञसेनः सपुत्रो; जन्यार्थ युक्तं वहु तत्तदग्र्यम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
ततो राजा विममृशे कथं कार्यमिदं भवेत् |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा समुत्थाय़ धृतराष्ट्रपुरोगमः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
ततो राजा ससचिवः फलान्यादातुमैच्छत |
२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
ततो राजा सहामात्यः कृष्णश्च यदुनन्दनः |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजा सुशर्माणं विव्याध दशभिः शरैः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजानमामन्त्र्य विदुरानुगतो वहिः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
ततो राजानमावृत्तं सौभद्रं प्रति संय़ुगे |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजानमासाद्य धृतराष्ट्रं यशस्विनम् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
ततो राजानमासाद्य प्रहरन्तमभीतवत् |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
ततो राजाव्रवीद्वाक्यं सदस्यैश्चोदितो भृशम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजेति नामास्य अनुरागादजाय़त ||
१३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
युय़ुत्सुरु उवाच
ततो राज्ञः कलत्राणि भ्रातॄणां चास्य सर्वशः |
८८ क
विराट पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राज्ञः सुतो ज्येष्ठः प्राविशत्पृथिवीञ्जय़ः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२८२
मार्कण्डेय़ उवाच
ततो राज्ञा सहासीनाः सर्वे ते वनवासिनः |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राज्ञां चरैराप्तैश्चारः समुपनीय़त |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
ततो राज्ञां भविता युद्धमेत; त्तत्र जातं वर्म शस्त्रं धनुश्च |
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ततो राज्ञां वहुशतैर्गजाश्वरथय़ाय़िभिः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
ततो राज्ञां सहस्राणि मग्नानि निरय़े तदा |
४३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
ततो राज्ञाभ्यनुज्ञाताः पाण्डवानां महारथाः |
४६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राज्ञाभ्यनुज्ञातो धृतराष्ट्रः प्रतापवान् |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राज्ञाभ्यनुज्ञातो भीमसेनो महावलः |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
ततो राज्ञो धृतराष्ट्रस्य गेहे; गोमाय़ुरुच्चैर्व्याहरदग्निहोत्रे |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
ततो राज्यं प्रदास्यामि शक्राय़ामिततेजसे |
७६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
ततो रात्रिः समभवत्सर्वभूतप्रमोहिनी ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रात्रौ प्राप्नुवतो जलं व्रह्मविदो जनाः |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रात्र्यां व्यतीताय़ां कृतपूर्वाह्णिकक्रिय़ाः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
ततो रात्र्यां व्यतीताय़ां प्रतिवुद्धोऽस्मि भारत |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
ततो रात्र्यां व्यतीताय़ां प्रातरुत्थाय़ स द्विजः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रात्र्यां व्यतीताय़ामन्नमादाय़ पाण्डवः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
भीष्म उवाच
ततो रामः प्रादुरासीत्प्रज्वलन्निव तेजसा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
ततो रामस्य तत्कर्म श्रुत्वा राजा युधिष्ठिरः |
१ क