chevron_left  तथैवarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
तथैव स महाराज व्याघ्रः समभवत्तदा ||
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव स महीपालः कृष्णं चक्रगदाधरम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
तथैव सख्यं वीभत्सो चिराय़ भरतर्षभ ||
५४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
तथैव सततं पार्थ रक्षिताभ्यां त्वय़ा रणे |
११ क
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव सत्यभामापि द्रौपदीं परिषस्वजे |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
तथैव सप्तमे भक्ते भक्तानि षडनश्नता |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
तथैव समरे राजंस्त्रासय़ामास पाण्डवान् ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
तथैव समरे राजन्पिता देवव्रतस्तव |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
तथैव सर्वधर्मज्ञः पितुर्मम पितामहः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
तथैव सर्वपाञ्चाला जरासन्धभय़ार्दिताः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७८
वसिष्ठ उवाच
तथैव सर्वभूतानां गावस्तिष्ठन्ति मूर्धनि ||
७ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव सर्वे जगृहुर्वल्कलानि जनाधिप ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
तथैव सवलाः सर्वे राजानो राजसत्तम |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव सहदेवाच्च श्रुतसेनः प्रतापवान् |
१०३ क
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव सहदेवोऽपि धर्मराजेन पूजितः |
१ क
वन पर्व
अध्याय १४१
भीम उवाच
तथैव सहदेवोऽय़ं सततं त्वामनुव्रतः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
तथैव सहिताः पार्थाः स्वेन सैन्येन संवृताः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
तथैव सहिताः सर्वे समाजग्मुर्महीक्षितः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४०
व्यास उवाच
तथैव सहितावेतावन्योन्यस्मिन्प्रतिष्ठितौ ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
तथैव सा च भर्तारं दुःखशीलमुपाचरत् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
तथैव सा श्रिय़ं त्यक्त्वा कन्या भूत्वा यशस्विनी |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
तथैव सात्यकिर्वाणान्दुर्योधनरथं प्रति |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
तथैव सात्यकी राजन्धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
तथैव सात्वतो राजन्हार्दिक्यः परवीरहा |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
तथैव सिंहलाङ्गूलं द्रोणपुत्रस्य भारत |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
तथैव सिद्धा राजेन्द्र तथा वातिकचारणाः |
५९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
तथैव सुखदुःखानि विधानमनुवर्तते ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
तथैव सुमहत्कृत्यं धर्मराजस्य रक्षणे ||
२९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
कृप उवाच
तथैव सुहृदं प्राज्ञं कुर्वाणं कर्म पापकम् |
७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
कृप उवाच
तथैव सुहृदा शक्यो नशक्यस्त्ववसीदति ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव सूताः सह मागधैश्च; नन्दीवाद्याः पणवास्तूर्यवाद्याः |
२८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव सैनिका राजन्राजानमनुय़ान्ति ये |
५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तथैव स्यन्दनाग्रेण प्रमथन्स विधावति |
७९ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
युधिष्ठिर उवाच
तथैव स्यादानृशंस्यात्तथा स्याद्रूपसम्पदा |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव स्वर्गकल्पेषु सभोद्देशेषु भारत |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
तथैव हठवुद्धिर्यः शक्तः कर्मण्यकर्मकृत् |
१३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तथैव हत्वा निःशव्दे निश्चक्राम नरर्षभः ||
१३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
तथैव हस्ताभरणी महामाय़ोऽङ्गदी तथा |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
तथैव हि वधार्थाय़ पुत्राणां पाण्डवो वली |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
तथैव हृष्टवदनस्तथैवादीनमानसः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
तथैवं वदतस्तस्य भारद्वाजस्य मारिष |
५३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
तथैवमुक्त्वा विससर्ज तं शरं; वलाहकं वर्षघनाभिपूजितम् |
९ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
तथैवर्षिगिरिस्तात शुभाश्चैत्यकपञ्चमाः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
तथैवाक्षौहिणीं गृह्य चेदीनामृषभो वली |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
गङ्गो उवाच
तथैवाङ्गिरसः पुत्रः सुरासुरनमस्कृतः |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५
व्यास उवाच
तथैवाङ्गिरसः पुत्रौ व्रततुल्यौ वभूवतुः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
तथैवाचार्यपुत्रेण वाह्लीकेन कृपेण च ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
तथैवाजगरं पर्व विज्ञेय़ं तदनन्तरम् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६२
दुर्योधन उवाच
तथैवातिरथानां च वेत्तुमिच्छामि कौरव ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
तथैवात्तशरो धन्वी तथैव दृढनिश्चय़ः |
२८ क