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शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा च सुतप्तेन यमेन निय़मेन च ||
४० ग
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
तपसा चातितीव्रेण प्रतिभास्य भविष्यति |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय १९८
मनुरु उवाच
तपसा चानुमानेन गुणैर्जात्या श्रुतेन च |
११ क
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
तपसा चिन्तय़ंश्चापि तं शिशुं नोपलक्षय़े |
८५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
तपसा चेङ्गितेनाथ पर्वतोऽथ वुवोध तत् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय १४१
लोमश उवाच
तपसा चैव कौन्तेय़ सर्वे योक्ष्यामहे वय़म् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १३५
यवक्रीरु उवाच
तपसा ज्ञातुमिच्छामि सर्वज्ञानानि कौशिक ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
तपसा तदवाप्नोति यद्भूतं सृजते जगत् |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
तपसा तदवाप्नोति यद्भूत्वा सृजते जगत् |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५४
भीष्म उवाच
तपसा तदवाप्यं हि यन्न शक्यं मनोरथैः ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२३
भीष्म उवाच
तपसा तरते सर्वमेनसश्च प्रमुच्यते ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
व्रह्मो उवाच
तपसा तानि जीवन्ति इति तद्वित्त सुव्रताः ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा तानि प्राप्यानि तपोमूलं महत्सुखम् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा तु तथा युक्तं विश्वामित्रं पितामहः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा तु त्वमात्मानं भ्रातृभिः सह योजय़ |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
तपसा तेजसा कान्त्या दीप्तय़ा सह भार्यया ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
भीष्म उवाच
तपसा तेजसा चैव दुर्निरीक्षौ सुरैरपि |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ६५
शकुन्तलो उवाच
तपसा दीप्तवीर्योऽय़ं स्थानान्मां च्यावय़ेदिति |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १०५
लोमश उवाच
तपसा दीप्यमानं तं ज्वालाभिरिव पावकम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
तपसा दीप्यमानास्ते दहेय़ुः पृथिवीमपि |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ११०
पाण्डुरु उवाच
तपसा दुश्चरेणेदं शरीरमुपशोषय़न् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४६
भीष्म उवाच
तपसा देवतेज्याभिर्वन्दनेन तितिक्षय़ा ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १९६
मार्कण्डेय़ उवाच
तपसा देवतेज्याभिर्वन्दनेन तितिक्षय़ा |
१६ क
वन पर्व
अध्याय ९५
लोमश उवाच
तपसा द्योतितां स्नातां ददर्श भगवानृषिः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
तपसा द्योतितात्मानं स्वेष्वङ्गेषु यतं तथा |
६ क
आदि पर्व
अध्याय १६४
गन्धर्व उवाच
तपसा निर्जितौ शश्वदजेय़ावमरैरपि |
५ क
सभा पर्व
अध्याय १०
नारद उवाच
तपसा निर्मिता राजन्स्वय़ं वैश्रवणेन सा |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
तपसा निय़तो देवो निधानं सर्वदेहिनाम् ||
१५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा प्राप्यते स्वर्गस्तपसा प्राप्यते यशः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
तपसा भगवान्विष्णुराविवेश च भूमिपम् |
१३० क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
तपसा भावितत्वाद्वा सर्वथैतत्सुदुष्करम् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा महता चापि दास्यामि तव तान्यहम् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
व्रह्मो उवाच
तपसा महता चैव सुकृतेन च कर्मणा |
४० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
च्यवन उवाच
तपसा महता युक्तं प्रदास्यति महाद्युते ||
१२ ग
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
तपसा महता युक्तः सोऽथ स्रष्टुं प्रचक्रमे |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
तपसा महता युक्तौ देवश्रेष्ठौ महाव्रतौ |
५९ क
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा महता राजन्प्राप्तवानृषिसत्तमः ||
३१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १२३
भीष्म उवाच
तपसा महदाप्नोति विद्यया चेति नः श्रुतम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
तपसा महदाप्नोति वुद्ध्या वै विन्दते महत् |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
तपसा ये च तीव्रेण त्यजन्तीह कलेवरम् |
६४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
नारद उवाच
तपसा योज्य सोऽऽत्मानं श्वेतद्वीपात्परं हि यत् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा योजय़ात्मानमुग्रेण भरतर्षभ ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
तपसा रूपसौभाग्यं रत्नानि विविधानि च |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
तपसा लभ्यते सर्वं विलापः किं करिष्यति ||
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
तपसा लभ्यते सर्वं सर्वं तपसि तिष्ठति ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०१
नारद उवाच
तपसा लोकमुख्येन प्रभावमहता मही ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
तपसा वा युधा वापि दुःखहेतुः स मे मतः |
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २८
युधिष्ठिर उवाच
तपसा वा सुमहता कर्मणा वा श्रुतेन वा |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०७
युधिष्ठिर उवाच
तपसा वा सुमहता कर्मणा वा श्रुतेन वा |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
तपसा वा सुमहता विद्यानां पारणेन वा |
९ क