विराट पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं प्रसमीक्ष्य पाण्डवं; विराटराडिन्दुमिवाभ्रसंवृतम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं महता जवेन; जय़द्रथः सगदं भीमसेनम् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं महता जवेन; शिखण्डिनं भीष्ममभिद्रवन्तम् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
तमापतन्तं महिषं दृष्ट्वा सेन्द्रा दिवौकसः |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं मातङ्गमम्वुदप्रतिमस्वनम् |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं विशिखं यमदण्डोपमत्विषम् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं विशिखैः षड्भिराहत्य सात्यकिः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन द्रौणिश्चिच्छेद साय़कम् |
६७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन परिघं घोरदर्शनम् |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं वेगेन पाण्डवं रथिनां वरम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं वेगेन प्रभिन्नमिव वारणम् |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन प्रभिन्नमिव वारणम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन प्रेरितं निशितं शरम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन रभसं पाण्डवर्षभम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन वैकर्तनमजिह्मगैः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं वेगेन शक्राशनिसमद्युतिम् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं संरव्धं शैनेय़स्य रथं प्रति |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सङ्क्रुद्धं दीप्तास्यमिव पन्नगम् |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
तमापतन्तं सङ्क्रुद्धं पुनरेव युय़ुत्सय़ा |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं समरे गजं गजपतिः स च |
४३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य कर्णो वैकर्तनो वृषः |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य केतुवर्माणमाहवे |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य क्रुद्धं परपुरञ्जय़म् |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७४
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य क्रुद्धो राजन्धनञ्जय़ः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य गजानीकेन संवृतम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य पाण्डवानां महारथम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य पाण्डवानां महारथाः |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य पुण्डरीकाक्षमाहवे |
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
१४०
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य भीमः प्रहरतां वरः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य मत्तवारणविक्रमम् |
४६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य मागधस्य गजोत्तमम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य राक्षसं घोरदर्शनम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य राक्षसः सुमहावलः |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य राजानं प्रति वेगितम् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य वज्रदत्तस्य वारणम् |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य वलवान्पाकशासनिः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१६८
गन्धर्व उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य वसिष्ठो भगवानृषिः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य वाणमिन्द्राशनिप्रभम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य विरूपाक्षं विभीषणम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य व्यादितास्यमिवान्तकम् |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य शूलहस्तं जिघांसय़ा |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य शैनेय़स्य रथं प्रति |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य संरव्धममितौजसम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सङ्क्रुद्धं भीमदर्शनम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सङ्क्रुद्धं भीमदर्शनम् |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सात्वतं युद्धदुर्मदम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सात्वतं रभसं रणे |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सहसा कालचक्रमिवोद्यतम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सहसा कालानलसमप्रभम् |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
तमापतन्तं सहसा घोररूपं विशां पते |
३५ क