chevron_left  तस्मादुद्विजतेarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मादुद्विजते लोको धर्मार्थाद्यो वहिष्कृतः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
तस्मादुन्मज्जनस्तिष्ठेन्निस्तरेत्प्रज्ञय़ा यथा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
तस्मादुन्मज्जनस्यार्थे प्रय़तेत विचक्षणः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
तस्मादुपावृत्य ततः क्रमेण; सोऽग्रे स्म सन्तिष्ठति भूतसर्गम् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
तस्मादुपावृत्य मनुष्यलोके; ततो महान्मानुषतामुपैति ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
भीष्म उवाच
तस्मादुपासस्व परं महच्छुचि; शिवं विमोक्षं विमलं पवित्रम् |
१०७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०
विष्णुरु उवाच
तस्मादुपाय़ं वक्ष्यामि यथासौ न भविष्यति ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
मृत्युरु उवाच
तस्मादुभौ कालवशावावां तद्दिष्टकारिणौ |
६१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
तस्मादूर्ध्वगतेर्दाता भवेदिति विनिश्चय़ः ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्मादृषिः कुमारस्य विश्वामित्रोऽभवत्प्रिय़ः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
शर्मिष्ठो उवाच
तस्मादृषेर्ममापत्यमिति सत्यं व्रवीमि ते ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मादृषेस्तद्भवतीति विद्या; द्दिव्यन्तरिक्षे भुवि चाप्सु चापि ||
६९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३
सहदेव उवाच
तस्मादेकान्तमुत्सृज्य पूर्वैः पूर्वतरैश्च यः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ११०
पाण्डुरु उवाच
तस्मादेकोऽहमेकाहमेकैकस्मिन्वनस्पतौ |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
तस्मादेतत्त्रय़ं यत्नादुपसेवेत पण्डितः ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय १८८
युधिष्ठिर उवाच
तस्मादेतदहं मन्ये धर्मं द्विजवरोत्तम ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मादेतद्द्वय़ं जह्याद्य इच्छेच्छाश्वतं सुखम् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
तस्मादेतद्धि ते मूढ व्रह्मास्त्रं प्रतिभास्यति ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११
शल्य उवाच
तस्मादेतद्भवेत्सत्यं त्वय़ोक्तं द्विजसत्तम ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २१४
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्मादेतद्रक्ष्यमाणा गरुडी सम्भवाम्यहम् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ८५
यय़ातिरु उवाच
तस्मादेतद्वर्जनीय़ं नरेण; दुष्टं लोके गर्हणीय़ं च कर्म |
५ क
सभा पर्व
अध्याय १४
कृष्ण उवाच
तस्मादेतद्वलादेव साम्राज्यं कुरुतेऽद्य सः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मादेतन्मय़ा देवि त्वच्छुद्ध्यर्थं विचारितम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०६
गुरुरु उवाच
तस्मादेता विशेषेण नरोऽतीय़ुर्विपश्चितः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
च्यवन उवाच
तस्मादेतान्नरो नित्यं दूरतः परिवर्जय़ेत् ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
तस्मादेतेषु भावेषु न प्रसज्जेत पण्डितः ||
८३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
तस्मादेतेषु सर्वेषु प्रीतिमान्भव पार्थिव |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
तस्मादेतैरधिक्षिप्तः सहेन्नित्यमसञ्ज्वरः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
तस्मादेनं राक्षसं घोररूपं; जहि शक्त्या दत्तय़ा वासवेन |
५० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
तस्मादेनं वधिष्यामि राजानं धर्मभीरुकम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
तस्मादेनं समुत्सृज्य स्वगृहान्गच्छताशु वै ||
५७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३१
व्राह्मण उवाच
तस्मादेनं सम्यगवेक्ष्य लोभं; निगृह्य धृत्यात्मनि राज्यमिच्छेत् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मादेव तु राजर्षेः शर्मिष्ठा वार्षपर्वणी |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३२
नरनाराय़णावू ऊचतुः
तस्मादेव समुद्भूतं तेजो रूपगुणात्मकम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७२
भीष्म उवाच
तस्मादेवं परं धर्मं मन्यन्ते धर्मकोविदाः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१
देवस्थान उवाच
तस्मादेवं प्रय़त्नेन कौन्तेय़ परिपालय़ ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
तस्मादेवं विजानन्ति ये जना गुणदर्शिनः ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
तस्मादेवं विजानीहि कुरूणां वंशवर्धन |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १००
भीष्म उवाच
तस्मादेवं विधातव्यं नित्यमेव युधिष्ठिर ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
तस्मादेवंविधं भक्ष्यं भक्षय़ामि वुभुक्षितः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १६१
तपत्यु उवाच
तस्मादेवङ्गते काले याचस्व पितरं मम |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
तस्मादेवङ्गतेऽद्य त्वमुपारमितुमर्हसि ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मादेष सुतस्तुभ्यं पाण्डुरेव भविष्यति ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १२६
दुर्योधन उवाच
तस्मादेषोऽङ्गविषय़े मय़ा राज्येऽभिषिच्यते ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३९
श्रीभगवानु उवाच
तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रिय़ाः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
तस्माद्गच्छन्तु पुरुषाः स्मारणाय़ाप्तकारिणः |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्गच्छन्तु मे योधा वलेन महता वृताः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
तस्माद्गच्छामहे सर्वे यत्र राजा युधिष्ठिरः |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
तस्माद्गत्वा ऋषिश्रेष्ठो याच्यतां सुरसत्तमाः |
२८ क