अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
तस्य मध्यगतं चापि तेजसः पाण्डुनन्दन |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भृगुरु उवाच
तस्य मध्ये स्थितो लोकान्सृजते जगतः प्रभुः ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
तस्य मन्ये मतिः पूर्वं सर्वज्ञस्य महात्मनः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
तस्य मर्मच्छिदं घोरं सुमित्रोऽमित्रकर्शनः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
तस्य महता कालेन गुरुः परितोषं जगाम |
८२ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
तस्य मां तनय़ां सर्वे जानीत द्विजसत्तमाः ||
७२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४२
हिडिम्वो उवाच
तस्य मां राक्षसेन्द्रस्य भगिनीं विद्धि भामिनि |
६ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
तस्य मां विद्धि तनय़ां भगवंस्त्वामुपस्थिताम् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
तस्य माता महाराज राजानं वरवर्णिनी |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
तस्य माताव्रवीद्वाक्यं वरुणं पुत्रकारणात् |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तस्य माद्रीसुतः केतुं धनुः सूतं हय़ानपि |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
तस्य माद्रीसुतः केतुं सशरं च शरासनम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
तस्य माद्रीसुतश्चापं द्विधा चिच्छेद साय़कैः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
तस्य मामचलश्रेष्ठ विद्धि भार्यामिहागताम् ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
तस्य मामवगच्छध्वं भार्यां राजर्षभस्य वै |
७९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
तस्य मार्गं परिहरन्द्रुतं गच्छ यतव्रतम् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य मार्गादपाक्रामन्सर्वभूतानि गच्छतः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
तस्य मार्गोऽय़मद्वैधः सर्वत्यागस्य दर्शितः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
तस्य माहात्म्ययोगेन योगेनात्मन एव च |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
तस्य माय़ामय़ो वीर रथो हेमपरिष्कृतः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०६
गुरुरु उवाच
तस्य माय़ाविदग्धाङ्गा ज्ञानभ्रष्टा निराशिषः |
३ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
तस्य माय़ाविनो माय़ा दग्धाः पाण्डवतेजसा ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
तस्य मुष्टिहतस्याजौ पाण्डवेन वलीय़सा |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
तस्य मूर्धा समभवद्द्यौः सनक्षत्रतारका |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
तस्य मूर्धानमालम्व्य गतसत्त्वस्य देहिनः |
४७ क
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य मूर्धानमासाद्य पफालासिवरो हि सः ||
४१ ग
विराट पर्व
अध्याय
४८
अर्जुन उवाच
तस्य मूर्ध्नि पतिष्यामि तत एते पराजिताः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य मूर्ध्नि शितं खड्गमसक्तं पर्वतेष्वपि |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
तस्य मूलं समाश्रित्य कृत्वा शतमुखं विलम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
तस्य मूलं सुसंसिक्तं वरचन्दनवारिणा |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१८४
सरस्वत्यु उवाच
तस्य मूलात्सरितः प्रस्रवन्ति; मधूदकप्रस्रवणा रमण्यः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य मे तप्ततपसो निगृहीतेन्द्रिय़स्य च |
२२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
५
अश्वत्थामो उवाच
तस्य मे त्वरमाणस्य कुतो निद्रा कुतः सुखम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४९
व्राह्मण उवाच
तस्य मे प्रश्नमुत्पन्नं छिन्धि त्वमनिलाशन |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
तस्य मे रोचसे राजन्क्षुधितस्येव भोजनम् ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
तस्य मे सर्वकार्येषु कार्यमेतन्मतं सदा |
८५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
तस्य मे सारथिः शल्यो भवत्वसुकरः परैः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य मेघप्रकाशस्य शस्त्रैस्तैः शोभितस्य च |
५ क
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्य मेघोपमं सैन्यमापतद्भीमदर्शनम् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
तस्य मेऽभ्यधिकं शस्त्रं सर्वोपकरणानि च |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१३
वासुदेव उवाच
तस्य मोक्षरतिस्थस्य नृत्यामि च हसामि च |
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
तस्य मौर्वीं च मुष्टिं च स्थानं चालक्ष्य पाण्डवः |
७६ क
विराट पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य मौर्वीमपाकर्षच्छूरः सङ्क्रन्दनो युधि ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य यज्ञस्य सम्पत्त्या तुतुषुर्देवता अपि |
१० क
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य यज्ञस्य समय़ः स्वाधीनः क्षत्रसम्पदा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
तस्य यज्ञो महानासीदश्वमेधो महात्मनः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
तस्य यावन्ति शस्त्राणि त्वचं भिन्दन्ति संय़ुगे |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
तस्य युद्धार्थिनो दर्पं युद्धे नाशय़ितास्म्यहम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
तस्य यो वहते भारं सर्वलोकसुखावहम् |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्य योधा महावीर्या नानादेशसमागताः |
२ क