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द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णः शरैस्तीक्ष्णैरभिमन्युं दुरासदम् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कर्णमुखान्क्रुद्धान्क्षत्रिय़ांस्तान्रुषोत्थितान् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णरथं यान्तमरीन्घ्नन्तं धनञ्जय़म् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णसमादिष्टा दूताः प्रत्वरिता रथैः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णसुतत्रस्ताः सोमका विप्रदुद्रुवुः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णस्तु विंशत्या शराणां भीममार्दय़त् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णस्य दुर्धर्षं स्यन्दनप्रवरं महत् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णस्य मिषतो द्रौणेर्दुर्योधनस्य च |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णस्य सङ्क्रुद्धो भीमसेनः प्रतापवान् |
५१ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कर्णे हते राजन्धार्तराष्ट्रः सुय़ोधनः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो जय़प्रेप्सुर्मानी सर्वधनुर्भृताम् |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो द्विषत्सेनां शरवर्षैर्विलोडय़न् |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कर्णो महच्चापं विकृष्याभ्यधिकं रुषा |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज ददाह रिपुवाहिनीम् |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज धनुश्छित्त्वा महात्मनः |
८४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज पाण्डवं निशितैः शरैः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज पाण्डुसैन्यान्यशातय़त् |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज प्रविवेश महारणम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज प्रेषय़ामास साय़कान् |
८० क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज भीमं विद्ध्वा त्रिभिः शरैः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महाराज व्याक्षिपद्विजय़ं धनुः |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो महेष्वासः पाण्डवानामनीकिनीम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो रणे दृष्ट्वा पार्षतं परवीरहा |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो लघुचित्रास्त्रय़ोधी; सर्वा दिशो व्यावृणोद्वाणजालैः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो हतं मत्वा वृषसेनं महारथः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णोऽभ्ययादेनमस्यन्नस्यन्तमन्तिकात् |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
कृप उवाच
ततः कर्तासि शत्रूणां युध्यतां कदनं महत् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
ततः कर्म प्रववृते सर्पसत्रे विधानतः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
ततः कर्म समादत्ते पुनरन्यन्नवं वहु |
५५ क
वन पर्व
अध्याय २००
व्याध उवाच
ततः कर्म समादत्ते पुनरन्यन्नवं वहु |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
व्रह्मो उवाच
ततः कर्म समारव्धं व्राह्मणैः कपनाशनम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
च्यवन उवाच
ततः कर्म समारव्धं हिताय़ सहसाश्विनोः |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कर्मान्तरे राजन्नगस्त्यस्य महात्मनः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कलांशं वित्तस्य मनुष्येभ्यः प्रय़च्छति ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
ततः कलिङ्गसैन्यानां प्रमुखे भरतर्षभ |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
ततः कलिङ्गाः सङ्क्रुद्धा भीमसेनममर्षणम् |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
ततः कलिङ्गैर्युय़ुधे सोऽचिन्त्यवलविक्रमः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय ११४
लोमश उवाच
ततः कल्याणरूपाभिर्वाग्भिस्ते रुद्रमस्तुवन् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
ततः कवन्धः कश्चित्तु धनुरालम्व्य तिष्ठति |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
ततः काञ्चनचित्राणां सजलाम्वुदनादिनाम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कामं चरेत्पश्चात्सिद्धार्थस्य हि तत्फलम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २१
सूत उवाच
ततः कामगमः पक्षी महावीर्यो महावलः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
ततः काम्पिल्यमासाद्य दशार्णाधिपतिस्तदा |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः काम्यकमासाद्य पुनस्ते भरतर्षभाः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
ततः काम्वोजमुख्यानां नदीजानां च वाजिनाम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
मुनिरु उवाच
ततः कारणमाज्ञाय़ पुरुषं पुरुषं जहि ||
५८ ख
वन पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कार्मुकमुद्यम्य भीमसेनो महावलः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततः कार्ष्णिर्महाराज निशितैः साय़कैस्त्रिभिः |
११ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
ततः कालञ्जरं गत्वा पर्वतं लोकविश्रुतम् |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कालपरीतः स वैरस्योद्धुक्षणे रतः |
८ क