अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
धार्मिका गुणसम्पन्नाः सत्यार्जवपराय़णाः |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
धार्मिकांश्चानुगृह्णाति भवत्यथ यमस्तदा ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
धार्मिकान्धर्मकार्येषु अर्थकार्येषु पण्डितान् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
धार्मिकान्पूजय़न्तीह न धनाढ्यान्न कामिनः ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
धार्मिकाश्च प्रजा राजंश्चत्वारोऽतीव भारत ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
धार्मिकेण कृतो धर्मः कर्तारमनुवर्तते ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
धार्मिको नित्यभक्तश्च पितॄन्नित्यमतन्द्रितः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
धार्मिको भीमसेनोऽसावित्याहुस्त्वां पुरा जनाः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
युधिष्ठिर उवाच
धार्मिकोऽर्थानसम्प्राप्य राजामात्यैः प्रवाधितः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२९
श्रीभगवानु उवाच
धार्यत इति ||
५ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
धार्यतामप्रमादेन गर्भोऽय़ं सुमहोदय़ः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
धार्यते स्वय़मीशेन राजन्नाराय़णेन ह ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९३
वसिष्ठ उवाच
धार्यते हि त्वय़ा ग्रन्थ उभय़ोर्वेदशास्त्रय़ोः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
धार्यन्ते या द्विजैस्तात मोक्षशास्त्रविशारदैः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
धार्यौ प्रय़त्नतो गर्भावित्युक्त्वा स महातपाः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
धारय़ंस्तु स तान्वाणाञ्शिखण्डी वह्वशोभत |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
६५
सुदेव उवाच
धारय़त्यात्मनो देहं न शोकेनावसीदति ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़न्गाण्डिवं दिव्यं धनुस्तेजोमय़ं दृढम् |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
धारय़न्ति प्रजाश्चेमाः पय़सा हविषा तथा ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
धारय़न्ति प्रजाश्चैव पय़सा हविषा तथा |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२९
श्रीभगवानु उवाच
धारय़न्ति महीं द्यां च शैत्याद्वार्यमृतं यथा ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४३
भीष्म उवाच
धारय़न्ति महीं राजन्निमां सवनकाननाम् ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़न्ति स्म ते प्राणांस्तव पूर्वपितामहाः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
धारय़न्तो ध्वजाग्रेषु द्रौपदेय़ा महारथाः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
धारय़न्तो महार्हाणि कवचानि मनस्विनः |
४१ क
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़न्नगदान्मुख्यान्निर्वृतीर्वेदनानि च |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
३२
सूत उवाच
धारय़न्वसुधामेकः शासनाद्व्रह्मणो विभुः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
धारय़न्विपुलं कांस्यं कवचं च महाप्रभम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१०
भीष्म उवाच
धारय़न्स तपस्तेपे पुत्रार्थं कुरुसत्तम ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१०
भीष्म उवाच
धारय़ाणः स्रजं भाति ज्योत्स्नामिव निशाकरः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
१०१
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास च प्राणानृषींश्च समुपानय़त् ||
१३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
धारय़ामास च प्राणान्पतितोऽपि हि भूतले |
८९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास चात्मानं धारणासु यथाक्रमम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
धारय़ामास चात्मानं यथाशास्त्रं महामुनिः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२९२
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास तं गर्भं दैवं च विधिनिर्मितम् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
धारय़ामास तं शोकं महाद्रिरिव मेदिनीम् ||
३९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास तद्राज्यं निहतज्ञातिवान्धवः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास तस्याथ युय़ुत्सुश्छत्रमुत्तमम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
धारय़ामास दीप्तेन वपुषा घोरदर्शनम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
धारय़ामास देवेशो हस्तैर्यज्ञपतिस्तदा ||
९ ग
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
धारय़ामास भीमोऽपि शरीरमतिपीडितम् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास मेधावी काले काले समभ्यसन् ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास यत्कृष्णः परसेनाभय़ावहम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२९२
वैशम्पाय़न उवाच
धारय़ामास सुश्रोणी न चैनां वुवुधे जनः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
धारय़ामि च चीराणि शाणीं क्षौमाजिनानि च |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
विरूप उवाच
धारय़ामि नरव्याघ्र विकृतस्येह गोः फलम् |
८७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
धारय़ित्वा धनुर्दिव्यं दिव्यान्यस्त्राणि चाहवे |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
धारय़ित्वापि ते श्रुत्वा रोचतां वचनं मम ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
इन्द्र उवाच
धारय़िष्यति सङ्ग्रामे या त्वां शस्त्रैरविक्षतम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
धारय़िष्यसि सङ्ग्रामे चतुरः पाण्डुनन्दनान् |
१७ क