द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
तावकास्तु समीक्ष्यैव वृष्ण्यन्धककुरूत्तमौ |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
तावकैर्भक्षिताश्चान्ये दानवाः शतसङ्घशः |
७५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
तावक्षतौ प्रमुदितौ दध्मतुर्वारिजोत्तमौ |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
तावच्चरत्यसौ वीरः सुधामृतरसाशनः ||
७६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
तावच्छतानां स गवां फलमाप्नोति शाश्वतम् ||
३१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
भीष्म उवाच
तावच्छाल्वपतिं वीरं योजय़ाम्यत्र कर्मणि ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
तावज्जरामरणजन्मशताभिघातै; र्दुःखानि देहविहितानि समुद्वहामि ||
९७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९५
भीष्म उवाच
तावज्जीवति गान्धारे नष्टकीर्तिस्तु नश्यति ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
तावज्जीवेय़मित्येवं तथास्त्विति च सोऽव्रवीत् ||
३७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
तावतः सोऽश्नुते लोकान्सर्वकामदुहोऽक्षय़ान् ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९५
वैशम्पाय़न उवाच
तावता चापि कालेन द्रोणोऽपि प्रत्यजानत ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७३
वाय़ुरु उवाच
तावता स कृतप्रज्ञश्चिरं यशसि तिष्ठति |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
तावतीः प्रददौ गाः स शिविरौशीनरोऽध्वरे ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
तावतीः स समा राजन्नरके परिवर्तते ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
तावतीत्य रथानीकं विमुक्तौ पुरुषर्षभौ |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
तावतीरेव गाः प्रादादामूर्तरय़सो गय़ः ||
१११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
तावतीर्गा ददौ वीर उशीनरसुतोऽध्वरे ||
६२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११२
नारद उवाच
तावतो वाजिदा लोकान्प्राप्नुवन्ति महीपते ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२८२
सत्यवानु उवाच
तावत्कालं च न मय़ा सुप्तपूर्वं कदाचन ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
तावत्कीर्तिभवः शव्दः शाश्वतोऽय़ं भविष्यति ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
१३१
श्येन उवाच
तावत्कीर्तिश्च लोकाश्च स्थास्यन्ति तव शाश्वताः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
तावत्तदा तेषु विशुद्धभावः; संय़म्य पञ्चेन्द्रिय़रूपमेतत् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
तावत्तवाक्षय़ा कीर्तिः सपुत्रस्य भविष्यति ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
वासुदेव उवाच
तावत्तवाक्षय़ा कीर्तिर्लोकाननु चरिष्यति ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
वासुदेव उवाच
तावत्तस्याक्षय़ं स्थानं भवतीति विनिश्चितम् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
तावत्तावदजीवंस्ते नासीद्यमकृतं भय़म् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
तावत्ते पाण्डवैः सार्धं सौभ्रात्रं तात रोचताम् ||
४५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
११३
भीष्म उवाच
तावत्तेन सदारेण जम्वुकेन स भक्षितः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
तावत्त्वं मानमुत्सृज्य गच्छ राजन्धनञ्जय़म् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
तावत्त्वमिह विप्रर्षे विश्रव्धश्चर वै सुखम् ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
तावत्त्वय़ि महाराज दुःखं वै स निवत्स्यति ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
तावत्पार्थेन शूरेण सन्धिस्ते तात युज्यताम् ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
तावत्पुण्यकृताँल्लोकाननन्तान्पुरुषोऽश्नुते ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१९४
कर्ण उवाच
तावत्प्रहरणं तेषां क्रिय़तां मा विचारय़ ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९४
कर्ण उवाच
तावत्प्रहरणीय़ास्ते रोचतां तव विक्रमः ||
११ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
तावत्फलाद्भ्रंशय़ति दातारं तस्य वालिशम् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
तावत्स पुरुषव्याघ्र स्वर्गलोके महीय़ते ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
तावत्संवत्सराः प्रोक्ता व्रह्मलोकस्य धीमतः ||
१२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
तावत्सुवृत्तावनमन्त माय़या; सत्तमा गा अरुणा उदावहन् ||
६२ ख
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
तावत्स्वपिमि विश्वात्मा सर्वलोकपितामहः ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५७
दुर्योधन उवाच
तावदप्यपरित्याज्यं भूमेर्नः पाण्डवान्प्रति ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
तावदप्यपरित्याज्यं भूमेर्नः पाण्डवान्प्रति ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
तावदस्मिन्सुतस्नेहादनिर्वेदेन वर्तत ||
९९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४२
व्राह्मण उवाच
तावदिच्छामि पाथेय़मादातुं पारलौकिकम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
तावदीर्घेण कालेन व्रह्मलोकपुरस्कृतौ |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
तावदेते हरिष्यन्ति तव राज्यमरिन्दम ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
गृध्र उवाच
तावदेनं परित्यज्य प्रेतकार्याण्युपासत ||
९३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
तावदेव त्वय़ा कर्ण शक्यं वक्तुं यथेच्छसि ||
४८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
तावदेव महाय़क्ष प्रसादं कुरु गुह्यक ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
तावदेव समावृत्तं वलं पार्थिवसत्तम ||
८ ख