शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
व्राह्मण उवाच
तत्सर्वं प्रतिगृह्णीष्व यदि किञ्चिदिहास्ति मे ||
११२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वं प्रतिजग्राह धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वं प्रतिजग्राह राजा नागपुराधिपः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
तत्सर्वं प्रापय़न्ति स्म मम प्रत्यक्षदर्शनात् |
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
तत्सर्वं भगवानेव इति मे निश्चिता मतिः ||
१६२ ख
वन पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वं भरतश्रेष्ठाः समूहुर्योगमुत्तमम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
तत्सर्वं भवता साधो यथावदुपपादितम् ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३
सहदेव उवाच
तत्सर्वं मे सुविदितमन्यच्चापि महीपते ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
तत्सर्वं यातय़ाम्यद्य दिष्ट्या दृष्टोऽसि दुर्मते ||
३० ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वं राजवचनं स्वं च वाक्यं विशेषवत् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
तत्सर्वं राजशार्दूल नीतिशास्त्रेऽनुवर्णितम् ||
७४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
तत्सर्वं वर्तते सम्यग्यदा रक्षति भूमिपः ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
भीष्म उवाच
तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामि तन्मे शंस महामुने ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
तत्सर्वं समवाप्नोति कर्मणा तेन मानवः |
४६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वभक्षो भगवान्नाशकद्दग्धुमक्षय़म् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
तत्सर्वमखिलेन त्वं शृणु पाण्डवनन्दन ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
तत्सर्वमखिलेनाद्य कथय़िष्यामि तेऽनघ ||
७४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
तत्सर्वमद्य जानामि व्यवसाय़ं दुरात्मनः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
तत्सर्वमनवज्ञाय़ तथ्यं विज्ज्ञाय़ भारत |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वमनवाप्यैव श्रमशोकाद्धि कर्शिता |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
भीष्म उवाच
तत्सर्वमनुपश्यामि पाणौ फलमिवाहितम् ||
१८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वमन्ववर्तन्त धृतराष्ट्रव्यपेक्षय़ा ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
तत्सर्वमस्मै सत्कृत्य प्रय़च्छामि न चेच्छति ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
२८६
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सर्वमानुपूर्व्येण शशंसास्मै वृषस्तदा ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३३
भीष्म उवाच
तत्सर्वमुपचक्रुस्ते कापव्यस्यानुशासनम् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
९२
स्त्र्यु उवाच
तत्सर्वमेव पुत्रस्ते न मीमांसेत कर्हिचित् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तत्सागरमिवोद्धूतं रजसा संवृतं वलम् |
२२ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
तत्सागरसमप्रख्यं वृष्णिचक्रं महर्द्धिमत् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
तत्साङ्ख्ययोगिभिरुदारधृतं; वुद्ध्या यतात्मभिर्विदितं सततम् ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
तत्सादिनागकलिलं पदातिरथसङ्कुलम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
तत्साध्यतां लोकहितार्थमद्य; गच्छामि द्रष्टुं प्रकृतिं तवाद्याम् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
तत्सासुरगणं दग्ध्वा प्राक्षिपत्पश्चिमार्णवे ||
१२० ग
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
तत्सिन्धुपतिना राजन्पालितं ध्वजिनीमुखम् |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मवुद्धिप्रसादजम् ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
तत्सुपर्णार्कचरितमास्थितं वैष्णवं पदम् |
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
तत्सैन्यं भगवानग्निर्ददाह युधि भारत |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
तत्सैन्यं भरतश्रेष्ठ मुहूर्तेन महात्मभिः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
तत्सैन्यं भरतश्रेष्ठ वध्यमानं किरीटिना |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
तत्सैन्यमिषुभिस्तेन वध्यमानं समन्ततः |
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
तत्सौम्य गम्यताम् |
१७६ ख
वन पर्व
अध्याय
२१४
मार्कण्डेय़ उवाच
तत्स्कन्नं तेजसा तत्र सम्भृतं जनय़त्सुतम् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
तत्स्तम्भितमिवातिष्ठद्भीमसेनवलार्दितम् |
७४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
तत्स्त्रिय़ो नन्दय़िष्यामि ये त्वय़ा निहता रणे ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
तत्स्थः सृजति तान्भावान्नानारूपान्महातपाः ||
६० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
तत्स्थत्वादनुपश्यन्ति एक एवेति साधवः ||
७५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
तत्स्थानं तस्य दृष्ट्वा तु सर्वतः समलङ्कृतम् |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
तत्स्थानमनुसम्प्राप्तमन्वपश्यत देवलः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
तत्स्थाने समवस्थाप्य प्रत्यमित्रं महावलम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
तत्स्मरन्तोऽन्वतप्यन्त भृशमुद्विग्नचेतसः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८४
भीष्म उवाच
तत्स्मरस्व महावाहो भृशं संय़ोजय़स्व च |
१३ क