chevron_left  कथाश्चक्रुस्ततस्तेarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
कथाश्चक्रुस्ततस्ते तु मधुरा धर्मसंहिताः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
कथासञ्जननार्थाय़ चोदय़ामास पाण्डवः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
कथाय़ुक्ताः परिषदः पृथग्राजन्समागताः ||
७२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
कथाय़ोगे कथाय़ोगे कथय़ामासतुस्तदा ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
कथितं कर्म ते तात किं भूय़ः श्रोतुमिच्छसि ||
६३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
व्यास उवाच
कथितं तच्च वः सर्वं मय़ा पृष्टेन तत्त्वतः ||
९७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
भीष्म उवाच
कथितं तत्त्वतस्तात श्रुत्वा देवर्षितो नृप ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
कथितं ते महाराज यस्मान्नावर्तते पुनः ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय १७३
गन्धर्व उवाच
कथितं ते मय़ा पूर्वं यथा शप्तः स पार्थिवः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
कथितं नैमिषारण्ये पर्वाण्यष्टादशैव तु |
७१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
जनमेजय़ उवाच
कथितं मे महद्व्रह्मंस्तथ्यमेतदसंशय़म् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय ५६
जनमेजय़ उवाच
कथितं वै समासेन त्वय़ा सर्वं द्विजोत्तम |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३७
अर्जुन उवाच
कथितं ह्यनय़ा सत्यं गाय़त्र्या कन्यया दिवि |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
काक उवाच
कथितः कर्ण रामेण सभाय़ां राजसंसदि ||
६१ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
युधिष्ठिर उवाच
कथितस्ते सभानित्यो देवेन्द्रस्य महात्मनः ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
कथितस्तेन सुग्रीवस्त्वद्विधैः सचिवैर्वृतः ||
६५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
कथिता भरतश्रेष्ठ पृष्टेनाक्लिष्टकर्मणा ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४२
व्यास उवाच
कथितानि मय़ा पुत्र भवन्ति न भवन्ति च ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
कथिताश्चापि विधिवद्या वैशम्पाय़नेन वै ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
कथितो धर्मराजस्य राजसूय़े क्रतूत्तमे ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय १०९
जनमेजय़ उवाच
कथितो धार्तराष्ट्राणामार्षः सम्भव उत्तमः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
कथितो धृतराष्ट्रस्य विवर्णो हरिणः कृशः ||
९१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
कथितो नारदेनासि पूर्वर्षिरमितद्युतिः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय १८३
अत्रिरु उवाच
कथितो मे महाभागे गौतमेन महात्मना |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११६
युधिष्ठिर उवाच
कथितो वाक्यसञ्चारस्ततो विज्ञापय़ामि ते ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
कथितो हरिगीतासु समासविधिकल्पितः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
कथेय़ं कथिता पुण्या धर्म्या धर्मभृतां वर ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
मनुरु उवाच
कथेय़मभवत्तत्र या त्वय़ा परिकीर्तिता |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
कथेय़मभिनिर्वृत्ता भारतानां महात्मनाम् ||
७४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
कथेय़मभिनिर्वृत्ता मुनीनां भावितात्मनाम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
कथैषा कथिता तत्र कश्यपेन महर्षिणा |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
कथैषा कथिता पुण्या नारदाय़ महात्मने ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
भीष्म उवाच
कथ्यतामिति सा भूय़ो रामेणोक्ता शुचिस्मिता |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
विश्वावसुरु उवाच
कथ्यते देवलोके च पितृलोके च व्राह्मण ||
६३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५
शौनक उवाच
कथ्यन्ते ताः पुरास्माभिः श्रुताः पूर्वं पितुस्तव ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
कथ्यमानं त्वय़ा किञ्चित्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
कथ्यमानं त्वय़ा विप्र परं कौतूहलं हि मे ||
७ ग
वन पर्व
अध्याय १०४
युधिष्ठिर उवाच
कथ्यमानं त्वय़ा विप्र राज्ञां चरितमुत्तमम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६२
जनमेजय़ उवाच
कथ्यमानं त्वय़ा विप्र विप्रर्षिगणसंनिधौ ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय ८१
जनमेजय़ उवाच
कथ्यमानं त्वय़ा विप्र विप्रर्षिगणसंनिधौ ||
६ ग
वन पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
कथ्यमानं त्वय़ा विप्र सूक्ष्मं धर्मं च तत्त्वतः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
कथ्यमानं मय़ा तात त्वं हि मेऽर्धं स्मृतः पुरा ||
१० ग
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
कथ्यमाने तथा रम्ये नगरे वारणावते |
५ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़न्तः कथा वह्वीः पश्यन्तो नटनर्तकान् ||
४८ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़न्तः कथाः पुण्या धर्मज्ञाः शुचय़ोऽमलाः ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
कथय़न्तः स्म कौन्तेय़ा वनं जग्मुर्मनस्विनः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
कथय़न्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़न्ति पुरावृत्तमितिहासमिमं जनाः |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़न्ति स्म पुरुषा नानादेशनिवासिनः ||
४० ग
आदि पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़न्ति स्म सम्भूय़ चत्वरेषु सभासु च ||
४ ख