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कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
तद्भवेद्वै तव मलं यद्यस्मान्न विमुञ्चसि ||
७१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
तद्भागिनेय़निधनं तत्त्वेनाचक्ष्व मे विभो |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
तद्भार्गवाय़ प्राय़च्छच्छक्रः परमसंमतम् ||
३७ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
तद्भावकृतसङ्कल्पो द्रौणिरेको व्यचिन्तय़त् ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
तद्भावभावी तद्वुद्धिस्तदात्मा तदपाश्रय़ः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२९
भीष्म उवाच
तद्भावभावे द्रव्याणि जीवन्पुनरुपार्जय़ेत् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
तद्भावस्तद्गतमनास्तन्निष्ठस्तत्पराय़णः |
७७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
तद्भावात्पुण्डरीकाक्षो दस्युत्रासाज्जनार्दनः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
तद्भाविताः स्पर्शने दर्शने य; स्तस्मै देवा गतिमिष्टां दिशन्ति ||
८४ ख
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
तद्भीममुत्सार्य जनं युद्धमासीदुपह्वरे |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
तद्भीमवेगं रुधिरौघवाहि; खड्गाकुलं क्षत्रिय़जीववाहि |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
भीम उवाच
तद्भीमसेनस्य वचो निशम्य; सुदुर्वचं भ्रातुरमित्रमध्ये |
६५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
तद्भीरुसन्त्रासकरं युद्धं समभवत्तदा |
६३ क
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
तद्भीष्मवाक्यं हितमीक्ष्य सर्वे; धनञ्जय़ाग्निं च विवर्धमानम् |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
तद्भुक्त्वैव तु स क्षिप्रं ततो वचनमव्रवीत् |
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
तद्भूतं सर्वभूतानामभावाय़ किलार्जुन |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
तद्भूतश्च ततः सर्वो भूतानां भवति प्रभुः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय ११२
ऋश्यशृङ्ग उवाच
तद्भूमिमासाद्य पुनः पुनश्च; समुत्पतत्यद्भुतरूपमुच्चैः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
तद्भूमिस्वामिपितृभिः श्राद्धकर्म विहन्यते ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
तद्भय़ं स च नः शोको भूय़ एवाभ्यवर्तत ||
६ ग
शल्य पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
तद्भय़ादपसर्पन्वै तस्मिन्कूपे पपात ह |
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
तद्भय़ादेव च जनो विसर्जय़ति तद्वनम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
तद्यथा पश्यमानानां सूतपुत्रं महारथम् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
तद्यथा रक्षणं कुर्यात्तथा शृणु महीपते ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
तद्यथा सुरभिः प्राह सममेवास्तु ते तथा |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
स्यूमरश्मिरु उवाच
तद्यथावद्यथान्याय़ं भगवान्प्रव्रवीतु मे ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय ९०
युधिष्ठिर उवाच
तद्यदा मन्यसे व्रह्मन्गमनं तीर्थदर्शने |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
तद्यदा मेघतो वारि पतितं भवति क्षितौ |
३८ क
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
तद्यदि त्वं विजानासि किं तद्व्रूहि सुमध्यमे |
७० क
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धं युय़ुधानस्य द्रोणस्य च महात्मनः ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धं सुमहच्चासीद्घोररूपं परन्तप |
५३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धं सुमहद्घोरमासीद्देवासुरोपमम् |
६२ क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवच्चित्रं घोररूपं च मारिष |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवत्तेषां कृतप्रतिकृतैषिणाम् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरं चित्ररूपं च भारत |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरं तुमुलं लोमहर्षणम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरं तुमुलं लोमहर्षणम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरं देवानां दानवैरिव |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरं वृद्धय़ोः सहसेनय़ोः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरं शरशक्तिसमाकुलम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्घोरमीक्षितृप्रीतिवर्धनम् |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्राजन्कर्णस्य वहुभिः सह ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमभवद्रौद्रं सौभद्रस्यारिभिः सह ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमासीत्तुमुलं प्रेक्षणीय़ं विशां पते |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमासीत्सुमहत्तय़ोस्तत्र पराक्रमे |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमासीत्सुमहत्तय़ोस्तत्र पराक्रमे ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
तद्युद्धमासीत्सुमहद्घोरं देवासुरोपमम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
तद्युधिष्ठिर गाङ्गेय़ं भीष्मं भीमपराक्रमम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
द्रोण उवाच
तद्युधिष्ठिर तुष्टोऽस्मि पूजितश्च त्वय़ानघ |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
तद्रक्ष एवमामन्त्र्य ज्वलितं जातवेदसम् |
२२ क