शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
युधिष्ठिर उवाच
नित्यं वैरनिवद्धाश्च दानवाः सुरसत्तमैः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
नारद उवाच
नित्यं शमपरा ये च तथा ये चानसूय़काः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
नित्यं संनिहिताभिश्च ओषधीभिः फलैस्तथा ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१९
वदान्य उवाच
नित्यं संनिहितो देवस्तथा पारिषदाः शुभाः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
नित्यं संस्कृतमन्नं तु विविधं राजवेश्मनि |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यं सङ्क्लेशिता राजन्स्वराज्यांशं लभेमहि ||
४३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
नारद उवाच
नित्यं सत्ये च निरता दुर्गाण्यतितरन्ति ते ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
नित्यं सन्तः कुले जाताः पावकोपमतेजसः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८२
पराशर उवाच
नित्यं सर्वास्ववस्थासु नासद्भिरिति मे मतिः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
नित्यं सांनिध्यमिह ते चित्रभानो भवेदिति |
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यं सुभिक्षमेवासीद्रामे राज्यं प्रशासति ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
उमो उवाच
नित्यं स्थानमुपागम्य दिव्यचन्दनरूषिताः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
महेश्वर उवाच
नित्यं स्वाध्याय़युक्तेन दानाध्ययनजीविना ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१११
भीष्म उवाच
नित्यं स्वाध्याय़शीलाश्च दुर्गाण्यतितरन्ति ते ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
नारद उवाच
नित्यं स्वाध्याय़िनो ये च दुर्गाण्यतितरन्ति ते ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३०
कुन्त्यु उवाच
नित्यं स्वाहा स्वधा नित्यं ददुर्मानुषदेवताः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
नित्यं स्वाहा स्वधा नित्यमुभे मानुषदैवते |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
नित्यं स्वेभ्यः परेभ्यश्च तृप्ता माता यथा पय़ः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
नित्यं हि नास्ति जगति भूतं स्थावरजङ्गमम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यं हि पुरुषव्याघ्रा वन्याहारमरिन्दमाः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
धृतराष्ट्र उवाच
नित्यं हि मामकांस्तात हतानेव हि शंससि |
२ क
वन पर्व
अध्याय
८
दुःशासन उवाच
नित्यं हि मे कथय़तस्तव वुद्धिर्हि रोचते ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
नित्यं हि व्यसनी लोके परिभूतो भवत्युत |
४३ क
सभा पर्व
अध्याय
६५
युधिष्ठिर उवाच
नित्यं हि स्थातुमिच्छामस्तव भारत शासने ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽय़ं सनातनः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यकालमहं सत्ये एतत्संवननं मम ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
नित्यतुष्टाश्च हृष्टाश्च प्राणिनः सुरवेश्मनि ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
नित्यतृप्त इव व्रह्मन्न किञ्चिदवमन्यसे ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
नारद उवाच
नित्यतृप्त इव स्वस्थो वालवच्च विचेष्टसे ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०३
याज्ञवल्क्य उवाच
नित्यत्वादक्षरत्वाच्च क्षराणां तत्त्वतोऽन्यथा ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
नित्यदानात्सर्वकामांस्तिला निर्वर्तय़न्त्युत ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यपुष्पफलान्देशान्देवर्षिगणसेवितान् ||
३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यपुष्पफलाश्चैव पादपा निरुपद्रवाः |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
नित्यपुष्पफलास्तत्र नगाः पत्ररथाकुलाः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
नित्यपुष्पफलास्तत्र पादपा हरितच्छदाः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
नित्यपुष्पफलैर्वृक्षैरुपेतौ वाहुदामनु ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यपुष्पफलैर्वृक्षैर्हिमसंस्पर्शकोमलैः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यपुष्पफलोपेतैर्नानाद्विजगणाय़ुतम् |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८४
धृतराष्ट्र उवाच
नित्यप्रभिन्नान्मातङ्गानीषादन्तान्प्रहारिणः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
व्राह्मण उवाच
नित्यप्रमुदिता मूढा दिवि देवगणा इव |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
नित्यप्रमुदितानां च तालगीतस्वनो महान् |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
नित्यप्रमुदितोपेतः स्वादुभक्षः शुभान्वितः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
नित्यप्रसक्तवैरो यः पाण्डवैः पृथिवीपतिः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१००
पृथिव्यु उवाच
नित्यमग्निं परिचरेदभुक्त्वा वलिकर्म च |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
नित्यमग्निं परिचरेद्भिक्षां दद्याच्च नित्यदा |
६६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४२
सनत्सुजात उवाच
नित्यमज्ञातचर्या मे इति मन्येत व्राह्मणः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
नित्यमत्ताश्च मातङ्गाः शूरैर्म्लेच्छैरधिष्ठिताः |
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
७८
वृहदश्व उवाच
नित्यमन्वास्यसे राजंस्तत्र का परिदेवना ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
नित्यमर्थविदां तात तथा धर्मानुदर्शिनाम् ||
१०५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
नित्यमर्थेषु सर्वेषु राजा कुर्वीत मन्त्रिणः ||
२२ ख