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भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
दशभिः साय़कैस्तूर्णमाजघान स्तनान्तरे |
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिर्भल्लैर्भीमसेनमताडय़न् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिर्भीष्ममर्दय़ामासुरोजसा ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिर्वाणैराजघान महाहवे ||
७८ ख
शल्य पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिर्वाणैरुरस्येनमविध्यताम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिर्वाणैर्धृष्टद्युम्नशिखण्डिनौ |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिश्चैको नाराचैर्निहतो गजः ||
७३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिश्चैनान्पुनर्विद्ध्वा ननाद ह |
७८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्दशभिश्चैव विव्याध निशितैः शरैः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्भरतश्रेष्ठ दुर्योधनममर्षणम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्विशिखैस्तीक्ष्णैरभिक्रुद्धः स्तनान्तरे ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्विशिखैस्तीक्ष्णैरविध्यत भुजान्तरे ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
दशभिर्विश्वजिद्भिश्च शतैरष्टादशोत्तरैः |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
दशभिर्वृषसेनश्च सौवलश्चापि सप्तभिः |
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
दशभिस्तोमरं छित्त्वा शक्त्या विव्याध पाण्डवम् ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
दशमस्तस्य पुत्रस्तु दशाश्वो नाम भारत |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
दशमस्त्वर्जुनस्यासीदेक एव महाकपिः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २००
मार्कण्डेय़ उवाच
दशमासधृता गर्भे जाय़न्ते कुलपांसनाः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
दशमेऽहनि तस्मिंस्तु दर्शय़ञ्शक्तिमात्मनः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
दशमेऽहनि तस्मिंस्तु भीष्मार्जुनसमागमे |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
दशमेऽहनि राजेन्द्र भीष्मार्जुनसमागमे ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
दशमेऽहनि सम्प्राप्ते तताप रिपुवाहिनीम् |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
दशमेऽहनि सम्प्राप्ते रथानीकं शिखण्डिनः |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय १३४
वैशम्पाय़न उवाच
दशरात्रोषितानां तु तत्र तेषां पुरोचनः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
दशवर्षसहस्राणि स्वर्गे च स महीय़ते |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
दशवाहुस्त्वनिमिषो नीलकण्ठ उमापतिः |
४० क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
दशव्याममिवोद्विद्धं निष्पत्रमकरोत्तदा ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय ११७
अकृतव्रण उवाच
दशव्यामाय़तां कृत्वा नवोत्सेधां विशां पते ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
दशसेना च पृतना पृतना दशवाहिनी ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १३४
अष्टावक्र उवाच
दशा दशोक्ताः पुरुषस्य लोके; सहस्रमाहुर्दश पूर्णं शतानि |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
दशाङ्गं यश्चतुष्पादमिष्वस्त्रं वेद तत्त्वतः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
दशाचार्यानुपाध्याय़ उपाध्याय़ान्पिता दश ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०८
भीष्म उवाच
दशाचार्यानुपाध्याय़ उपाध्याय़ान्पिता दश |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
भीष्म उवाच
दशाधिपतय़ः कार्याः शताधिपतय़स्तथा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
दशाध्याय़सहस्राणि सुव्रह्मण्यो महातपाः ||
८८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
दशानां तनय़स्त्वेको दक्षो नाम प्रजापतिः |
७ क
सभा पर्व
अध्याय ४५
दुर्योधन उवाच
दशान्यानि सहस्राणि नित्यं तत्रान्नमुत्तमम् |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
दशान्यानि सहस्राणि यतीनामूर्ध्वरेतसाम् |
४० क
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
दशान्यानि सहस्राणि येषामन्नं सुसंस्कृतम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
दशाप्यन्ये ये पुरं धारय़न्ति; त्वय़ा सृष्टास्ते हि तेभ्यः परस्त्वम् |
७० ख
आदि पर्व
अध्याय ३३
सूत उवाच
दशामैनं प्रगृह्याशु कृतमेवं भविष्यति |
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
दशार्णपतिदूतेन मन्त्रिमध्ये पुरोधसा ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
दशार्णपतिना सार्धं विरोधे भरतर्षभ ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
दशार्णराजो राजंस्त्वामिदं वचनमव्रवीत् |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय १
अर्जुन उवाच
दशार्णा नवराष्ट्रं च मल्लाः शाल्वा युगन्धराः ||
९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
दशार्णाधिपतिः शूरः क्षत्रदेवश्च मारिष |
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
दशार्णाधिपतिश्चापि गजं भूमिधरोपमम् |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
दशार्धप्रविभक्तानां भूतानां वहुधा गतिः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
दशार्वुदान्यददं गोसवेज्या; स्वेकैकशो दश गा लोकनाथ |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
दशाश्वमेधमाप्नोति गाणपत्यं च विन्दति |
२५ ख