chevron_left  तावकाञ्जालसञ्छन्नानुरोघण्टाविभूषितान्arrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
तावकाञ्जालसञ्छन्नानुरोघण्टाविभूषितान् ||
११३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
तावकानवधीत्क्रुद्धो भीमस्य वलमादधत् ||
११५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
तावकानां च वलिनां परेषां चैव भारत ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
तावकानां च समरे पाण्डवानां च भारत ||
५१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
तावकानां च समरे पाण्डवेय़ैर्युय़ुत्सताम् ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
तावकानां तु योधानां वध्यतां निशितैः शरैः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
तावकानां तु सैन्यानां प्रहर्षः समजाय़त |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परा प्रीतिः पाण्डूनां चाभवद्व्यथा ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च त्यक्त्वा प्राणानभूद्रणः ||
६९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च दृष्ट्वा शान्तनवं रणे ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च देवासुररणोपमम् |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च नासीत्कश्चित्पराङ्मुखः ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च नासीत्कश्चित्पराङ्मुखः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च निघ्नतामितरेतरम् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च निघ्नतामितरेतरम् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च निघ्नतामितरेतरम् ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च परस्परवधैषिणाम् ||
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च प्रेक्षका रथिनोऽभवन् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च मृत्युं कृत्वा निवर्तनम् ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च युध्यतां भरतर्षभ |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च योधानां भरतर्षभ ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च राजन्दुर्मन्त्रिते तव ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च व्यतिषक्तरथद्विपम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च संय़ुगे भरतोत्तम |
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च सङ्ग्रामेष्वनिवर्तिनाम् ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च सङ्ग्रामेष्वनिवर्तिनाम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च समरे विजिगीषताम् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परेषां च समेतानां युय़ुत्सय़ा ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२७
सञ्जय़ उवाच
तावकानां परैः सार्धं राजन्दुर्मन्त्रिते तव ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तावकानां भय़ं घोरं समपद्यत भारत ||
७३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
सञ्जय़ उवाच
तावकानां महाराज भय़मासीत्सुदारुणम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
तावकानां महेष्वासः प्रमुखे तत्समाक्षिपत् ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
तावकानां मुखं कर्णः परेषां च धनञ्जय़ः ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
तावकानां रणे कर्णो ग्लह आसीद्विशां पते |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
तावकानां रणे भीष्मो ग्लह आसीद्विशां पते |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
तावकानां रथाः सप्त समन्तात्पर्यवारय़न् |
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
तावकानां वभौ मध्ये गवां मध्ये यथा वृषः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
तावकानामनीकानि परेषां चापि निर्ययुः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तावकानामनीकेषु पाण्डवा जितकाशिनः |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
तावकानामपि रणे भीमं प्राप्य महावलम् ||
५८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तावकाश्च परे चैव साधु साध्वित्यथाव्रुवन् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
तावकाश्च महाराज कर्णपुत्रश्च दंशितः |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
तावकाश्च महेष्वासा युद्धाय़ैव मनो दधुः ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
तावकाश्च महेष्वासाः पाण्डवाश्च महारथाः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
तावकाश्च हतं दृष्ट्वा राक्षसेन्द्रं महावलम् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
तावकास्तव पुत्राश्च द्रोणानीकस्थय़ोस्तय़ोः |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
तावकास्तव पुत्राश्च प्राय़शो विमुखाभवन् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
तावकास्तव पुत्राश्च सहिताः सर्वराजभिः |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
तावकास्तु महाराज जय़ं लव्ध्वा महाहवे |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
तावकास्तु रणे यत्ताः सहसेना नराधिपाः |
३९ क