chevron_left  चित्रसेनादय़श्चैवarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनादय़श्चैव पुत्रास्तव विशां पते |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनेन सहिताः सहिताः पाणिभद्रकैः |
९ क
वन पर्व
अध्याय २३४
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रसेनो गदां गृह्य सव्यसाचिनमाद्रवत् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो महाराज चेकितानं समभ्ययात् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो महाराज शतानीकं पुनर्युधि |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो रुरोधाशु शरैर्द्रोणवधेप्सय़ा ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो विकर्णश्च तथा दुर्मर्षणो युवा |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो विकर्णश्च भगदत्तश्च मारिष |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो विकर्णश्च राजन्दुर्मर्षणस्तथा |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो विकर्णश्च सप्तैते विनिपातिताः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनो विकर्णश्च सैन्धवोऽथ वृहद्वलः |
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रा विविधवर्णाभाश्चित्रमञ्जरिधारिणः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
चित्रा सिद्धिगतिः प्रोक्ता कालावस्थाविभागतः ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय १
महाभारत कथा
चित्राः श्रोतुं कथास्तत्र परिवव्रुस्तपस्विनः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गदं कुरुश्रेष्ठं विचित्रशरकार्मुकम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १६९
भीष्म उवाच
चित्राङ्गदं कौरवाणामहं राज्येऽभ्यषेचय़म् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
चित्राङ्गदं भ्रातरं वै महाराज्येऽभ्यषेचय़म् ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गदा परित्रस्ता प्रविवेश रणाजिरम् ||
३८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गदा याश्च काश्चित्स्त्रिय़ोऽन्याः; सार्धं राज्ञा प्रस्थितास्ता वधूभिः ||
१० ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गदा यय़ौ चापि मणिपूरपुरं प्रति |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
चित्राङ्गदा वरारोहा नापराध्यति किञ्चन ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय २०९
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गदां पुनर्द्रष्टुं मणलूरपुरं यय़ौ ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
चित्राङ्गदाश्चित्रमाल्याः सर्वे ज्वलितकुण्डलाः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
चित्राङ्गदाय़ाः पुत्रेण पुत्रिकाय़ा धनञ्जय़ः |
२०९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
चित्राङ्गदाय़ाः शृण्वन्त्याः कौरव्यदुहितुस्तथा ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गदो विचित्रवीर्यश्च ||
५२ ग
वन पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राङ्गमजिनैश्चित्रैर्हरिद्रासदृशच्छविम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
चित्राङ्गो विस्फुरन्हृष्टो वने वसति निर्भय़ः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २
कर्ण उवाच
चित्राणि चापानि च वेगवन्ति; ज्याश्चोत्तमाः संहननोपपन्नाः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रानीकाः सुवपुषो ज्वलिता इव पावकाः |
८ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रान्कलापान्विस्तीर्य सविलासान्मदालसान् |
५४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रान्भक्ष्यविकारांश्च चक्रुरस्य यथा पुरा ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रान्संनाहानवमुञ्चन्तु चैषां; वासांसि दिव्यानि च भानुमन्ति |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
चित्राभरणवर्मोर्मिः शस्त्रनिर्मलफेनवान् |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
चित्राश्वैश्चित्रसंनाहैः सोदर्यैरभिरक्षितः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
चित्रास्त्रतां च पार्थस्य विक्रमन्ते स्म कौरवाः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
चित्रास्वात्यन्तरे चैव धिष्ठितः परुषो ग्रहः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
चित्राय़ां तु ददच्छ्राद्धं लभेद्रूपवतः सुतान् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६३
नारद उवाच
चित्राय़ामृषभं दत्त्वा पुण्यान्गन्धांश्च भारत |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
चित्राय़ुधं चित्रमाल्यं चित्रवर्माय़ुधध्वजम् |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
चित्राय़ुधश्च नृपतिर्मतो मे रथसत्तमः |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
चित्राय़ुधश्चित्रवर्मा समरे चित्रय़ोधिनः ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
चित्राय़ुधश्चित्रय़ोधी कृत्वा तौ कदनं महत् |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
चित्राय़ुधांश्चाप्यजय़न्नेते कृष्णाजिनध्वजाः |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रे दुन्दुभिसंनादे प्रत्यमुञ्चत्तले शुभे ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
चित्रे रथे पाण्डुसुतो वभासे; नक्षत्रचित्रे विय़तीव चन्द्रः ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय २७८
नारद उवाच
चित्रेऽपि च लिखत्यश्वांश्चित्राश्व इति चोच्यते ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रैर्हैमैरासनैरभ्युपेता; माचख्युस्ते तस्य राज्ञः प्रतीताः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
चित्रैश्च विविधाकारैः शरीरावरणैरपि |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
चित्रोपचित्रश्चित्राक्षश्चारुचित्रः शरासनः |
१८ क