वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कुर्वीत पितृदेवार्चने रतः ||
१२२ ग
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कुर्वीत पितृदेवार्चने रतः |
१३९ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कुर्वीत पितृदेवार्चने रतः |
१० ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कुर्वीत वल्मीकान्निःसृते जले |
६ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कुर्वीत सर्वपापैः प्रमुच्यते ||
१४० ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कृत्वा तु वाजिमेधमवाप्नुय़ात् ||
९४ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं कृत्वा तु विष्णुलोकमवाप्नुय़ात् ||
९५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०६
वैशम्पाय़न उवाच
तत्राभिषेकं कृत्वा स तर्पय़ित्वा पितामहान् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं यः कुर्यात्पितृदेवार्चने रतः |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं यः कुर्यात्सङ्गमे संशितव्रतः |
७६ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं यः कुर्यात्सोऽश्वमेधमवाप्नुय़ात् ||
८१ ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
तत्राभ्यगच्छद्देवेन्द्रो यत्र देवर्षय़ोऽभवन् |
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
तत्राभ्यगच्छन्मारीचं पूर्वामात्यं दशाननः |
५५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
तत्राभ्यधिकमालक्ष्य माधवं रथसत्तमम् |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
तत्रामरवरस्त्रीभिर्मोदते विगतज्वरः |
८३ क
वन पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
तत्रामृतरसं शीतं लघु कुन्तीसुतः शुभम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
तत्रारण्यकशास्त्राणि समधीत्य स धर्मवित् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
तत्रारावो महानासीदेकं द्रोणं जिघांसताम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
तत्रारावो महानासीद्द्रोणमेकं युय़ुत्सताम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्रारोहेत धर्मज्ञ श्रद्दधानो जितेन्द्रिय़ः |
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
तत्रार्चितो यथान्याय़ं सर्वकामैरुपस्थितः |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
तत्रार्चितो यय़ौ राजंस्तदा स तुरगोत्तमः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तत्रार्चय़ित्वा राजेन्द्र व्रह्माणममितौजसम् |
८८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
तत्रार्जुनः सन्त्वरितः शङ्खस्यासीत्पुरःसरः |
४९ क
वन पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
तत्रार्जुनस्याग्र्यधनुर्धरस्य; निशम्य तत्कर्म परैरसह्यम् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
तत्रार्जुनस्याथ परैः सार्धं समभवद्रणः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
तत्रार्जुनो महाराज शरैर्मुक्तैः सहस्रशः |
३६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
२
कृप उवाच
तत्रालसा मनुष्याणां ये भवन्त्यमनस्विनः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
८७
धौम्य उवाच
तत्राल्पेनैव सिध्यन्ति मानवास्तपसा विभो ||
१० ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
तत्रावगाढः स्त्रीभूतो व्यक्तं दैवान्न संशय़ः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
तत्रावतस्थे च मुनिर्मुहूर्त; मेकान्तमासाद्य गिरेः स शृङ्गे |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
तत्रावधीन्महावाहुः सैन्धवं दूरवासिनम् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
तत्रावसं वर्षसहस्रमात्रं; ततो लोकं परमस्म्यभ्युपेतः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
तत्रावसं वर्षसहस्रमात्रं; ततो लोकं परमस्म्यभ्युपेतः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
तत्रावसत्सोऽथ वर्षाः समृद्धे शवरालय़े |
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
तत्रावसन्वहून्कालान्भारता दुर्गमाश्रिताः ||
३५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तत्रावहारं सम्प्राप्तं मन्येऽहं पुरुषर्षभ |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
तत्रावेक्ष्य दिशः सर्वाः सव्यसाचिदिदृक्षय़ा |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
तत्रावैक्षन्त पुत्रास्ते भीमसेनस्य विक्रमम् |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
तत्रावोचन्विमनसो रथिनः सादिनस्तथा |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
तत्राव्यक्तमय़ीं व्याख्यां शृणु त्वं विस्तरेण मे |
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०९
वर्गो उवाच
तत्राशु पुरुषव्याघ्रः पाण्डवो वो धनञ्जय़ः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
तत्राश्चर्यं भीमसेनश्चकार पुरुषर्षभः |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
तत्राश्चर्यमपश्याम घोररूपं विशां पते |
४० क
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तत्राश्चर्यमपश्याम दृष्ट्वा तेषां पराक्रमम् |
४४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
तत्राश्चर्यमपश्याम वाणभूते तथाविधे |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
तत्राश्चर्यमभूद्युद्धं सात्वतस्य परैः सह |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
तत्राश्मचूर्णमपतत्पावकप्रकरा इव ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
तत्राश्रमपदं दिव्यं ददर्श भगवानथ |
३२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
तत्राश्रमपदं धीमानभिगम्य स पार्थिवः |
९ क