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शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
केशमांसास्थिसङ्कीर्णा स गच्छेत्परमां गतिम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
केशलोमनखान्वाप्य वानप्रस्थो मुनिस्ततः |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
केशवं केशिहन्तारमप्रमेय़पराक्रमम् |
२ क
सभा पर्व
अध्याय ४१
शिशुपाल उवाच
केशवं तच्च ते भीष्म न कश्चिदनुमन्यते ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
केशवं मधुरैर्वाक्यैः कालय़ुक्तैरमर्षितम् ||
३० ग
भीष्म पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
केशवं वहु मेने स पाण्डवांश्च महारथान् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
केशवः परमं तेजः सर्वलोकपितामहः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३२
भीष्म उवाच
केशवः परिपप्रच्छ भगवन्कान्नमस्यसि ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
केशवः सर्वभूतानां चक्राणां च सुदर्शनम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
केशवः सात्यकिश्चैव रथेनैकेन जग्मतुः |
६९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
केशवप्रहितैरश्वैः श्वेतैः काञ्चनभूषणैः |
८७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
केशवस्तु तदा वाहू विधुन्वन्रणमूर्धनि |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
केशवस्य च सौहार्दे कीर्त्यमानेऽर्जुनं प्रति |
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
केशवस्य तु तद्वाक्यं कर्णः श्रुत्वा हितं शुभम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
केशवस्य यथातत्त्वं सुप्रीतो भव केशवे ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
केशवस्य वचः श्रुत्वा किरीटी श्वेतवाहनः |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
केशवस्य वचः श्रुत्वा त्वरमाणोऽथ दारुकः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
केशवस्य वचः श्रुत्वा प्रोवाच भरतर्षभ ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
केशवस्य वचः श्रुत्वा वीभत्सुरपि राक्षसम् |
५३ क
वन पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
केशवस्याग्रजो वापि नीलवासा मदोत्कटः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
केशवस्यापि यद्वाक्यं तत्सर्वमवधारितम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
केशवार्जुनय़ो राजन्समरे प्रेक्षमाणय़ोः ||
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
जनमेजय़ उवाच
केशवार्जुनय़ोः का नु कथा समभवद्द्विज ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
केशवार्जुनय़ोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः ||
७६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
केशवार्जुनय़ोर्मूर्ध्नि प्राह वाक्चाशरीरिणी ||
१४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
केशवार्जुनय़ोर्वाक्यं निशम्य भरतर्षभः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
केशविक्रय़िका राजन्विषविक्रय़िकाश्च ये |
७२ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
केशवे तु तदा याते धर्मराजो युधिष्ठिरः |
३९ क
सभा पर्व
अध्याय ३९
शिशुपाल उवाच
केशवेन कृतं यत्तु जरासन्धवधे तदा |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
केशवेन गृहीतः स दक्षिणे विभुना भुजे |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
केशवेन च दुर्धर्षो वलदेवेन चाभिभूः ||
६२ ख
विराट पर्व
अध्याय ४०
उत्तर उवाच
केशवेनापि सङ्ग्रामे साक्षादिन्द्रेण वा समम् ||
८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
केशवेनैवमुक्तस्तु पाण्डवः परवीरहा |
४ क
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
केशवेह विजानीष्व यत्त्वां पितृसखोऽव्रवीत् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
केशवो भरतश्रेष्ठ भगवानीश्वरः प्रभुः |
५ क
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
केशशूलाः स्त्रिय़श्चापि भविष्यन्ति युगक्षय़े ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
केशशूलाः स्त्रिय़ो राजन्भविष्यन्ति युगक्षय़े ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
केशशैवलकल्माषां भीरूणां कश्मलावहाम् |
१२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
केशश्मश्रून्धारय़तामग्र्या भवति सन्ततिः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
केशाकेशिसमालग्ना न शेकुश्चेष्टितुं जनाः ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
केशाकेश्यभवद्युद्धं रक्षसां वानरैः सह |
३६ क
विराट पर्व
अध्याय ८
द्रौपद्यु उवाच
केशाञ्जानाम्यहं कर्तुं पिंषे साधु विलेपनम् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
केशानभ्युक्ष्य वै तस्मिन्पूतो भवति भारत ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
केशान्निय़म्य यत्नेन निःश्वसन्नुरगो यथा |
५ क
विराट पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
केशान्मुक्त्वा तु सुश्रोणी संरम्भाल्लोहितेक्षणा ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
केशावपन्नमाधूतमारुग्णमपि यद्भवेत् |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
केशाश्चास्याभवन्दीर्घा रवेरंशुसमप्रभाः ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
उमो उवाच
केशास्थिकलिले भीमे कपालघटसङ्कुले |
१४ क
मौसल पर्व
अध्याय ७
वसुदेव उवाच
केशिनं यस्तु कंसं च विक्रम्य जगतः प्रभुः |
९ क
वन पर्व
अध्याय ७३
वृहदश्व उवाच
केशिनीं श्लक्ष्णय़ा वाचा रुदती पुनरव्रवीत् ||
१९ ख