शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
तथा च मां प्रवर्तन्तं गर्हय़स्यलकाधिप ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
७२
दमय़न्त्यु उवाच
तथा च मे मनस्तुष्टिर्हृदय़स्य च निर्वृतिः ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
तथा च रथिनं क्रुद्धं विकिरन्तं शरान्वहून् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७७
भीष्म उवाच
तथा च वर्तते दृष्ट्वा लोकेऽस्मिन्मुक्त एव सः ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
तथा च वलवान्राजा जरासन्धो दुरासदः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा च सर्वे सर्वं तत्पश्याम इति कुत्सिताः ||
५७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
तथा चकार सततं त्वमप्येवं समाचर ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तथा चकाशे निशि पर्वतो यथा; दवाग्निना प्रज्वलितौषधिद्रुमः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
तथा चन्द्रोदय़ोद्धूतः स वभूव वलार्णवः ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
तथा चम्पां समासाद्य भागीरथ्यां कृतोदकः |
१४२ क
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
तथा चरति तिग्मांशुः परेण भुवनं सदा |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
तथा चरन्तं सङ्ग्रामे भृशं समरदुर्जय़म् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
तथा चरन्तं सङ्ग्रामे सर्वतो व्यकिरञ्शरैः ||
७८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तथा चरन्तं समरे तपन्तमिव भास्करम् |
३३ ख
विराट पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा चरन्तीं पाञ्चालीं सुदेष्णाय़ा निवेशने |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
तथा चारवलं चैव परस्परसमं नृप |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
तथा चित्ररथश्चैव भ्रातृव्यसनकर्षिताः ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
तथा चित्राङ्गदा देवी कौरव्यस्यात्मजापि च |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
तथा चिन्तय़तस्तस्य भूय़ एव पितामहः |
७१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
तथा चिरोषितं चापि सम्प्रत्यागतमेव च |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
तथा चेदं ददाम्यद्य निय़मेन सुतोषितः ||
४८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा चेदिपतेर्भ्राता शरभो भरतर्षभ |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
तथा चेमौ महीपाल भजेऽहं चरणौ तव |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
तथा चैव विधत्स्वात्र यथा श्रेय़ोऽनुपश्यसि ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तथा जग्राह गाङ्गेय़ः शरधाराः शिखण्डिनः ||
१०० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तथा जज्वाल पुत्रस्ते पाण्डवान्वै विनिर्दहन् ||
९४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तथा जज्वाल भीष्मोऽपि दिव्यान्यस्त्राण्युदीरय़न् ||
६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
तथा जनपदश्चैव पुरं च कुरुनन्दन |
६३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६
धृतराष्ट्र उवाच
तथा जनपदानां च ये चान्ये भूमिमाश्रिताः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
तथा ज्येष्ठः सुतो रैभ्यं हिंस्याच्छीघ्रमनागसम् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तथा ज्वलन्तमस्त्राग्निं गुरुं सर्वधनुष्मताम् |
९७ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
तथा जय़द्रथं दृष्ट्वा गृहीतं सव्यसाचिना ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
व्रह्मो उवाच
तथा तं पुरुषं विश्वं परमं सुमहत्तमम् |
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तं पुरुषं विश्वं व्याख्यास्यामि गुणाधिकम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
तथा तं विप्रकुर्वाणं रथय़ूथपय़ूथपम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
तथा तं सम्प्रवक्ष्यामि भूतग्रामं स्वकर्मजम् ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
तथा तत्कुरु भद्रं ते यद्यस्ति पितृगौरवम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
तथा तत्कृतवान्द्रोण आत्मकीर्त्यनुरक्षणात् ||
५२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तत्कृतवान्वह्निरभ्यनुज्ञाय़ शार्ङ्गकान् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९८
मनुरु उवाच
तथा तत्परमं व्रह्म विमुक्तं प्रकृतेः परम् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
तथा तत्पाण्डवं सैन्यं कर्णमासाद्य दीर्यते ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
तथा तत्पौरुषं राजंस्तावकानां महात्मनाम् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
८५
यय़ातिरु उवाच
तथा तत्र क्षीणपुण्यं मनुष्यं; त्यजन्ति सद्यः सेश्वरा देवसङ्घाः ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा तत्रोपविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
तथा तथा तदस्त्रं वै व्यवर्धत जनाधिप ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०९
सुपर्ण उवाच
तथा तथा द्विजश्रेष्ठ प्रविलीय़ति गालव ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
तथा तथा भवन्त्येते कौरवा वलवत्तराः ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
यम उवाच
तथा तथा मे त्वय़ि भक्तिरुत्तमा; वरं वृणीष्वाप्रतिमं यतव्रते ||
५० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२०
नारद उवाच
तथा तथा वसुमतीं त्यक्त्वा राजा दिवं यय़ौ ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
तथा तथा विजानाति विज्ञानं चास्य रोचते ||
९ ग