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उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
तपो वलं तापसानां व्रह्म व्रह्मविदां वलम् |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
तपो वाप्यथवा यज्ञो यच्चान्यत्पावनं महत् |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
तपो विद्यास्तथौषध्यो नानारूपाम्वरत्विषः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय ३२
सूत उवाच
तपो विपुलमातस्थे वाय़ुभक्षो यतव्रतः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३२
नरनाराय़णावू ऊचतुः
तपो हि तप्यतस्तस्य यत्स्थानं परमात्मनः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
तपो हि नान्यच्चानशनान्मतं मे; नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
तपो हि वुद्धिय़ुक्तानां शाश्वतं व्रह्मदर्शनम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २०९
गुरुरु उवाच
तपो ह्यधिष्ठितं देवैस्तपोघ्नमसुरैस्तमः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३७
द्रोण उवाच
तपोघोरव्रता देवी न त्वं जेष्यसि पाण्डवम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
तपोदग्धशरीरस्य कोपो दहति भारतान् ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय १७४
वैशम्पाय़न उवाच
तपोदमाचारसमाधिय़ुक्ता; स्तृणोदपात्राहरणाश्मकुट्टाः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४३
अतिथिरु उवाच
तपोदमाभ्यां संय़ुक्तो वृत्तेनानवरेण च ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १४८
हनूमानु उवाच
तपोदानप्रवृत्ता च राजसी भवति प्रजा ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३२
नारद उवाच
तपोधनान्वेदविदो नित्यं वेदपराय़णान् |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८१
भीष्म उवाच
तपोधनास्ते सहसा काश्या च भृगुनन्दनम् ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २३५
वैशम्पाय़न उवाच
तपोधनैश्च तैः सर्वैर्वृतः शक्र इवामरैः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय २०२
नारद उवाच
तपोधनैश्च ये शापाः क्रुद्धैरुक्ता महात्मभिः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
तपोधर्मदमेज्याभिर्विप्रा यान्ति यथा दिवम् |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
तपोधर्मेण संय़ुक्तस्तपोनित्यः सुसंशितः |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
तपोनित्यं धर्मविदां वरिष्ठं; संवर्तं तं ज्ञापय़ामास कार्यम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
तपोनित्यं महात्मानमपश्यद्वृषभध्वजम् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
तपोनित्यस्य वृद्धस्य रोषणस्य विशेषतः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
तपोनित्याः सुतपसो दुर्गाण्यतितरन्ति ते ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
तपोनित्याश्च राधेय़ समर्थाश्च महारथाः ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
तपोनित्याय़ पिङ्गाय़ व्रतिने कृत्तिवाससे ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय २०३
व्याध उवाच
तपोनित्येन दान्तेन मुनिना संय़तात्मना |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
तपोनित्येन दान्तेन मुनिना संय़तात्मना |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८२
भृगुरु उवाच
तपोनित्येन दान्तेन मुनिना संय़तात्मना |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
जनमेजय़ उवाच
तपोनिधे त्वय़ोक्तं हि नाराय़णकथाश्रय़म् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
तपोनिष्ठाश्च वोद्धव्याः कर्मनिष्ठाश्च भारत ||
४३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
तपोनिय़मसंय़ुक्ता मुनय़ः संशितव्रताः |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
उमो उवाच
तपोन्वेषकरो लोके भ्रमते विविधाकृतिः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ९२
लोमश उवाच
तपोभिः क्रतुभिर्दानैराशीर्वादैश्च पाण्डव |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
तपोभिः क्रतुभिश्चैव दानेन च युधिष्ठिर |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
तपोभिर्यज्ञदानैश्च वाक्यैः प्रज्ञाश्रितैस्तथा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
तपोभिर्विद्यया चैव ज्योतींषीव महत्तमः ||
६३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७५
भीष्म उवाच
तपोमन्त्रवलं नित्यं व्राह्मणेषु प्रतिष्ठितम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
तपोमूलमिदं सर्वं यन्मां पृच्छसि पाण्डव |
७ क
वन पर्व
अध्याय २०२
व्याध उवाच
तपोमूलमिदं सर्वं यन्मां विप्रानुपृच्छसि ||
१६ ग
स्त्री पर्व
अध्याय २६
वासुदेव उवाच
तपोर्थीय़ं व्राह्मणी धत्त गर्भं; गौर्वोढारं धावितारं तुरङ्गी |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
भीष्म उवाच
तपोवनगतं विप्रमभिगम्य महामुनिम् |
४ क
सभा पर्व
अध्याय १७
कृष्ण उवाच
तपोवनस्थे पितरि मातृभ्यां सह भारत |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
तपोवनानि यज्ञांश्च हृष्टोऽभ्येमि पुनः पुनः ||
८६ ख
वन पर्व
अध्याय २७७
मार्कण्डेय़ उवाच
तपोवनानि रम्याणि राजर्षीणां जगामह ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
तपोवनेषु ये जातास्तत्रैव निधनं गताः |
८२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
तपोवलव्ययं कृत्वा सुमहच्चिरसम्भृतम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११९
व्यास उवाच
तपोवलाद्धि वलवद्वलमन्यन्न विद्यते ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
तपोवलेनैव नृपो महेन्द्रसदनं गतः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
तपोविघातार्थमथो देवा विघ्नानि चक्रिरे ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
तपोविघ्नकरी चैव पञ्चचूडा सुसंमता |
११ क