आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति कृच्छ्रादिव वाचमीरय़; ज्जनार्दनं सम्प्रतिपूज्य पार्थिव ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
तथेति कृत्वा तौ राजा सत्कृत्योपचचार ह ||
१० ग
आदि पर्व
अध्याय
३२
सूत उवाच
तथेति कृत्वा विवरं प्रविश्य स; प्रभुर्भुवो भुजगवराग्रजः स्थितः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
वासुदेव उवाच
तथेति च प्रतिज्ञातं कर्णेन शिनिपुङ्गव |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
२३९
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति च प्रतिश्रुत्य सा कृत्या प्रय़यौ तदा |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
तथेति च प्राह नृपो निर्विशङ्कस्तपोधनम् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति च महर्षिस्तां मातरं प्रत्यभाषत ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
३४
देवा ऊचुः
तथेति च वचस्तस्यास्त्वय़ाप्युक्तं पितामह |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
तथेति चाव्रवीद्विष्णुर्व्रह्मणा सह भार्गव |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति चाव्रवीद्व्रह्मा सर्वलोकपितामहः ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
तथेति चोक्त्वा त्वरिताः स्म तेऽर्जुनं; जिघांसवो वीरतमाः समभ्ययुः |
५३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति चोक्त्वा विवुधा जग्मू राजन्यथागतम् |
४७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
तथेति चोक्त्वाच्युतमप्रमादी; द्रौणिं प्रय़त्नादिषुभिस्ततक्ष |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
तथेति चोदितः प्रीतस्तावृषी प्रत्यपूजय़त् ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति तत्प्रतिज्ञाय़ हिडिम्वा राक्षसी तदा |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
२२०
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति तत्प्रतिश्रुत्य भगवान्हव्यवाहनः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति तत्प्रतिश्रुत्य वीभत्सुः स कृताञ्जलिः |
७८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
तथेति तां प्राह तदा व्रह्महत्यां पितामहः |
२६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
तथेति ते परिष्वक्ताः परिष्वज्य च तं नृपम् |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
तथेति तौ प्रतिश्रुत्य क्षुधितौ श्रमकर्शितौ |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
तथेति राजन्पुत्रस्ते सह कर्णेन भारत |
५४ क
आदि पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति राज्ञा सा तूक्ता तदा भरतसत्तम |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
तथेति रामस्तद्वारि प्रतिगृह्याथ सत्कृतम् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
तथेति लज्जमाना सा तमुवाच द्विजर्षभम् ||
५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
तथेति वरुणो देव आदित्यो भृगुसत्तमम् |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति व्याजहारोच्चैर्ह्लादय़न्निव तं जनम् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२८८
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति व्राह्मणेनोक्ते स राजा प्रीतमानसः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति समनुज्ञाय़ सा प्रविश्याव्रवीत्स्नुषाम् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
तथेति सा प्रतिश्रुत्य तस्मै पाणिं ददौ तदा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
तथेति हृष्टमनस उक्त्वाथाप्सरसां गणाः |
४५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
युधिष्ठिर उवाच
तथेत्यथोक्तः प्रतिपूजितस्तदा; गदाग्रजो धर्मसुतेन वीर्यवान् |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
तथेत्याह अर्जुनः सव्यसाची; निशाव्यपाय़े भविता विमर्दः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्ते अम्विकय़ा भीष्ममामन्त्र्य सुव्रता |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
तथेत्युक्ते केशवस्तु पार्थेन यदुपुङ्गवः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
तथेत्युक्त्वा गता देवी कृतकामा मनस्विनी |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
तथेत्युक्त्वा च ते सर्वे पाण्डवाः सात्यकिस्तथा |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा ततः प्राय़ाद्वृहस्पतिसुतः कचः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
तथेत्युक्त्वा ततः सूदः संस्थानं वध्यघातिनाम् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
१५४
व्राह्मण उवाच
तथेत्युक्त्वा ततस्तस्मै प्रददौ भृगुनन्दनः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२१
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा ततस्तस्मै प्रादादस्त्राणि भार्गवः |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु कौन्तेय़ः सोऽभिवाद्य पितामहम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
तथेत्युक्त्वा तु तं याजो याज्यार्थमुपकल्पय़त् |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु तां कुन्तीमाविवेश विहङ्गमः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
तथेत्युक्त्वा तु तान्पाशान्मुक्त्वा वैवस्वतो यमः |
५४ क
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे काद्रवेय़ाः समागताः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे जग्मुरावसथान्प्रति |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे प्रातिष्ठन्तामितौजसः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे भीष्ममूचुः पितामहम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे रथैस्तूर्णं प्रहारिणः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे हैडिम्वप्रमुखास्तदा |
२१ क