आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
नारद उवाच
ते चापि सहिते देव्यौ सञ्जय़श्च तमन्वय़ुः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भृगुरु उवाच
ते चाप्यन्तं न पश्यन्ति नभसः प्रथितौजसः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
ते चाप्यस्मान्नोद्धरेय़ुः समूला; न्न कामय़े तांश्च विनश्यमानान् ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
ते चावले परिग्लाने पय़ःपूर्णपय़ोधरे |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६
शल्य उवाच
ते चाव्रुवन्नहुषो घोररूपो; दृष्टीविषस्तस्य विभीम देव |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
ते चास्यै कुण्डले प्राय़च्छत् ||
१६३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
ते चेत्कालकृतोद्योगात्सम्भवन्तीह मानुषाः |
६२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
ते चेत्कुरूननुशास्य स्थ पार्था; निनीय़ सर्वान्द्विषतो निगृह्य |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
ते चेत्तमागतं तत्र वृणुय़ुः कुशलं भवेत् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
ते चेत्पित्र्ये कर्मणि वर्तमाना; आपद्येरन्दिष्टवशेन मृत्युम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५२
युधिष्ठिर उवाच
ते चेत्सर्वे प्रमाणं वै प्रमाणं तन्न विद्यते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
ते चेदक्षत्रिय़ाः सन्तो विरुध्येय़ुः कथञ्चन |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७५
भगवानु उवाच
ते चेदभिनिवेक्ष्यन्ति नाभ्युपैष्यन्ति मे वचः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
ते चेदस्मान्युध्यमानाञ्जय़ेय़ु; र्देवैरपीन्द्रप्रमुखैः सहाय़ैः |
८७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ते चेदिपाञ्चालकरूषमत्स्याः; पार्थाश्च सर्वे सहिताः प्रणेदुः |
१२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
ते चेदिमे कौरवाणामुपाय़; मधिगच्छेय़ुरवधेनैव पार्थाः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
ते चेद्भवन्ति राजेन्द्र ऋध्यन्ते गृहमेधिनः |
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
ते चेन्मनुष्यतां यान्ति यदा कालस्य पर्ययात् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५१
भीष्म उवाच
ते चेन्मिथोऽधृतिं कुर्युर्विनश्येय़ुरसंशय़म् ||
११ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
ते चेल्लोभं न निय़च्छन्ति मन्दाः; कृत्स्नो नाशो भविता कौरवाणाम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३८
व्यास उवाच
ते चैनं न प्रजानन्ति स तु जानाति तानपि ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
ते चैनं भृशसङ्क्रुद्धाः शरव्रातैरवाकिरन् |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७८
नकुल उवाच
ते चैनमनुनेष्यन्ति धृतराष्ट्रं जनाधिपम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
ते चैनमन्ववर्तन्त मन्त्रिणः कालचोदिताः |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ते चैव भ्रातरः पञ्च वासुदेवोऽथ सात्यकिः |
३४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ते चैव भ्रातरः पञ्च वासुदेवोऽथ सात्यकिः |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
ते चैव सप्तसाहस्रा द्विसाहस्राश्च सैन्धवाः ||
१७ ग
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
ते चैव सर्वे सहिताः क्षय़ं यास्यन्ति पार्थिव |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४३
देवशर्मो उवाच
ते चैव हि भवेय़ुस्ते लोकाः पापकृतो यथा |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६६
भीष्म उवाच
ते चैवांशहराः सर्वे धर्मे परकृतेऽनघ ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
ते चैवोभे गदे श्रेष्ठे समासाद्य परस्परम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
विरूप उवाच
ते चोञ्छवृत्तय़े राजन्मय़ा समपवर्जिते |
९४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
ते चोदिताः पार्थिवसत्तमेन; ततः प्रहृष्टा जगृहुः प्रदीपान् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
ते चोद्यमाना विधिना वाहुकेन हय़ोत्तमाः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ते छन्नाः समरे तेन पाण्डवानां महारथाः |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
ते जग्मुर्धरणीं सर्वे कर्णं निर्भिद्य मारिष |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैशम्पाय़न उवाच
ते जग्मुस्तूर्णमाकाशं धनाधिपतिवाजिनः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
ते जघ्नुस्तौ महेष्वासौ ताभ्यां सृष्टांश्च साय़कान् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
ते जनास्तां गतिं यान्ति नाविद्वांसोऽल्पचेतसः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
ते जवेन महावेगाः प्राप्य वैश्रवणालय़म् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
ते जातरुधिरापीडाः पताकाभिरलङ्कृताः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
१९३
दुर्योधन उवाच
ते जानमाना दौर्वल्यं भीमसेनमृते महत् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
ते जानुभिर्जगतीमन्वपद्य; न्गतासवो निर्दशनाक्षिजिह्वाः ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३८
वैशम्पाय़न उवाच
ते जीवन्ति सुखं लोके भवन्ति च निरामय़ाः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
भीष्म उवाच
ते तं क्षुधाभिसन्तप्ताः परिवार्योपतस्थिरे ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
ते तं घनैरिवादित्यं दृष्ट्वा सम्परिवारितम् |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
११६
अकृतव्रण उवाच
ते तं जघ्नुर्महावीर्यमय़ुध्यन्तं तपस्विनम् |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
ते तं तदा तोमरपट्टिशाद्यै; र्व्याविध्य शस्त्रैः सहसाभिपेतुः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
ते तं ददृशुरीशानं तेजोराशिमुमापतिम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ते तं दृष्ट्वा महात्मानं कृत्वा चापि प्रदक्षिणम् |
९३ क