chevron_left  तमुपाध्याय़ःarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
५८ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
९८ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रत्युवाच |
१६५ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः प्रेषय़ामास |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ः सन्दिदेश |
८० क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़स्तथापि पीवानमेव दृष्ट्वा पुनरुवाच |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़स्तथापि पीवानमेव दृष्ट्वोवाच |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपाध्याय़ोऽव्रवीत् |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
तमुपासीनमद्यान्यं पश्य पाण्डव पाण्डवम् ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
तमुपासीनमद्यान्यं पश्य भारत भारतम् ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
धृतराष्ट्र उवाच
तमुपाय़ं न पश्यामि जीय़ेरन्येन पाण्डवाः |
६ क
वन पर्व
अध्याय ९८
लोमश उवाच
तमुपाय़ं प्रवक्ष्यामि यथा वृत्रं वधिष्यथ |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६६
युधिष्ठिर उवाच
तमुपाय़ं यथान्याय़ं श्रोतुमिच्छामि भारत ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुपेत्यापश्यदुत्तङ्क आसीनम् |
१०६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
तमुलूकस्तथा विद्ध्वा वासुदेवमताडय़त् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
तमुवाच कलिर्भीतो वेपमानः कृताञ्जलिः |
३० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
तमुवाच किलोद्विग्नः सञ्जय़ो वदतां वरः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
तमुवाच कृपाविष्टो भृगुर्धर्मभृतां वरः |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय २५
सूत उवाच
तमुवाच खगश्रेष्ठं तत्र रोहिणपादपः |
३१ क
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
तमुवाच घृणी राजा धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
तमुवाच ततः कर्णः शापभीतः प्रसादय़न् |
२६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच ततः कुन्ती परिष्वज्य महाभुजम् |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
तमुवाच ततः पादौ कराभ्यां पीड्य पाण्डवः |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच ततः पृष्टो मणिपूरपतिस्तदा |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच ततः प्रीतः स द्विजः प्रहसन्निव |
३६ क
वन पर्व
अध्याय २४६
व्यास उवाच
तमुवाच ततः प्रीतः स मुनिर्मुद्गलं तदा |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २९
भीष्म उवाच
तमुवाच ततः शक्रः पुनरेव महाय़शाः |
२ क
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
तमुवाच ततो ज्येष्ठो भ्राता सप्रणय़ं वचः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
तमुवाच ततो दृष्ट्वा पर्वतं नारदस्तदा |
३५ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
तमुवाच ततो राजा त्वरितो गमने तदा |
२३ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
तमुवाच ततो राजा दीर्घप्रज्ञो युधिष्ठिरः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
तमुवाच ततो राजा धार्तराष्ट्रो महामनाः |
१० क
वन पर्व
अध्याय ११५
अकृतव्रण उवाच
तमुवाच ततो राजा व्राह्मणं संशितव्रतम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २२
स्त्र्यु उवाच
तमुवाच ततो विप्रः प्रतिगृह्णीष्व मे सुताम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
तमुवाच ततो व्रह्मा देवैः शक्रमुखैर्वृतः |
४० क
सभा पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच तदा भीष्मो द्रोणो विदुर एव च |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच नतं मूर्ध्ना देवानामादिरव्ययः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
तमुवाच नतं मूर्ध्ना देवानामादिरव्ययः ||
१० ग
वन पर्व
अध्याय ६४
वृहदश्व उवाच
तमुवाच नलो राजा मन्दप्रज्ञस्य कस्यचित् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
तमुवाच पिता भूय़ः प्रहृष्टो मनुजाधिप |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच पृथा राजन्रहस्युक्ता सती सदा ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच प्रसन्नात्मा गोविन्दो जनमेजय़ |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
तमुवाच भृगुश्रेष्ठः सरोषः प्रहसन्निव |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १६२
गन्धर्व उवाच
तमुवाच महातेजा विवस्वान्मुनिसत्तमम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच महातेजा व्यासो वेदविदां वरः |
५ क
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
तमुवाच महातेजाः कपिलो मुनिपुङ्गवः |
२५ क