वन पर्व
अध्याय
१२८
लोमश उवाच
वपाय़ां हूय़मानाय़ां गन्धमाघ्राय़ मातरः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१२७
ऋत्विगु उवाच
वपाय़ां हूय़मानाय़ां धूममाघ्राय़ मातरः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
वपुः समीक्ष्य पृथ्वीशा दुःसमीक्ष्यं सुरैरपि ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
वपुरन्यदिवाकार्षुरुत्साहामर्षचेष्टितैः ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
वपुरावर्तमानेभ्यो वसुश्रेष्ठो महापथः |
११८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
वपुर्ह्यनुमिमीमस्ते मेघस्येव सविद्युतः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
वपुषा खं च भूमिं च व्याप्य वाय़ुरिवोद्यतः ||
७६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
वपुषा प्रतिजज्वाल मध्याह्न इव भास्करः ||
३९ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
वपुषा स्वर्गमाक्रम्य तिष्ठन्तीमर्कवर्चसम् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
४०
सूत उवाच
वपुष्टमा चापि वरं पतिं तदा; प्रतीतरूपं समवाप्य भूमिपम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
वपुष्मती चन्द्रशीता भद्रकाली च भारत ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२४९
कोटिकाश्य उवाच
वपुष्मती वोरगराजकन्या; वनेचरी वा क्षणदाचरस्त्री |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
गाव ऊचुः
वपुष्मत्यो वय़ं सर्वाः किमस्माकं त्वय़ानघे ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
गाव ऊचुः
वपुष्मन्त्यो वय़ं सर्वाः किमस्माकं त्वय़ाद्य वै |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
वपुष्मांस्तलघोषेण स्फोटय़ेदपि पर्वतान् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
वपुष्मान्मानकृद्वीरः प्रिय़ः सत्यपराय़णः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
वपुस्तेजश्च कीदृग्वै तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
वपूंषि च नरेन्द्राणां विगतानीव लक्षय़े |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
वपूंषि सर्वलोकस्य संहरन्निव सर्वथा ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
वपूंष्यपहरन्भासा धूमकेतुरिव स्थितः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
वप्राणां चैव कर्तारस्ते नराः स्वर्गगामिनः ||
९७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३५
वैशम्पाय़न उवाच
वप्रान्ते निष्प्रतीकारमाश्लिष्येदं कृतं महत् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
वभञ्ज च सहस्राणि दश राजन्महात्मनाम् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
वभञ्ज चैनां त्वरितो जानुन्यारोप्य भारत |
६२ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
वभञ्ज पृष्ठे सङ्क्षिप्य निष्पिष्य विननाद च ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
वभञ्ज वनवृक्षाणां शाखाः परमपुष्पिताः ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
वभञ्ज वलवान्राजा मन्यमानो वृकोदरम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
वभञ्जतुर्महावृक्षाँल्लताश्चाकर्षतुस्ततः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
वभञ्जतुर्महावृक्षानूरुभिर्वलिनां वरौ |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
वभञ्जुर्वहुशो राजंस्ते चाभज्यन्त संय़ुगे ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२०
वैशम्पाय़न उवाच
वभार चैतान्सञ्जातान्स्ववृत्त्या स्नेहविक्लवा ||
१९ ग
आदि पर्व
अध्याय
६५
मेनको उवाच
वभार यत्रास्य पुरा काले दुर्गे महात्मनः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
वभाषे प्रणतो वाक्यं वाष्पगद्गदय़ा गिरा ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
वभासे स रणोद्देशः कालसूर्यैरिवोदितैः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
वभुर्दशाशा न दिवं च पार्थिव; प्रभा च सूर्यस्य तमोवृताभवत् ||
६९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव कल्यः कौन्तेय़ः प्रहृष्टः साह्यकर्मणि ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
वभूव काञ्चनष्ठीवी यथार्थं नाम तस्य तत् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
वभूव किल धर्मात्मा मदनानुगतात्मवान् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
वभूव कृपय़ाविष्टो निःश्वसंश्च पुनः पुनः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०५
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव कृष्णा सर्वेषां पार्थानां वशवर्तिनी ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव कौरवेय़ाणां वलेन सुसमाकुलः ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
वभूव घोषस्तुमुलश्चमूनां; वातोद्धुतानामिव सागराणाम् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
वभूव घोषस्तुमुलश्चमूनां; वातोद्धुतानामिव सागराणाम् ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
वभूव च विशेषेण भीरूणां भय़वर्धिनी ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव चरतां हर्षः पुण्यतीर्थां सरस्वतीम् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
वभूव तत्कुलेय़ानां द्रव्यकार्यमुपस्थितम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
वभूव तत्र सैन्यानां शव्दः सुतुमुलो निशि ||
३५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव तदवाप्नोतु भोगांश्चेति व्यवस्थिताः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव तद्वनं घोरं स्तनय़ित्नुसघोषवत् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
वभूव तव तत्सैन्यं शङ्खशव्दसमीरितम् |
१८ क