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शान्ति पर्व
अध्याय १२०
युधिष्ठिर उवाच
तदेव विस्तरेणोक्तं पूर्वैर्दृष्टं सतां मतम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय २८३
मार्कण्डेय़ उवाच
तदेव सर्वं सावित्र्या महाभाग्यं महर्षय़ः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
तदेव सुकृतं हव्यं येन तुष्यन्ति देवताः ||
७ ग
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तदेवं गते न शक्तोऽहं तीक्ष्णहृदय़त्वात्तं शापमन्यथा कर्तुम् |
१३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १११
नारद उवाच
तदेवं वहुमानात्ते मय़ेहानीप्सितं कृतम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
तदेवं विजय़ः प्राप्तः पुनः संशय़ितः कृतः ||
१० ग
शान्ति पर्व
अध्याय १६८
व्राह्मण उवाच
तदेवं वुद्धिमास्थाय़ सुखं जीवेद्गुणान्वितः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
श्वपच उवाच
तदेवं श्रेय़ आधत्स्व मा लोभाच्छ्वानमादिथाः ||
७९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
तदेवं षोडशकलं देहमव्यक्तसञ्ज्ञकम् |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
तदेवं समरे तात वर्तमाने महाभय़े |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
तदेवमनुसन्दृश्य वाच्यावाच्यं परीक्षता |
१७२ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तदेवमपि वत्सानां वृत्त्युपरोधं करोष्येवं वर्तमानः |
४९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
तदेवमुपशान्तेन दान्तेनैकान्तशीलिना |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१०
गुरुरु उवाच
तदेवमेतौ विज्ञेय़ावव्यक्तपुरुषावुभौ |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३१
व्यास उवाच
तदेवाणोरणुतरं तन्महद्भ्यो महत्तरम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय २१९
नमुचिरु उवाच
तदेवानुभविष्यामि किं मे मृत्युः करिष्यति ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत् ||
४२ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
तदेवासनमन्विच्छेद्यत्र नाभिषजेत्परः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
तदेवाहुरणुभ्योऽणु तन्महद्भ्यो महत्तरम् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
तदेवाय़तनं चक्रुः पुण्यं सर्वक्रिय़ास्वपि ||
४२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
तदेवाय़ुधमादाय़ मोक्षय़ाशु महीपतिम् ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
तदेवैतच्छिरोग्रीवं तौ वाहू परिघोपमौ |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ५१
धृतराष्ट्र उवाच
तदेवैतदवशस्याभ्युपैति; महद्भय़ं क्षत्रिय़वीजघाति ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११०
नारद उवाच
तदेष ऋषभो नाम पर्वतः सागरोरसि |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४८
नाग उवाच
तदेष तपसां शत्रुः श्रेय़सश्च निपातनः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
तदेष परमो धर्मो यन्मां पृच्छसि भारत |
८ क
वन पर्व
अध्याय २८०
द्युमत्सेन उवाच
तदेषा लभतां कामं यथाभिलषितं वधूः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
तदेय़ं च्यवनेनेह हृता तेषां वसुन्धरा ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
तदैतान्युग्ररूपाणि अभवञ्शतशो नृप ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय २९४
वैशम्पाय़न उवाच
तदैनमव्रवीद्भूय़ो राधेय़ः प्रहसन्निव ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
तदैन्द्रमस्त्रं विततं सुघोर; मसह्यमुद्वीक्ष्य युगान्तकल्पम् ||
१२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
तदैव कुरवः सर्वे निराशा जीवितेऽभवन् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
तदैव कृतकार्या हि वय़ं स्याम कुरूद्वह |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २९
भीष्म उवाच
तदैव क्रोधहर्षौ च कामद्वेषौ च पुत्रक |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ९०
युधिष्ठिर उवाच
तदैव गन्तास्मि दृढमेष मे निश्चय़ः परः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय ३५
युधिष्ठिर उवाच
तदैव चेद्वीरकर्माकरिष्यो; यदा द्यूते परिघं पर्यमृक्षः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
तदैव तत्कुलं नास्ति यदा शोचन्ति जामय़ः ||
५ ग
शल्य पर्व
अध्याय ६०
वासुदेव उवाच
तदैव तावद्दुष्टात्मन्वध्यस्त्वं निरपत्रपः ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७७
भगवानु उवाच
तदैव ते पराभूता यदा सङ्कल्पितास्त्वय़ा |
२० क
विराट पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
तदैव ते हि विक्रान्तुमीषुः कौरवनन्दनाः |
८ क
वन पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
तदैव तेषां न वभूव हर्षः; कुतो रतिस्तद्गतमानसानाम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
युधिष्ठिर उवाच
तदैव त्वं न निर्दग्धः सवलः सपदानुगः ||
५० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
तदैव धर्मश्च तपश्च नष्टं; वैकर्तनस्याधमपूरुषस्य ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
व्राह्मण उवाच
तदैव न स्पृहय़ते साक्षादपि शतक्रतोः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
तदैव न हताः सर्वे मम पुत्रा मनस्विना ||
१५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
तदैव निहताः कृष्ण मम पुत्रास्तरस्विनः |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
धृतराष्ट्र उवाच
तदैव निहतान्मन्ये कुरूनन्यांश्च पार्थिवान् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
तदैव निहतो राजन्यदैव निरपत्रपः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
तदैव प्रव्यथन्तेऽस्य शत्रवो विनमन्ति च ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
तदैव मे सञ्जय़ दीव्यतोऽभू; न्नो चेत्कुरूनागतः स्यादभावः |
१५ क