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शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
तथैवात्मा शरीरस्थो योगेनैवात्र दृश्यते ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
भीष्म उवाच
तथैवात्युदकाद्भीतस्तस्य भेदनमिच्छति |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
तथैवाधर्मसंय़ुक्तो नरकाय़ोपपद्यते ||
१४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
तथैवानडुहो युक्तान्समवेक्षस्व जाजले ||
४४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
तथैवानभिजातोऽपि काममस्तु वहुश्रुतः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
तथैवानर्थसिद्धिं च यथा लोकास्तथैव ते ||
३५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
व्राह्मण उवाच
तथैवान्तर्हितैः सिद्धैर्यान्तं चक्रधरैः सह ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
सञ्जय़ उवाच
तथैवान्धकवृष्णीनां तव चैव विशेषतः |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
तथैवान्नं ह्यहरहः साय़ं प्रातर्निरुप्यते |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवान्यानि भूतानि तिर्यग्योनिगतान्यपि |
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
तथैवान्याश्च दृश्यन्ते स्त्रिय़श्च व्रह्मवादिनाम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
धृतराष्ट्र उवाच
तथैवान्ये चतुर्वेदास्त्रिवेदाश्च तथापरे ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
तथैवान्ये नृपतय़ः सहपुत्राः सवान्धवाः ||
५ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवान्ये पृथक्सर्वे तीर्थेष्वाप्लुत्य भारत |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवान्ये महेष्वासा ये तस्यैवानुय़ाय़िनः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
तथैवान्ये वध्यमानाः पाण्डवेय़ैर्महात्मभिः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
तथैवापचमानेभ्यः प्रदेय़ं गृहमेधिना ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
तथैवापचमानेभ्यः प्रदेय़ं गृहमेधिना ||
५१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
तथैवापचय़ो दृष्टो व्यपय़ाने क्षय़व्ययौ ||
५२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवापततां तेषां योधानां जय़गृद्धिनाम् |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवापरमत्स्यांश्च व्यजय़त्स पटच्चरान् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
तथैवापेतधर्मेषु न मैत्रीमाचरेद्वुधः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३२
व्यास उवाच
तथैवापोह्य सङ्कल्पान्मनो ह्यात्मनि धारय़ेत् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
तथैवाप्रतिवुद्धोऽपि ज्ञेय़ो नृपतिसत्तम |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवाप्लुतमनासादितकामरसमतृप्तं वाणेनाभिजघान ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
तथैवाप्सरसामङ्के प्रसुप्तः प्रतिवुध्यते |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
तथैवाप्सरसो राजन्गन्धर्वाश्च मनोरमाः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवाप्सरसो हृष्टाः सर्वालङ्कारभूषिताः |
४९ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवाभिपतिष्यामि भय़ं वो नेह विद्यते ||
८२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५२
धृतराष्ट्र उवाच
तथैवाभिसरास्तेषां त्यक्तात्मानो जय़े धृताः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवामन्त्र्य गाङ्गेय़ं केशवस्ते च पाण्डवाः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
तथैवार्जुनमुक्तानि शरजालानि भागशः |
४६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
तथैवार्जुनिनिर्मुक्ताः शराः काञ्चनभूषणाः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
तथैवार्द्रव्रणान्कृच्छ्रे वर्तमानान्नृपात्मजान् ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
तथैवालङ्कृतः काले तिष्ठेथा भूरिदक्षिणः |
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
तथैवालम्वुसो राजन्हैडिम्वं युद्धदुर्मदम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५२
सञ्जय़ उवाच
तथैवालाय़ुधो राजञ्शिलाधौतैरजिह्मगैः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
तथैवावां प्रिय़ौ तेषां न तु युद्धे कुरूद्वह |
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
तथैवावेद्यमव्यक्तं वेद्यः पुरुष उच्यते |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
नारद उवाच
तथैवाव्याहरन्भाति विमलो भानुरम्वरे ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवाशनय़स्तत्र चक्रय़ुक्ता हुडागुडाः |
५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
तथैवाशिरसो राजन्नृक्षवक्त्राश्च भीषणाः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवाश्वतरीणां च दान्तानां वातरंहसाम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
तथैवाश्वनृनागानां शरीरैरावभौ तदा |
५५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
तथैवाश्वय़ुजं मासमेकभक्तेन यः क्षपेत् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
तथैवासं त्रिककुदो वाराहं रूपमास्थितः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
तथैवासीदभीसारस्तस्य द्रोणं जिघांसतः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय ५०
वृहदश्व उवाच
तथैवासीद्विदर्भेषु भीमो भीमपराक्रमः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १११
पाण्डुरु उवाच
तथैवास्मिन्मम क्षेत्रे कथं वै सम्भवेत्प्रजा ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
तथैवास्य भय़ाद्वद्ध्वा वसिष्ठः सलिले पुरा |
१२ क