वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
शरवर्षैर्महद्भिर्मां समन्तात्पर्यवारय़न् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
शरवर्षैर्महद्भिर्मां समन्तात्प्रत्यवारय़न् ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शरवर्षैर्महावेगैरमित्रानभिवर्षतः |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
शरवर्षैश्च विविधैरवर्षच्छात्रवांस्ततः ||
७९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
शरवाणासनधरा यवनाश्च प्रहारिणः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
शरविक्षतगात्रस्तु प्रत्यमित्रमवस्थितम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
शरविक्षतगात्राश्च पाण्डुपुत्रा महारथाः |
७४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्टिं च तां कर्णो दूरप्राप्तामशातय़त् ||
६५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्टिं ततस्तां तु शरवर्षेण पाण्डवः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्टिं तु तां प्राप्तां शरैराशीविषोपमैः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्टिं तु तां मुक्तां सूतपुत्रेण भारत |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्टिं शरैर्द्रौणिरप्राप्तां तां व्यशातय़त् |
६५ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्टिमपश्याम शलभानामिवाततिम् ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
शरवृष्ट्या पुनः पार्थश्छादय़ामास तं रणे |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
अर्जुन उवाच
शरवेगसमुत्कृत्तै राज्ञां केशव मूर्धभिः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
शरवेगान्निहत्याहमस्त्रैः शरविघातिभिः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
शरवेश्मनि पार्थेन कृते तस्मिन्महारणे ||
५८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
शरवेश्मप्रविष्टौ तौ ददृशाते न कैश्चन |
७९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
शरवेश्माकरोत्पार्थस्त्वष्टेवाद्भुतकर्मकृत् ||
५७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
शरव्रातांश्च सङ्क्रुद्धो निघ्नन्कर्णो व्यदृश्यत ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
शरव्रातेन महता सर्वतः पर्यवारय़त् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
शरव्रातैः शरव्रातान्वहुधा विदुधाव तान् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
शरव्रातैर्विधुन्वन्तः शत्रून्विततकार्मुकाः |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
शरव्रातैस्तु भीष्मेण शतशोऽथ सहस्रशः |
४५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
शरशक्तिगदाखड्गतोमराक्षां भय़ावहाम् ||
६६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
शरशक्तिध्वजवनं हय़नागसमाकुलम् |
७५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
शरशक्तिसमाकीर्णे क्रव्यादगणसङ्कुले |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
शरशक्त्यर्दिताः क्लान्ता रात्रिमूढाल्पचेतसः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
शरशक्त्यृष्टिनाराचैर्निघ्नन्तो गजय़ोधिनः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
शरश्च सूर्यसङ्काशः कालानलसमद्युतिः |
१२४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१९
गान्धार्यु उवाच
शरसङ्कृत्तवर्माणं वीरं विशसने हतम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
शरसङ्घमहाज्वालः क्षत्रिय़ान्समरेऽदहत् ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
शरसम्भिन्नगात्रौ तौ सर्वतः शकलीकृतौ |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
शरसम्भिन्नवर्माणौ तावुभौ भ्रातरौ रणे |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
शरसम्वाधमकरोत्खं दिशः प्रदिशस्तथा ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२०
जनमेजय़ उवाच
शरस्तम्भात्कथं जज्ञे कथं चास्त्राण्यवाप्तवान् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२०
वैशम्पाय़न उवाच
शरस्तम्वे च पतितं द्विधा तदभवन्नृप |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
शरस्तम्वे महात्मानमनलात्मजमीश्वरम् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
शरस्तम्वोद्भवः श्रीमानवध्य इति मे मतिः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
शरस्फुलिङ्गश्चापार्चिर्दहन्कक्षमिवानलः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
शरस्फुलिङ्गो भीष्माग्निर्ददाह क्षत्रिय़र्षभान् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शरा दश दिशो मुक्ता वृषसेनेन मारिष |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
शरा ह्येते भविष्यन्ति दारुणाशीविषोपमाः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
शरांश्च व्रह्मदण्डाभान्धृष्टद्युम्नमय़ोधय़त् ||
१२२ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
शरांश्च सुवहून्क्रुद्धो मुमोचाशु धनञ्जय़े ||
२५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
शरांश्चाशीविषाकाराञ्ज्वलितान्पन्नगानिव ||
१५ ग
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
शरांश्चाशीविषाकारानूर्ध्वगांस्तिग्मतेजसः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
शरांश्चाशीविषाकारान्विसृजन्तं महावलम् ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
शरांश्चिक्षेप निशितान्भीमसेनस्य संय़ुगे ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
शरांश्चिक्षेप वै पार्थो द्रौणिं प्रति महावलः ||
४५ ख