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शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
ससर्ज मार्गेण च तां परेण; वधाय़ मद्राधिपतेस्तदानीम् ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज यत्र भगवाँल्लोकाँल्लोकपितामहः |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज यत्स्वतपसा भौवनो भुवनप्रभुः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज रसपांसूनां राशय़ः पर्वतोपमाः ||
७९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज रोषात्सोमाय़ स चोडुपतिमाविशत् ||
५५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
ससर्ज वाणान्भरतर्षभोऽपि; शतंशतानेकवदाशुवेगान् ||
२४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
ससर्ज शिक्षास्त्रवलप्रय़त्नै; स्तथा यथा प्रावृषि कालमेघः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
ससर्ज शीघ्रं प्रतिपीडय़न्गजं; गुरोः सुताय़ाद्रिपतीश्वरो नदन् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
ससर्ज शूलं क्रोधेन प्रज्वलन्तं मुहुर्मुहुः ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय २७२
मार्कण्डेय़ उवाच
ससर्जेन्द्रजितः क्रोधाच्छालस्कन्धममित्रजित् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १९६
कर्ण उवाच
ससहाय़ोऽसहाय़श्च सर्वं सर्वत्र विन्दति ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
ससहाय़ोऽसहाय़ो वा यावज्जीवं तथा भवेत् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
ससहाय़ोऽसहाय़ो वा राष्ट्रमागम्य भूमिपः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
युधिष्ठिर उवाच
ससागरः सगगनः सशैलः सवलाहकः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भीष्म उवाच
ससागरः सगगनः सशैलः सवलाहकः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
ससागरवना घोरा पृथिवी सचराचरा |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११०
गालव उवाच
ससागरवनामुर्वीं सशैलवनकाननाम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
ससागरवनोद्देशा सग्रामनगराकरा ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
ससाङ्ख्यधारणं चैव विदित्वा मनुजर्षभ |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
ससात्यकीन्विषहेत प्रजेतुं; लव्ध्वापि देवान्सचिवान्सहेन्द्रान् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
ससाद युधि पाञ्चाल्यो व्यपाश्रय़त च ध्वजम् ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
ससादिनो हय़ा राजंस्तत्र तत्र निषूदिताः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ३७
कृश उवाच
ससार मृगमेकाकी विद्ध्वा वाणेन पत्रिणा ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
ससार यज्ञिय़ं वीरो विधिवत्स विशां पते |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
ससार वाणासनभृत्सखड्गो हंसवत्तदा ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
ससार स मृगं विद्ध्वा वाणेन नतपर्वणा ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
ससारथींस्तदा वाणैरभ्राणीवानिलोऽवधीत् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
ससाराभिमुखः शूरः शार्दूल इव कुञ्जरम् ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
ससाराभिमुखस्तूर्णं शार्दूल इव कुञ्जरम् ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
ससारोत्तरतः पूर्वं तन्निवोध महीपते ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
ससाय़कं धनुः कृत्वा भीमं विव्याध मारिष |
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
ससिंहनादाश्च वभूवुरुग्राः; सर्वेष्वनीकेषु ततः कुरूणाम् ||
१०४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
ससिंहनादौ वभतुर्नरोत्तमौ; शशाङ्कसूर्याविव मेघसम्प्लवे ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
ससुरासुरगन्धर्वं सय़क्षोरगराक्षसम् |
१३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
ससुरासुरगन्धर्वाः सय़क्षोरगराक्षसाः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
ससुरासुरगन्धर्वानिमाँल्लोकान्द्विजोत्तम |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
ससुहृत्सानुवन्धश्च स्वर्गं गन्ताहमच्युत |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
ससूतान्भीमधनुषो भीमो निन्ये यमक्षय़म् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
ससूताश्वध्वजं तस्य स्यन्दनं तं च मारिष |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
ससूतैर्हतसूतैश्च भग्नाक्षैश्चैव मारिष |
१०१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
ससूतैर्हतसूतैश्च रथैः स्तीर्णाभवन्मही ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
ससृजुर्वाणसङ्घांश्च शस्त्रसङ्घांश्च मारिष ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
ससृजे तत्र वापीं तां मृतानां जीवनीं प्रभो ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
ससृजे द्रौणिराय़स्तः संस्तभ्य च रणेऽर्जुनम् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
ससृजे नाभितः पुत्रं व्रह्माणममितप्रभम् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
ससेनं ससुतं वीरं संससज्जतुराहवे ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
ससेनास्तेऽभ्यवर्तन्त द्रोणमेव महाद्युतिम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
ससैन्यं समरे क्रुद्धो राक्षसः समभिद्रवत् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
ससैन्यः सेतुना तेन मासेनैव नराधिप ||
५० ख
सभा पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
ससैन्याः प्रय़युः सर्वे धर्मराजाभिपूजिताः ||
८ ख