chevron_left  तमुत्थितमहंarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
तमुत्थितमहं दृष्ट्वा परं विस्मय़मागमम् |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
तमुत्पतन्तं जग्राह केशवो विनय़ानतः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
तमुत्पतन्तं वेगेन राजा दुर्योधनः स्वय़म् |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तमुत्पतन्तं शय़नादश्वत्थामा महावलः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय २८
सूत उवाच
तमुत्पत्यान्तरिक्षस्थं देवानामुपरि स्थितम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
तमुत्पथेन धावन्तमन्वधावं द्विजोत्तमम् |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
तमुत्सङ्गेन प्रतिजग्राह पृथा निय़ोगात्पुरुषोत्तमस्य वासुदेवस्य |
९१ क
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
तमुत्सवं रैवतके शोभय़ां चक्रिरे तदा ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १३१
श्येन उवाच
तमुत्सृज महीपाल कपोतमिममेव मे ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
व्यास उवाच
तमुत्सृज्य यथाशास्त्रं पृथिवीं सागराम्वराम् |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
तमुत्सृज्य रथं शत्रुं प्रदुद्राव दिशो दश ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
तमुत्सृष्टं तदा गर्भं राधाभर्ता महाय़शाः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
तमुत्स्मय़न्तं सम्प्रेक्ष्य मैत्रेय़ः कृष्णमव्रवीत् |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
तमुदधिनिभमाद्रवद्वली; त्वरिततरैः समभिद्रुतं परैः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५
भीष्म उवाच
तमुदारं महासत्त्वमतिमानुषचेष्टितम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
तमुदीक्ष्य तथाय़ान्तं सर्वे द्रोणपुरोगमाः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तमुदीर्णं तथा दृष्ट्वा शैनेय़ं कुरुपुङ्गवाः |
५३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
तमुदीर्यन्तमालोक्य राजा दुर्योधनस्ततः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
तमुद्धर्तुं न शक्ता वै सर्वे देवगणास्तदा |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतं महाघोरं परिघं तस्य सूतजः |
८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतं महावाहुं दुःशासनरथं प्रति |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतं रथेनैकमाशुकारिणमाहवे |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा कैलासमिव शृङ्गिणम् |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा कैलासमिव शृङ्गिणम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा कैलासमिव शृङ्गिणम् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा कैलासमिव शृङ्गिणम् |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा पाण्डवानां महारथम् |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा सशृङ्गमिव पर्वतम् |
७३ क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतगदं वीरं मेनिरे तत्र पाण्डवाः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतमहाचापं दृष्ट्वा ते व्यथिता नृपाः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतमहाचापं निशाम्य व्यथिता नृपाः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यतमुदीक्ष्याथ महेष्वासं महावलम् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१९
भीष्म उवाच
तमुद्यन्तं द्विजश्रेष्ठं वैनतेय़समद्युतिम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
तमुद्यम्य महाखड्गं चर्म चाथ पुनर्वली ||
६० ख
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
तमुद्यम्य महावाहुर्भ्रामय़ामास वीर्यवान् |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
तमुद्वह महावाहो यथाशक्ति यथावलम् |
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
तमुद्वीक्ष्य गदाहस्तं ततस्ते गजसादिनः |
३० क
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
तमुद्वीक्ष्य तथाय़ान्तं कौन्तेय़ः परवीरहा |
५ क
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
तमुन्मथ्य सुशर्मा तु रुदतीं वधुकामिव |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
तमुन्मथ्य हय़श्रेष्ठं यादवानां कुमारकाः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
तमुपक्रम्य राजर्षिं धर्मात्मानमरिन्दमाः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
तमुपस्थितमाज्ञाय़ रथं दिव्यं महामनाः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
तमुपस्थितमासीनं ज्ञात्वा स मुनिसत्तमम् |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
उत्तङ्क उवाच
तमुपाकृत्य गच्छेय़मनुज्ञातस्त्वय़ा विभो ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११३
नारद उवाच
तमुपागम्य विप्रः स हर्यश्वं गालवोऽव्रवीत् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ११५
नारद उवाच
तमुपागम्य स मुनिर्न्याय़तस्तेन सत्कृतः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
तमुपादाय़ गच्छेय़ं यथेष्टं देवरूपिणम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः पीवानमपश्यत् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः पीवानमेवापश्यत् |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
३७ क