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वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच महातेजाः प्रहस्य वृषभध्वजः |
६१ क
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
तमुवाच महात्मानं मानय़ञ्श्लक्ष्णय़ा गिरा ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२०
भीष्म उवाच
तमुवाच महादेवः सान्त्वपूर्वमिदं वचः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७८
भीष्म उवाच
तमुवाच महादेवो गच्छ शिश्नेन मोक्षणम् |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
तमुवाच महाप्राज्ञो जरत्कारुर्महातपाः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
तमुवाच महाभागो भरद्वाजः प्रतापवान् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
तमुवाच महामन्युर्जमदग्निर्महातपाः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच महाराज भूमिं भूमिपतिर्विभुः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
तमुवाच महावाहुर्जामदग्न्यः प्रतापवान् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच महावाहुर्भीमसेनो भुजङ्गमम् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच स कौन्तेय़ः पश्याम्येनं वनस्पतिम् |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
तमुवाच स चण्डालो महर्षे शृणु मे वचः |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच समागम्य भर्तारमकुतोभय़म् |
६ क
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाच सुकेशान्ता कीचकस्य मय़ा कृतः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत |
१० क
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
तमुवाचाथ काकुत्स्थः सम्भ्रमेष्वप्यसम्भ्रमः ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
तमुवाचाथ गत्वा स नृपतिं सत्यविक्रमम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाचाथ गाङ्गेय़ ऋषभः सर्वधन्विनाम् |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाचाथ गान्धारी मैवं पुत्र शृणुष्व मे |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
तमुवाचाथ राजर्षिर्द्विजं मित्रसहस्तदा |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाचाथ राजा स सान्त्वपूर्वमिदं वचः ||
१६ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ९६
कण्व उवाच
तमुवाचाथ स मुनिर्गच्छावः सहिताविति |
४ क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
तमुवाचाथ सक्रोधो रावणः परिभर्त्सय़न् |
८ क
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
तमुवाचाथ सावित्री रजनी व्यवगाहते |
७१ क
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
तमुवाचाथ सावित्री श्वः फलानीह नेष्यसि |
१०२ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाचानवद्याङ्गी भर्तारं दीप्ततेजसम् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाचापसर्पेति द्रोणोऽप्रीतमना इव |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय २९
सूत उवाच
तमुवाचाव्ययो देवो वरदोऽस्मीति खेचरम् |
१३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
तमुवाचाव्ययो व्रह्मा वचोभिः शमय़न्निव ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय २९
सूत उवाच
तमुवाचेन्द्रमाक्रन्दे गरुडः पततां वरः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
तमुवाचैवमुक्तस्तु धर्मराण्मधुसूदनम् |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
तमुवाचोत्तङ्कः |
१०८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
तमुवाचोरगपतेर्दुहिता प्रहसन्त्यथ |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
तमूचुः सम्प्रय़ास्यन्तं सैन्यसुग्रीववाहनम् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
तमूचुः सैनिकाः सर्वे न विद्मोऽपकृतं वय़म् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
तमूचुरथ देवास्ते ते चैव परमर्षय़ः |
१०९ क
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
तमूचुरमृतार्थाय़ निर्मथिष्यामहे जलम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
तमूचुर्विवुधाः सर्वे ते चैव परमर्षय़ः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
तमूचुश्चोदितास्तेन स्वमतानि मनीषिणः ||
२३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
तमूचुस्ते ततो वाक्यं यमुनामवगाहितुम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैश्रवण उवाच
तमूर्ध्ववाहुं दृष्ट्वा तु सूर्यस्याभिमुखं स्थितम् |
५३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
तमूर्ध्ववाहुं निश्चेष्टं दृष्ट्वा हविरुपस्थितम् |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तमूहुः सारथेर्वश्या वल्गमाना हय़ोत्तमाः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
तमूहुः सारथेर्वश्याः सैन्धवाः साधुवाहिनः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
तमूहुर्जवना दान्ता विकुर्वाणा हय़ोत्तमाः |
६५ क
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
तमृते पाण्डवश्रेष्ठं वनं न प्रतिभाति मे |
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
तमृते पुण्डरीकाक्षं काम्यकं नातिभाति मे ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
तमृते पुरुषव्याघ्रं नष्टसूर्यमिदं वनम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
तमृते पुरुषव्याघ्रं पाण्डवा जनमेजय़ |
७ क
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
तमृते फल्गुनं वीरं न लभे काम्यके धृतिम् |
२२ क