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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
सप्तोत्तरं तेषु वसत्यनीशः; संहारविक्षेपशतं सशेषम् |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
सप्रजापतिशक्रान्तं जगन्मामभ्युदैक्षत ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
सप्रजापतय़ः सर्वे तस्मिन्मुमुहुरीश्वरे ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
सप्रजापतय़ः सर्वे वालार्कसदृशप्रभम् ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
सप्रतोदमहाशङ्खान्सकुन्तान्सकचग्रहान् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
सप्रभश्चोदितः सूर्यो निष्प्रभः समपद्यत ||
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
सप्राकारं सपरिखं सवप्रं चारुतोरणम् ||
२१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
सप्रासकवचाश्चान्ये नराः सुप्ताः पृथक्पृथक् ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६३
नारद उवाच
सप्रासङ्गं च शकटं सधान्यं वस्त्रसंय़ुतम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
सप्रासांश्च सतूणीरान्सशरान्सशरासनान् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय १२१
द्रोण उवाच
सप्रय़ोगरहस्यानि दातुमर्हस्यशेषतः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
सफलं चिरकारित्वं कुरु त्वं चिरकारिक ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
सफलं तत्तवाद्यास्तु भवाद्य चिरकारिकः ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय २४६
युधिष्ठिर उवाच
सफलं तस्य जन्माहं मन्ये सद्धर्मचारिणः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय ५०
वृहदश्व उवाच
सफलं ते भवेज्जन्म रूपं चेदं सुमध्यमे ||
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
सफलं वृष्णिशार्दूल मृतां मामुपधारय़ ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
सफलः कृष्ण सङ्कल्पः सिद्धिश्च निय़ता मम |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
सफलां तां गिरं देव कर्तुमर्हसि नो विभो ||
१०० ख
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
सफलाः प्रपतन्ति स्म द्रुतं स्रस्ताः कुमारकाः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सभा तु सा मत्स्यपतेः समृद्धा; मणिप्रवेकोत्तमरत्नचित्रा |
२ क
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
सभा तु सा महाराज शातकुम्भमय़द्रुमा |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
सभा मणिमय़ी राजन्यथेय़ं तव भारत ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय १०
नारद उवाच
सभा वैश्रवणी राजञ्शतय़ोजनमाय़ता |
१ क
सभा पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
सभां गत्वा स चोवाच द्रौपद्यास्तद्वचस्तदा |
८ क
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
सभां तां कारय़ामास सव्यसाची परन्तपः ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
सभां तु पितृराजस्य वरुणस्य च धीमतः |
११ क
सभा पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
सभां प्रचक्रमे कर्तुं पाण्डवानां महात्मनाम् ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय ६१
विदुर उवाच
सभां प्रपद्यते ह्यार्तः प्रज्वलन्निव हव्यवाट् |
५३ क
सभा पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
सभां रम्यां प्रविविशुः कितवैरभिसंवृताम् ||
३७ ख
विराट पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
सभां शरणमाधावद्यत्र राजा युधिष्ठिरः ||
६ ग
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
सभाः कथय़ ताः सर्वाः श्रोतुमिच्छामहे वय़म् ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
सभाः क्रिय़न्तामावसथाश्च मुख्याः; सहस्रशश्चित्रभौमाः समृद्धाः ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
सभाः पथि विधीय़न्तां सर्वकामसमाहिताः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
सभाः प्रपाश्च विविधास्तडागानि च पाण्डवः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सभाक्रिय़ा पाण्डवानां किङ्कराणां च दर्शनम् ||
९७ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
सभाग्याः कुरवश्चेमे ये न दग्धास्त्वय़ानघे |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
सभाजितः ससैन्यस्तु प्रतिनन्द्याथ मत्स्यराट् |
४ क
वन पर्व
अध्याय १९५
मार्कण्डेय़ उवाच
सभाज्य चैनं विविधैराशीर्वादैस्ततो नृपम् |
३३ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
सभाज्यमानः पौरैश्च स्त्रीभिर्जानपदैस्तथा |
४९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
सभाज्यमानः शुशुभे महेन्द्रो दैवतैरिव ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
सभाज्यमानो विप्रैश्च स्तूय़मानश्च वन्दिभिः |
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
सभाज्यमानो विवुधैः परं हर्षमवाप ह ||
८२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
अर्जुन उवाच
सभाजय़ितुमाक्रन्दादिति सत्यं व्रवीमि ते ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
भीष्म उवाच
सभाण्डोपस्करं राजंस्तमासाद्य वकाधिपः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सभापर्व ततः प्रोक्तं मन्त्रपर्व ततः परम् ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय २१२
वैशम्पाय़न उवाच
सभापालस्य तत्सर्वमाचख्युः पार्थविक्रमम् ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
सभामकथय़न्मह्यं व्राह्मीं तत्त्वेन पाण्डव ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
सभामग्र्यां क्रोशमात्राय़तां मे; तद्विस्तारामाशु कुर्वन्तु युक्ताः ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय ६२
द्रौपद्यु उवाच
सभामध्यं विगाहेऽद्य क्व नु धर्मो महीक्षिताम् ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
धृतराष्ट्र उवाच
सभामध्ये तु कृष्णेन यच्छ्रेय़ोऽभिहितं मम |
१४ क