chevron_left  तामापतन्तींarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय २३१
वैशम्पाय़न उवाच
तामापतन्तीं सम्प्रेक्ष्य गन्धर्वाणां महाचमूम् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सम्प्रेक्ष्य ज्वलन्तीमशनीमिव |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सम्प्रेक्ष्य विय़त्स्थामशनीमिव |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा कलिङ्गानां महाचमूम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा कौरवाणां महाचमूम् |
७८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा गदां दृष्ट्वा युधिष्ठिरः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा गदां दृष्ट्वा वृकोदरः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा घोररूपां दुरासदाम् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा घोररूपां भय़ावहाम् |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा घोररूपां विशां पते |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा तस्य वाहोर्वलेरिताम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा द्विधा चिच्छेद भारत |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा धर्मराजः शिलाशितैः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा पट्टवद्धामय़स्मय़ीम् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा प्रेक्ष्य द्रोणो विशां पते |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा मृत्युकल्पां सुतेजनाम् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा युगान्ताग्निसमप्रभाम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा रुक्मदण्डां दुरासदाम् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा शक्तिं कनकभूषणाम् |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा शक्तिमुल्कामिवाम्वरात् |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा शरैः काञ्चनभूषणैः |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा शस्त्रवृष्टिं निरन्तराम् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा सहदेवप्रवेरिताम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा हेमदण्डां सुवेगिताम् |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
तामापतन्तीं सहसा हेमपट्टविभूषिताम् |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
तामाप्तुमिच्छन्युध्यस्व स्थिरो भूत्वाद्य पाण्डवम् ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
तामामन्त्र्य च गोविन्दः कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम् |
१०४ क
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
तामावभाषे कल्याणीं सा चास्य न शृणोति वै ||
११ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
तामावभाषे देवेन्द्रः साम्ना परमवल्गुना |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
तामाशां विफलां कृत्वा निस्तीर्णौ तौ परन्तपौ |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
तामाशां हृदय़े कृत्वा समाश्वास्य च भारत |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
तामाश्रमपदे तस्य रुरुर्दृष्ट्वा प्रमद्वराम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
तामाश्रमे स्त्रिय़ं तात तापसोऽभ्यवपद्यत |
२१ क
स्त्री पर्व
अध्याय ६
विदुर उवाच
तामाहुस्तु जरां प्राज्ञा वर्णरूपविनाशिनीम् ||
६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
नारद उवाच
तामाहूय़ तदा देवो लोकानामादिरीश्वरः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २५३
वैशम्पाय़न उवाच
तामिन्द्रसेनस्त्वरितोऽभिसृत्य; रथादवप्लुत्य ततोऽभ्यधावत् |
१० क
सभा पर्व
अध्याय ६२
द्रौपद्यु उवाच
तामिमां धर्मराजस्य भार्यां सदृशवर्णजाम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
तामिस्रं प्रथमं पक्षं वीतशोकभय़ो वस ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
तामुग्रतपसो यान्ति सुव्रताः सत्यवादिनः ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
तामुत्तमां परकाय़ापहन्त्रीं; दृष्ट्वा सौतेर्वाहुसंस्थां ज्वलन्तीम् |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
तामुद्यतामभिप्रेक्ष्य वङ्गानामधिपस्त्वरन् |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
तामुपारुह्य नकुलो धनूंषि निदधत्स्वय़म् |
२५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
तामुपेत्य निरानन्दां दुःखशोकसमन्विताम् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
तामुपेत्य महात्मानः सह तैर्व्राह्मणर्षभैः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
तामुपेत्य महात्मानस्तेऽवसन्व्राह्मणैः सह ||
३८ ख
सभा पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
तामुपेत्य हृषीकेशः प्रीत्या वाष्पसमन्वितः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
तामुवाच ततो माता सुतां सत्यवतीं तदा |
३० क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
तामुवाच ततो राजा सान्त्वय़ञ्श्लक्ष्णय़ा गिरा |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
तामुवाच ततो वह्निर्धार्यतां धार्यतामय़म् |
६२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
तामुवाच ततो व्यासो यत्ते कार्यं विवक्षितम् |
१७ क