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शान्ति पर्व
अध्याय २२१
भीष्म उवाच
तस्या देवर्षिजुष्टाय़ास्तीरमभ्याजगाम ह ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
तस्या द्वारं समासाद्य द्वारपालैर्निवारितः |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६
नारद उवाच
तस्या द्वारं समासाद्य न्यसेथाः कुणपं क्वचित् |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या नद्यास्तु तीरे वै सर्वे देवाः सवासवाः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
मन्त्रिणः ऊचुः
तस्या नाम वृषादर्भिर्यातुधानीत्यथाकरोत् ||
४० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या निपेततुर्दग्धौ करौ तैरश्रुविन्दुभिः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय १५२
भीम उवाच
तस्या मामनवद्याङ्ग्या धर्मपत्न्याः प्रिय़े स्थितम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ६
सूत उवाच
तस्या मार्गं सृतवतीं दृष्ट्वा तु सरितं तदा |
७ क
वन पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या यमौ रक्ततलौ पादौ पूजितलक्षणौ |
२० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तस्या रजन्यास्त्वर्धेन पाण्डवानां महद्वलम् |
१२५ क
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्या रुदत्या भामिन्या दीर्घा वेणी सुसंय़ता |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ७२
केशिन्यु उवाच
तस्या रुदन्त्याः सततं तेन दुःखेन पार्थिव |
२० क
वन पर्व
अध्याय ६७
वृहदश्व उवाच
तस्या रुदन्त्याः सततं तेन शोकेन पार्थिव |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ६६
शकुन्तलो उवाच
तस्या रूपगुणं दृष्ट्वा स तु विप्रर्षभस्तदा |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या रूपेण वेषेण श्लक्ष्णय़ा च तथा गिरा |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
तस्या रूपेण शीलेन कुलेन वपुषा श्रिय़ा |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
व्रह्मो उवाच
तस्या लोकाः सहस्राक्ष सर्वकामसमन्विताः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
भीष्म उवाच
तस्या वक्त्राच्च्युतः फेनः क्षीरमिश्रस्तदानघ |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
महेश्वर उवाच
तस्या वत्समुखोत्सृष्टः फेनो मद्गात्रमागतः |
११ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या वहुविधं दुःखान्निशम्य परिदेवितम् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या वासः समुद्धूतं मारुतेन शशिप्रभम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या वाय़ुः समुद्धूतो वसनं व्यपकर्षत |
४ क
आदि पर्व
अध्याय १५४
व्राह्मण उवाच
तस्या वाय़ुर्नदीतीरे वसनं व्यहरत्तदा |
३ क
विराट पर्व
अध्याय २०
द्रौपद्यु उवाच
तस्या विदित्वा तं भावं स्वय़ं चानृतदर्शनः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
उमो उवाच
तस्या वृत्त्या च वुद्ध्या च प्रीतिमानभवत्प्रभुः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
ऋषभ उवाच
तस्या वै दुर्लभत्वात्तु प्रार्थिताः पार्थिवा मय़ा ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
तस्या व्यपोहने शक्रः परं यत्नं चकार ह |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
भीष्म उवाच
तस्या हि भगिनी तात ज्येष्ठा नाम्ना प्रभावती |
८ क
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
तस्या हेतोर्गदे भीमे तावुभावप्यगृह्णताम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
तस्या हेतोर्महाभाग सवत्सां गां ममेप्सिताम् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
तस्यां काक्षीवदादीन्स शूद्रय़ोनावृषिर्वशी |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां कानीनो गर्भः पराशराद्द्वैपाय़नः |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२०
भीष्म उवाच
तस्यां क्रीडन्त्यभिरताः स्नान्ति चैवाप्सरोगणाः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १११
लोमश उवाच
तस्यां गताय़ां मदनेन मत्तो; विचेतनश्चाभवदृश्यशृङ्गः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
तस्यां गर्भः समभवद्भृगोर्वीर्यसमुद्भवः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां गिरिवरः पुण्यो गय़ो राजर्षिसत्कृतः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
तस्यां गृध्यन्ति राजानः शूरा धर्मार्थकोविदाः |
७० क
आदि पर्व
अध्याय १०६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां चोत्पादय़ामास विदुरः कुरुनन्दनः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८२
भीष्म उवाच
तस्यां छिन्नाय़ां क्रोधदीप्तोऽथ रामः; शक्तीर्घोराः प्राहिणोद्द्वादशान्याः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
तस्यां जज्ञे महावाहुः श्रीमान्कुरुकुलोद्वहः |
२० क
विराट पर्व
अध्याय १८
द्रौपद्यु उवाच
तस्यां तथा व्रुवत्यां तु दुःखं मां महदाविशत् |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय २
विदुर उवाच
तस्यां तस्यामवस्थाय़ां तत्तत्फलमुपाश्नुते ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
तस्यां तस्यामवस्थाय़ां भुङ्क्ते जन्मनि जन्मनि ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
भीष्म उवाच
तस्यां तस्यामवस्थाय़ां भुङ्क्ते जन्मनि जन्मनि ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां तु वानरो दिव्यः सिंहशार्दूललक्षणः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां ते राक्षसाः स्नात्वा तनूस्त्यक्त्वा दिवं गताः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
तस्यां त्रस्ता नृपतय़ः सैनिकाश्च पृथग्विधाः |
३० क
सभा पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां दिव्यानभिप्राय़ान्ददर्श कुरुनन्दनः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
सञ्जय़ उवाच
तस्यां दिशि विशीर्यन्ते शत्रवो मे महामुने ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां दुर्योधनो मन्दो लोभं चक्रे सुदुर्मतिः |
३९ क