अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
तस्य वृत्तिं प्रवक्ष्यामि शृणु मे देवि तत्त्वतः ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
तस्य वृत्रगृहीतस्य मोहः समभवन्महान् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
भीष्म उवाच
तस्य वृत्रार्दितस्याथ मोह आसीच्छतक्रतोः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
धृतराष्ट्र उवाच
तस्य वृष्णिप्रवीरस्य व्रूहि युद्धं यथातथम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तस्य वेगमसंसह्यं दृष्ट्वा कर्णस्य पाण्डवः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य वेगमसह्यं तमसहन्ती वसुन्धरा |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
तस्य वेगमसह्यं तु कुन्तीपुत्रस्य धीमतः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१३८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य वेगेन पाण्डूनां मूर्च्छेव समजाय़त ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
तस्य वेदविदः प्राज्ञाः श्रुत्वा तां साधुवृत्तताम् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
तस्य वै गमनं विद्मो भीम नावर्तनं पुनः |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
२०८
नार्यु उवाच
तस्य वै तपसा राजंस्तद्वनं तेजसावृतम् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
तस्य वै दक्षिणं वीरो निर्विभेद रणे भुजम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
तस्य वै यदि भार्या त्वं भवेथा वरवर्णिनि |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
तस्य वैतानिकं कर्म दानं चैवेह पावनम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२५८
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्य वैश्रवणो नाम गवि पुत्रोऽभवत्प्रभुः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५०
युधिष्ठिर उवाच
तस्य व्यवसितस्त्यागो वुद्धिमास्थाय़ कां त्वय़ा |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
तस्य व्रह्मन्रुरोः सर्वं चरितं भूरितेजसः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य व्रह्मा ललाटस्थो रुद्रो वक्षसि चाभवत् |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
तस्य शक्तिं महावेगां भगदत्तो महारथः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
तस्य शक्तिं महावेगां भीमसेनो महावलः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तस्य शक्तिं रणे कार्ष्णिर्मृत्योर्घोरामिव स्वसाम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
तस्य शक्तिममेय़ात्मा पाण्डवो भुजगोपमाम् |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
तस्य शक्त्योपगूढस्य कस्माज्जीवेद्धनञ्जय़ः |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
तस्य शङ्खस्य नादेन धनुषो निस्वनेन च |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शङ्खस्य शव्देन भीमसेनरवेण च |
५६ क
विराट पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शङ्खस्य शव्देन रथनेमिस्वनेन च |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शङ्खस्य शव्देन रथनेमिस्वनेन च |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
तस्य शङ्खस्वनं श्रुत्वा वित्रेसुः सर्वसोमकाः ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
तस्य शल्यः शरं घोरं मुमोचाशीविषोपमम् |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
तस्य शल्यो रणे क्रुद्धो वाणैः संनतपर्वभिः |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४४
व्यास उवाच
तस्य शव्दं गुणं विद्यान्मूर्तिशास्त्रविधानवित् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तस्य शव्दमतिक्रम्य धनुःशव्दोऽस्पृशद्दिवम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भृगुरु उवाच
तस्य शव्दस्य वक्ष्यामि विस्तरं विविधात्मकम् ||
३५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
तस्य शव्दस्य वक्ष्यामि विस्तरेण वहून्गुणान् ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शव्देन घोरेण धनुर्घोषेण चाभिभो |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
तस्य शव्देन महता पाण्डवानां महद्वलम् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
२१६
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्य शव्देन महता समुद्धूतोदधिप्रभम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
तस्य शव्देन वित्रस्ताः प्राद्रवंस्तावका युधि |
६६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
तस्य शव्देन वित्रस्तास्तावका भरतर्षभ |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शव्देन वित्रेसुर्भय़ार्ताश्च विदुद्रुवुः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
तस्य शव्दो महानासीत्परानभिमुखस्य वै |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शाखो विशाखश्च नैगमेशश्च पृष्ठजः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य शान्तिः परित्यागे पुष्ट्या त्वपनय़ो महान् ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८२
अर्जुन उवाच
तस्य शान्तिमकृत्वा तु त्यजेस्त्वं यदि जीवितम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
३३
वासुकिरु उवाच
तस्य शापस्य मोक्षार्थं मन्त्रय़ित्वा यतामहे ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
तस्य शापस्य शान्त्यर्थं प्रददौ पन्नगोत्तमः |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
तस्य शापान्न शक्नोमि पदाद्विचलितुं पदम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
तस्य शार्ङ्गविनिर्मुक्तैर्वहुभिर्मर्मभेदिभिः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
तस्य शिष्यास्त्रय़ो वभूवुरुपमन्युरारुणिर्वेदश्चेति ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
तस्य शिष्यो वभूवाग्र्यो राजोपरिचरो वसुः |
३ क