वन पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्तीसुतो राजा लघुभिर्व्राह्मणैः सह |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुन्तीसुतो राजा विचिन्त्य पुरुषर्षभः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुमारं सा देवी प्राप्तकालमजीजनत् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२१७
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः कुमारपितरं स्कन्दमाहुर्जना भुवि ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुमारमादाय़ देवा व्रह्मपुरोगमाः |
५० क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुमारविषय़े श्रेणिमन्तमथाजय़त् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
ततः कुमुदनाथेन कामिनीगण्डपाण्डुना |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुरुश्रेष्ठमुपेत्य पौराः; प्रदक्षिणं चक्रुरदीनसत्त्वाः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
ततः कुरुषु भग्नेषु वीभत्सुरपराजितः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुरूणामनय़ो भविता वीरनाशनः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ततः कुरूणामभवदार्तनादो महामृधे |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
ततः कुरूणामाचार्यः श्रुत्वा पुत्रस्य ते वचः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ततः कुलूताधिपतिश्चापमाय़म्य साय़कैः |
३५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुवेरभवनं गान्धारीसहितो नृपः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततः कुव्जाम्रकं गच्छेत्तीर्थसेवी यथाक्रमम् |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कुशलपूर्वं स मद्रराजोऽरिसूदनः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
ततः कृच्छ्रगतं कर्णं दृष्ट्वा कर्णादनन्तरः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१६०
गन्धर्व उवाच
ततः कृतज्ञं धर्मज्ञं रूपेणासदृशं भुवि |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
ततः कृतज्ञा वलिनः सुहृदो जितकाशिनः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृतस्वस्त्ययना धौम्येन सह पाण्डवाः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृतस्वस्त्ययना राज्यलाभाय़ पाण्डवाः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृतस्वस्त्ययनो महात्मा; युधिष्ठिरः सागरगामगच्छत् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
ततः कृतस्वस्त्ययनो मात्रा प्रत्यभिनन्दितः |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृताभिषेकास्ते नैशं कर्म समाचरन् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
ततः कृतास्त्रास्ते सर्वे परिवार्य वृकोदरम् |
३५ क
सभा पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृताह्निकाः सर्वे दिव्यचन्दनरूषिताः |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
ततः कृतेऽवहारे च प्रहृष्टाः कुरुपाण्डवाः |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
ततः कृत्या समभवदृषेस्तस्य तपोवलात् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
ततः कृत्वा तु राजा स आगमं प्रीतिमानथ |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ततः कृत्वा विधिं सर्वं शिविरस्य यथाविधि |
७९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृत्वा स्थपतय़ः शिल्पिनोऽन्ये च ये तदा |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
ततः कृतय़ुगं नाम कालेन गुणतां गतम् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
ततः कृपः शरैस्तीक्ष्णैः सोऽतिविद्धो महारथः |
८ क
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृपमुपादाय़ विरथं ते नरर्षभाः |
२८ क
विराट पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृपश्च कर्णश्च द्रोणश्च रथिनां वरः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
ततः कृपश्च द्रौणिश्च कृतवर्मा च सात्वतः |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णं महावाहुं भ्रातृभ्यां सहितं तदा |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णं महावाहुः सात्यकिः सत्यविक्रमः |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णं समासाद्य कुन्ती राजसुता तदा |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णः पार्थमुवाच सङ्ख्ये; महोरगं कृतवैरं जहि त्वम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णः स्मितं कृत्वा परिणन्द्य शिवेन तम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णवचः श्रुत्वा संस्पृश्याम्भो धनञ्जय़ः |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णश्च पार्थश्च धर्मराजे युधिष्ठिरे |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णश्च पार्थश्च संस्पृश्यापः कृताञ्जली |
७० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णस्तु समरे दृष्ट्वा भीष्मपराक्रमम् |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णस्य तद्वाक्यं धर्मार्थसहितं हितम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णस्य वचनात्सात्यकिस्त्वरितो यय़ौ |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णा च भीमश्च यमौ चापि यशस्विनौ |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णा धर्मराजमिदं वचनमव्रवीत् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णाव्रवीद्वाक्यं प्रहसन्ती मनोरमा |
२१ क