द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णो महातेजा जानन्पार्थस्य निश्चय़म् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
ततः कृष्णो महावाहुः पुनरेव युधिष्ठिर |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णो महावाहू रजतप्रतिमान्हय़ान् |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
ततः कृष्णोऽर्जुनं दृष्ट्वा कर्णास्त्रेणाभिपीडितम् |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
ततः कृष्णोऽव्रवीत्पार्थं कृतवर्मणि मा दय़ाम् |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णोऽव्रवीद्वाक्यं पुनर्मतिमतां वरः |
४६ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः केचिन्महीपाला नाव्रुवंस्तत्र किञ्चन |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
ततः केवलधर्मासौ भवत्यव्यक्तदर्शनात् |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः केशान्समुत्क्षिप्य वेल्लिताग्राननिन्दितान् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कैलासनिलय़ो धनाध्यक्षोऽभ्यभाषत |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कोट्यो विनिष्पेतुः शक्तीनां भरतर्षभ ||
६३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कोपपरीताङ्गी पुत्रशोकपरिप्लुता |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कोशं समादाय़ वाहनानि वलानि च |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
ततः कोसलको राजा सौभद्रस्य विशां पते |
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः कौरवसैन्यानां प्रादुरासीन्महास्वनः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
ततः कौशल्यमाहूय़ वैदेहो वाक्यमव्रवीत् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः क्रमेणोपय़युर्नृवीरा; यथागतेनैव पथा समग्राः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ततः क्राथः शरव्रातैरार्जुनिं समवाकिरत् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धः शरानस्यन्सूतपुत्रो व्यरोचत |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
ततः क्रुद्धः श्वसन्वाय़ुः पातय़न्वै महाद्रुमान् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२७४
मातलिरु उवाच
ततः क्रुद्धः ससर्जाशु दशग्रीवः शिताञ्शरान् |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धस्त्रिभिर्वाणैर्भीमसेनं हसन्निव |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धा महाराज सौवलस्य पदानुगाः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२७४
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः क्रुद्धो दशग्रीवः प्रिय़े पुत्रे निपातिते |
१ क
वन पर्व
अध्याय
६
विदुर उवाच
ततः क्रुद्धो धृतराष्ट्रोऽव्रवीन्मां; यत्र श्रद्धा भारत तत्र याहि |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो नकुलस्तं महात्मा; शरैर्महोल्काप्रतिमैरविध्यत् |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
ततः क्रुद्धो महादेवस्तदुपादाय़ कार्मुकम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज आर्श्यशृङ्गिर्महावलः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज कपिलो मुनिसत्तमः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज तव पुत्रो महारथः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज द्रोणपुत्रः प्रतापवान् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज धनुर्वेदस्य पारगः |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज धृष्टद्युम्नः प्रतापवान् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज नकुलः परवीरहा |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज नकुलः परवीरहा |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज भीमसेनः पराक्रमी |
९० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज भीमसेनः प्रतापवान् |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज भीष्मः प्रहरतां वरः |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज भैमसेनिर्महावलः |
९९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज शैनेय़ः प्रहसन्निव |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज सहदेवः प्रतापवान् |
४३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज सात्वतो युद्धदुर्मदः |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज सौवलः परवीरहा |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महावाहुर्भीमसेनः प्रतापवान् |
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महावाहुर्भीमसेनोऽभ्यभाषत |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महावाहुर्वार्यमाणः परैर्युधि |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महेष्वासस्तत्सैन्यं प्राद्रवच्छरैः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महेष्वासो भूय़ एव महावलः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महेष्वासो मार्गणैर्भारसाधनैः |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो रणे कर्णः कृत्वा घोरतरं वपुः |
८० क