शान्ति पर्व
अध्याय
५१
वासुदेव उवाच
तज्ज्ञातिशोकोपहतश्रुताय़; सत्याभिसन्धाय़ युधिष्ठिराय़ |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
तज्ज्ञैर्न पूज्यसे नूनं तेनासि हरिणः कृशः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
तज्ज्याय़ः सर्वधर्मेभ्यः स धर्मः पर उच्यते ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
तज्ज्योतिः स्तूय़मानं स्म व्रह्माणं प्राविशत्तदा ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
तडागं सर्वतोभद्रं पद्मसौगन्धिकं महत् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागं सुकृतं देशे क्षेत्रमेव महाश्रय़म् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागं सुकृतं यस्य वसन्ते तु महाश्रय़म् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागकृद्वृक्षरोपी इष्टय़ज्ञश्च यो द्विजः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागदस्य तत्सर्वं प्रेत्यानन्त्याय़ कल्पते ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
तडागमिव धाराभिर्यथा प्रावृषि तोय़दा ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागानां च वक्ष्यामि कृतानां चापि ये गुणाः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
तडागानि च रम्याणि वृहन्ति च महान्ति च ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागानि च सर्वाणि दिशन्ति श्रिय़मुत्तमाम् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
तडागान्युदपानानि स्रोतांसि च सरांसि च |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तडागे यस्य गावस्तु पिवन्ति तृषिता जलम् |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
तण्डिः प्रोवाच शुक्राय़ गौतमाय़ाह भार्गवः |
१६६ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
तत आचष्ट सा तस्मै वान्धवानां हितैषिणी |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
तत आचार्यपाञ्चाल्यौ युय़ुधाते परस्परम् |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
तत आज्ञापय़ामास पाण्डवोऽरिनिवर्हणः |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
तत आज्ञापय़ामास स राजा राजसत्तमः |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
११६
अकृतव्रण उवाच
तत आदाय़ परशुं रामो मातुः शिरोऽहरत् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
तत आदाय़ विप्रर्षे प्रतिगृह्य धनं वहु |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
तत आदित्यमुद्यन्तमुपातिष्ठत माधवः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
तत आधाय़ गर्भं तमगमद्वनमेव सः |
२२ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
तत आनाय़यामास कर्णस्य सपरिच्छदम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
११०
लोमश उवाच
तत आनाय़यामास वारमुख्या महीपतिः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१९४
वैशम्पाय़न उवाच
तत आनाय़्य तान्सर्वान्मन्त्रिणः सुमहाय़शाः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
तत आनीय़तां कृष्णौ सशरं धनुरुत्तमम् ||
६५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
तत आमन्त्र्य कौन्तेय़ाञ्शल्यो मद्राधिपस्तदा |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
तत आमन्त्र्य तं विप्रं कुन्ती राजन्सुतैः सह |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
तत आरण्यकं पर्व किर्मीरवध एव च |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
तत आविध्य तं खड्गं सात्वताय़ोत्ससर्ज ह ||
४० ग
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
तत आश्रमवासाक्यं पर्व पञ्चदशं स्मृतम् |
२१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
तत आश्लिष्य स प्रेम्णा मूर्ध्नि चाघ्राय़ पाण्डवम् |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
तत आश्वासय़त्कृष्णां प्रविमुच्य विशां पते |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
तत आश्वासय़ामास पुत्राधिभिरभिप्लुताम् |
८९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
तत आसादय़ामास पुरोधा द्रुपदं पुरे |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
तत आसीत्परामर्दस्तुमुलः शोणितोदकः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
१८७
वैशम्पाय़न उवाच
तत आहूय़ पाञ्चाल्यो राजपुत्रं युधिष्ठिरम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
तत आहूय़ पुत्रं स्वं जरत्कारुर्भुजङ्गमा |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
तत आहूय़ राजानं सृञ्जय़ं शुभदर्शनम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
तत आहूय़ वैदेहं मुनिर्वचनमव्रवीत् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
तत आहूय़ सोतथ्यं ददावत्र यशस्विनीम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
तत आय़व्ययौ दृष्ट्वा समौ सममतिर्द्विजः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
तत आय़व्ययौ दृष्ट्वा समौ सममतिर्द्विजः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
तत आय़व्ययौ दृष्ट्वा समौ सममतिर्द्विजः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
तत आय़व्ययौ पूर्णौ तस्मै राजा न्यवेदय़त् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
तत आय़व्ययौ पूर्णौ ताभ्यां राजा न्यवेदय़त् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
९६
लोमश उवाच
तत आय़व्ययौ पूर्णौ तेषां राजा न्यवेदय़त् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२८९
वैशम्पाय़न उवाच
तत आय़ाति राजेन्द्र साय़े रात्रावथो पुनः ||
२ ख